कठियारी नदी में बहा अस्थायी रपटा, बिजनौर के ग्रामीणों का भागूवाला से संपर्क कटा
कठियारी नदी में जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों द्वारा बनाया गया अस्थायी रपटा बह गया, जिससे बिजनौर के मिर्जापुर उर्फ पीतमगढ़ ...और पढ़ें

जान जोखिम में डालकर कठियारी नदी पार करतीं छात्राएं। सौ. ग्रामीण
HighLights
कठियारी नदी में अस्थायी रपटा पानी के तेज बहाव में बह गया।
मिर्जापुर-रामपुर चाठा गांवों का भागूवाला से सीधा संपर्क कटा।
ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हुए।
संवाद सूत्र, मंडावली (बिजनौर)। भागूवाला क्षेत्र की कोटावाली में कटियारी नदी का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की ओर से बनाया गया अस्थायी रपटा पानी के तेज बहाव में बह गया। रपटा बहने से मिर्जापुर उर्फ पीतमगढ़ और रामपुर चाठा के ग्रामीणों का भागूवाला से सीधा संपर्क कट गया है। इसके बावजूद ग्रामीण और छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर हैं।
उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड सीमा के समीप कठियारी नदी के पास पीतमगढ़ और रामपुर चाठा गांव बसे हैं। इन गांवों के आवागमन के लिए ग्रामीणों ने करीब तीन माह पहले आपस में चंदा एकत्र कर कठियारी नदी पर अस्थायी रपटा तैयार किया था। नदी का जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के कारण रपटा बह गया। जलस्तर कुछ कम होने पर ग्रामीण जोखिम उठाकर नदी को पार कर रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी छात्र-छात्राओं को हो रही है। कई छात्र-छात्राएं साइकिल लेकर तेज बहाव के बीच नदी पार करते दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि राजगढ़ वन रेंज के जंगल से होकर गुजरने वाले रास्ते में जंगली जानवरों का भी खतरा बना रहता है, लेकिन मजबूरी में उन्हें इसी मार्ग से आवागमन करना पड़ रहा है। ग्रामीण विजेंद्र सिंह, प्रमोद पंवार, कमल सिंह, मनोज कुमार, सुरेंद्र, सुभाष चंद्र, रामकुमार, गोविंद सिंह, बुद्ध सिंह, नरपाल सिंह, धर्मवीर सिंह, राहुल कुमार, जितेंद्र कुमार आदि ने बताया कि समस्या को लेकर ग्रामीण लंबे समय से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
लगभग दो वर्ष पूर्व भी ग्रामीणों ने कठियारी नदी पर स्थायी रपटा बनाने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका, जिससे ग्रामीणों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन से कठियारी नदी पर स्थायी पुल या सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े।
