दिल्ली-एनसीआर के जैंटलमैन पहनते हैं बुलंदशहर की टाई, गांगरौल गांव के हर घर में होती है इसकी सिलाई
बुलंदशहर के गांगरौल गांव की 500 से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर टाई बनाकर आत्मनिर्भर बन रही हैं। ...और पढ़ें

गांगरौल गांव में टाई टाई तैयार करतीं महिलाएं। जागरण
HighLights
गाँव गांगरौल की 500 से अधिक महिलाएं टाई बनाकर स्वावलंबी।
32 स्वयं सहायता समूह और 4 ग्राम संगठन कर रहे सशक्त।
टाई बनाकर दिल्ली-एनसीआर में आपूर्ति, परिवार की आय बढ़ी।
प्रशांत गौड़, बुलंदशहर। सिकंदराबाद तहसील के गांगरौल गांव की 500 से अधिक महिलाएं टाई बनाकर स्वावलंबी हो रहीं हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी कोई महिला टाई बनाने के लिए कपड़ा काट रही है तो कोई सिलाई कर रही हैं। कोई प्रेस कर रहीं है तो कोई पैकिंग कर दिल्ली आर्डर की आपूर्ति करके स्वयं के साथ परिवार की आमदनी बढ़ा रही है।
महिलाओं की बनाई टाई दिल्ली-एनसीआर के स्कूल-कालेजों में बच्चे ही नहीं बल्कि बड़ी-बड़ी कारपोरेट कंपनी और दफ्तरों में लोग इस्तेमाल कर रहे हैं।
हर घर में बनती टाई
गांव गांगरौल में 32 स्वयं सहायता समूह कार्य कर रहे हैं, जबकि चार ग्राम संगठन भी समूहों को सशक्त बना रहे हैं। समूहों से 500 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। अब हर घर में टाई बनाने का कार्य महिलाएं कर रही है। पहले यह काम सीमित था, लेकिन समूह से जुड़कर महिलाओं की स्वावलंबन की राह आसान हो गई है। उन्हें आर्थिक सहायता मिली और अतिरिक्त मशीनें खरीदकर उन्होंने टाई बनाने के कार्य को विस्तार दिया है।

भोले बाबा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष वीना देवी ने बताया कि शादी के बाद गांगरौल स्थित ससुराल पहुंची तो यहां दर्जी का कार्य विरासत में मिला, लेकिन आमदनी कुछ खास नहीं थी। यह देख ससुर दिल्ली पहुंचे और वहां उन्होंने टाई बनाने का वर्कशाप शुरू किया।
ग्रामीणों को बुलाकर उन्हें टाई बनाना सिखाया। बाद में गांव आकर लोग अपने घर पर यह काम करने लगे। परिवार की महिलाएं भी सहयोग करने लगीं, लेकिन आय सीमित रही।
समूह सखी ऊषा बतातीं है कि 2019 में महिलाओं को एनआरएलएम का साथ मिला तो हालात बदलने लगे। दिल्ली जाने वाली प्रमुख ट्रेनों का ठहराव गांव के रेलवे स्टेशन पर होने का भी फायदा मिला। इससे दिल्ली के सदर बाजार तक पहुंचना आसान रहा।
प्रतिदिन बेहतर आय अर्जित कर बच्चों को भी बना रहीं शिक्षित
एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक सौरभ शाक्य ने बताया कि टाई बनाने का आर्डर, कपड़ा, रा मेटेरियल आदि दिल्ली सदर बाजार से मिलता है। एक टाई तैयार करने पर लगभग दो से चार रुपये तक मिलते हैं। प्रतिदिन में एक महिला लगभग 400 से 500 टाई बना लेती हैं। इस तरह से वह रोजाना बेहतर आय अर्जित कर लेती हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी बेहतर हो रही है। अब टाई बनाने का कार्य गांगरौल गांव का मुख्य व्यवसाय है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।