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फसल ही नहीं, बिजली बेचकर भी मौज काट रहे बिजनौर के किसान, रोज बन रही 1.60 लाख यूनिट बिजली

Published: Fri, 18 Sep 2026 11:44 PM (GMT+05:30)

बिजनौर के किसान अब अपनी कृषि भूमि पर फसल के साथ-साथ सौर ऊर्जा का उत्पादन कर बिजली बेचकर अतिरिक्त आय ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. बिजनौर के किसान अब सौर ऊर्जा से कमा रहे अतिरिक्त आय।

  2. जिले में 15 किसानों ने लगाए 40 मेगावाट के सोलर बिजलीघर।

  3. प्रधानमंत्री कुसुम योजना से किसानों को मिल रहा बड़ा लाभ।

जागरण संवाददाता, बिजनौर। जिले की कृषि भूमि पर फसलों के साथ ही बिजली भी पैदा हो रही है। खेती में युवाओं की अरुचि और मजदूरों की कमी के कारण कई किसान अब सोलर बिजलीघर की ओर रुख कर रहे हैं। 15 किसान अपनी कृषि भूमि में सोलर बिजलीघर लगवा चुके हैं। जिले में ऐसे 40 मेगावाट क्षमता के सोलर बिजलीघर स्थापित हो चुके हैं।

ये चार किलो वाट वाले 40 हजार घरों की बिजली की मांग को पूरा कर सकते हैं। हाल ही में चार मेगावाट क्षमता वाले सोलर बिजलीघर के प्रस्ताव आए हैं। किसान सुशील त्यागी के दोनों बेटे नौकरी करते हैं। उनके पास लगभग 48 बीघा कृषि भूमि है। दोनों बेटे खेतों में आते नहीं थे और मजदूर मिलने में भी समस्या ओ रही थी। सुशील ने खेत में प्रधानमंत्री कुसुम सी-एक योजना के अंतर्गत लगभग 45 बीघा भूमि में तीन मेगावाट का सोलर बिजलीघर लगवा लिया।

15 किसानों के खेतों में लग चुके सोलर बिजलीघर 

लगभग साढ़े दस करोड़ रुपये में लगे सोलर बिजलीघर ने बादल छाने के बावजूद पहले महीने में 2.70 लाख यूनिट बिजली बनाई है। सुशील से शासन 2.99 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीद रहा है। पहले ही महीने अगस्त में आठ लाख रुपये की बिजली बनी है। बादल न होते तो यह रकम दस लाख से अधिक होती। सोलर बिजलीघर संचालित करने में लगभग 50 हजार रुपये महीने का खर्च आता है। जिले में 15 किसानों के खेतों में सोलर बिजलीघर लग चुके हैं।

प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत भी जिले में बड़ी संख्या में घरों पर बिजलीघर लगाए जा चुके हैं। ये पैनल भी हर रोज एक लाख यूनिट से अधिक बिजली बना रहे हैं। इन्हें लगाने पर अनुदान भी मिलता है। नेडा के परियोजना अधिकारी सीपी वर्मा के अनुसार जिले में अब तक लगभग 40 मेगावाट क्षमता वाले सोलर बिजलीघर स्थापित हो चुके हैं।

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इनसे हर रोज 1.60 लाख यूनिट बिजली बन रही है। किसानों को सोलर बिजलीघर की क्षमता के आधार पर अनुदान मिलता है। विद्युत विभाग ग्रामीण क्षेत्र में पहली सौ यूनिट तक 3.50 रुपये यूनिट बिजली देता है जबकि शहरी क्षेत्र में पहली सौ यूनिट तक 5.50 रुपये प्रति यूनिट बिजली देता है। सीडीओ रणविजय सिंह का कहना है कि जिले में लोगों को सोलर बिजलीघर लगवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। कई बिजलीघर स्थापित हो चुके हैं, कुछ के प्रस्ताव और आए हैं।

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प्रधानमंत्री कुसुम सी-एक योजना : किसानों के मौजूदा ग्रिड से जुड़े बिजली के पंपों को सौर ऊर्जा (सोलर) से संचालित करने और उन्हें ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की एक पहल है।1 मेगावाट सोलर ग्रिड बिजलीघर - लागत विवरण

विवरण (Details) राशि (Amount)
कुल परियोजना लागत (Total Project Cost) ₹ 4.50 करोड़
केंद्र सरकार की सब्सिडी (Central Govt. Subsidy) ₹ 1.05 करोड़
राज्य सरकार की सब्सिडी (State Govt. Subsidy) ₹ 50 लाख
किसान की खुद की लागत (Farmer's Share) ₹ 2.95 करोड़
रखरखाव की प्रति वर्ष लागत (Annual Maintenance Cost) ₹ 3 लाख / वर्ष

 

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