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बुलंदशहर मेडिकल कॉलेज में अचानक लिफ्ट बंद होने से डायटीशियन फंसीं, सायरन बजाने पर भी कोई नहीं पहुंचा; हुईं बेहोश

By Jagmohan Sharma Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Wed, 26 Aug 2026 06:28 AM (IST)

Bulandshahr News: बुलंदशहर के कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल की नई बिल्डिंग में एक डायटीशियन 45 मिनट तक लिफ्ट में फंसी रहीं और बेहोश हो गईं।

AI जेनरेटिड फोटो

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HighLights

  1. समय पर नहीं मिली लिफ्ट की इमरजेंसी चाबी

  2. इमरजेंसी काॅल लगने पर दौड़े अधिकारी और गार्ड

जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध अस्पताल की मल्टी स्टोरी बिल्डिंग की सेवाएं सुचारू होने से पहले ही लड़खड़ाने लगी है। नई बिल्डिंग की लिफ्ट खराबी आने के कारण रुक गई और उसमें डायटीशियन फंस गई। उन्होंने सायरन बजाया, लेकिन कोई नहीं पहुंचा। इसके बाद इमरजेंसी नंबर पर काल किया। तब जाकर सुरक्षा गार्ड और कर्मचारी दौड़कर पहुंचे और उनको बाहर निकाला। लगभग 45 मिनट तक डायटीशियन फंसी रही और बेहोश हो गईं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कल्याण सिंह राजकीय मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला अस्पताल की डायटीशियन सोमवार को दोपहर 12 बजे नई बिल्डिंग के चतुर्थ तल पर मेडिसिन वार्ड में भर्ती मरीजों के पास जा रही थी। उन्होंने चतुर्थ तल पर जाने के लिए भूतल से लिफ्ट का सहारा लिया। द्वितीय तल पार करने के बाद लिफ्ट अचानक से रुक गई। डायटीशियन ने कई मिनट तक इंतजार किया। लिफ्ट में अंधेरा छा गया, तो उन्होंने शोर मचाया, लेकिन जवाब में कोई आवाज नहीं आई।

इसके बाद उन्होंने मोबाइल से काॅल करनी चाही तो मोबाइल में सिग्नल गायब हो गए। उन्होंने मोबाइल की टार्च जलाई तो लिफ्ट में सायरन का बटन दिखा। सायरन बजने के बाद भी कोई नहीं पहुंच पाया। इसके बाद इमरजेंसी नंबर को ट्राई किया। काॅल लिफ्ट इंचार्ज नितिन के पास पहुंची। इसके बाद मेडिकल कालेज की इमरजेंसी के बाहर बैठे सुरक्षा गार्ड और स्टाफ दौड़कर पहुंचा।

मेडिकल कालेज के उप प्रधानाचार्य डा. संजय मिश्रा समेत कई चिकित्सक व अधिकारी भी दौड़कर लिफ्ट पर पहुंचे। नई बिल्डिंग में कुल नौ लिफ्ट लगी हैं, जिसमें चार लिफ्ट चालू हैं। कई मिनट तो यह देखने में लग गए कि आखिरकार लिफ्ट कौन सी रूकी है। इसके बाद लिफ्ट की इमरजेंसी चाबी को तलाशा गया। इमरजेंसी चाबी मंगाकर लिफ्ट को खोला गया। इस बीच डायटीशियन एक बार अचेत भी हो गई।

उनको वार्ड में ले जाकर चेकअप कर रिलेक्स किया गया। इमरजेंसी चाबी जल्दी मिल जाती तो लिफ्ट में देर तक ना रहना पड़ता। उप प्रधानाचार्य डा. संजय मिश्रा का कहना है कि सायरन बजते ही सब अलर्ट हो गए थे। इमरजेंसी चाबी तुरंत मंगाकर लिफ्ट को खोला गया। फाल्ट होने के बाद एमसीबी ट्रिप हो गई थी। इसलिए लिफ्ट बंद हो गई थी।

जिला महिला अस्पताल में भी एक लिफ्ट बंद

मेडिकल कालेज से संबद्ध जिला महिला अस्पताल में दो लिफ्ट हैं। इसमें एक लिफ्ट कई साल से खराब है और दूसरी भी आए दिन खराब होती है। कई बार प्रसूता और तीमारदार फंसते रहते हैं।

लिफ्ट की इमरजेंसी सुविधा

लिफ्ट के अंदर आमतौर पर घंटी या फोन के चिह्न वाला एक लाल या विशिष्ट बटन होता है। इस बटन को दबाने से लिफ्ट के अंदर फंसे व्यक्ति का संपर्क सीधे बिल्डिंग की सुरक्षा टीम, कंट्रोल रूम या मेंटेनेंस सर्विस प्रोवाइडर से हो जाता है। कई आधुनिक लिफ्टों में आटो-डायलिस सुविधा होती है जो बटन दबाते ही पूर्वनिर्धारित आपातकालीन नंबर पर काल कनेक्ट कर देती है।