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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 03, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    BJP-RLD Alliance: यूपी में बदलेंगे सियासी समीकरण, भाजपा-रालोद हुए एक; NDA का चुनावी सफर होगा आसान

    Updated: Sun, 03 Mar 2024 07:12 PM (GMT+05:30)

    BJP-RLD Alliance रालोद जिलाध्यक्ष पंकज प्रधान ने पदाधिकारियों के साथ रविवार को भाजपा जिला कार्यालय पहुंच कर लोकसभा प्रत्याशी डा. भोला सिंह को बुके देक ...और पढ़ें

    भाजपा- रालोद गठबंधन से कार्यकर्ताओं में खुशी
    भाजपा- रालोद गठबंधन से कार्यकर्ताओं में खुशी

    HighLights

    1. भाजपा- रालोद गठबंधन से कार्यकर्ताओं में खुशी
    2. लोकसभा चुनाव में एनडीए की राह होगी आसान
    3. रालोद के लिए हमेशा से लकी रहा है भाजपा

    जागरण संवाददाता, बुलंदशहर। BJP-RLD Alliance: लोकसभा चुनाव को लेकर भाजपा और रालोद में समझौता हो गया। भाजपा-रालोद गठबंधन होने पर भाजपा और रालोद कार्यकर्ताओं ने भाजपा एक-दूसरे को मिठाई खिला कर खुशी मनाई। भाजपा जिला अध्यक्ष सांसद डा. भोला सिंह को लाेकसभा प्रत्यशी बनने पर बुके देकर बधाई दी।

    रालोद जिलाध्यक्ष पंकज प्रधान ने पदाधिकारियों के साथ रविवार को भाजपा जिला कार्यालय पहुंच कर लोकसभा प्रत्याशी डा. भोला सिंह को बुके देकर जीत की अग्रिम बधाई दी। पंकज प्रधान ने कहा कि भाजपा और रालोद गठबंधन से एनडीए को मजबूती मिली है। रालोद भाजपा प्रत्याशी डा. भोला सिंह को तीसरी बार भारी बहुमत से जिताने का का काम करेगी।

    भाजपा जिलाध्यक्ष विकास चौहान ने कहा कि रालोद-भाजपा के गठबंधन से विपक्ष की हवा निकल गई है। भाजपा प्रत्याशी डा. भोला सिंह तीसरी बार सांसद बनेंगे। इस दौरान विधायक लक्ष्मीराज सिंह, भवतोष गुर्जर, संतोष वालमीकि, नवीन चौधरी, विकास चौधरी समेत अन्य भाजपा और रालोद कार्यकर्ता मौजूद रहे।

    रालोद के लिए हमेशा से लकी रहा भाजपा

    भाजपा हमेशा रालोद के लिए लकी रही। 2009 में दोनों दलों ने हाथ मिलाया तो रालोद के पांच सांसद जीत गए, जो अब तक का रिकार्ड है, जबकि भाजपा सिर्फ चार सीट जीत सकी। 2014 से दोनों दल पूरी तरह अलग हुए तो रालोद जमीन गंवा बैठा। 2014 संसदीय चुनाव में रालोद एक भी सीट नहीं जीता।

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    2017 विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक विधायक जीता जो बाद में भाजपा में चला गया। 2019 संसदीय चुनाव में रालोद फिर शून्य पर खड़ा रह गया। अब भाजपा तीन राज्यों में जाट वोटों को आसानी से साध पाएगी। वहीं, रालोद राज्यसभा के साथ-साथ लोकसभा और विधान परिषद पहुंचने में भी कामयाब होगा।

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