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मां की सीख से मिली कामयाबी: कृष्णा के हर्बल उत्पादों ने चमकाई ग्रामीण महिलाओं की किस्मत; सोशल मीडिया पर छाया हुनर

By Prashant Gaud Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 27 Aug 2026 02:09 PM (IST)

बुलंदशहर के गांव निवासी कृष्णा कुमारी अपनी मां के नुस्खों से सीखकर हर्बल उत्पाद बनाए। उनके विजय-कृष्णा स्वयं सहायता समूह ...और पढ़ें

गांव भीमपुर में हर्बल तेल, शैंपू आदि उत्पाद तैयार करतीं विजय कृष्णा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। सौ. स्वयं

गांव भीमपुर में हर्बल तेल, शैंपू आदि उत्पाद तैयार करतीं विजय कृष्णा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं। सौ. स्वयं

HighLights

  1. बुलंदशहर में कृष्णा ने ग्रामीण महिलाओं को दिखाई स्वरोजगार की राह।

  2. विजय-कृष्णा स्वयं सहायता समूह के उत्पाद दिल्ली-एनसीआर में हो रहे लोकप्रिय।

प्रशांत गौड़, बुलंदशहर। मां के नुस्खों से सीख लेकर कृष्णा कुमारी ने न केवल हर्बल तेल, शैंपू सहित अन्य हर्बल उत्पाद तैयार किए, बल्कि उनकी विरासत को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण अंचलों की महिलाओं को स्वरोजगार की राह भी दिखाई। विजय-कृष्णा स्वयं सहायता समूह के नाम से इन हर्बल उत्पादों को दिल्ली एवं एनसीआर में पहचान मिल रही हैं। भीमपुर दोराहा, डिबाई-दानपुर क्षेत्र से शुरू हुई यह पहल महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बन रही है।

दानुपर ब्लाक के भीमपुर गांव निवासी कृष्णा ने भी साधारण किसान परिवार में जन्म लिया। परास्नातक तक शिक्षा प्राप्त कर चुकी कृष्णा कुमारी आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही घरेलू नुस्खों से तैयार तेल, शैंपू आदि से मां विजय को बालों को घना एवं मजबूत बनाते हुए देखा है। हालांकि पांच वर्ष पूर्व ह्दयरोग के कारण मां इस दुनिया को छोड़कर चली गई।

उनके जाने के बाद सिर के बाल बेकार होने लगे। यह देख मां के नुस्खे की याद आई और हर्बल उत्पाद तैयार करने का मन बनाया। कुछ मां की सींख काम आई तो कुछ किताबों और यू-ट्यूट इंटरनेट मीडिया आदि से जानकारी जुटाई। हर्बल शैम्पू, हर्बल हेयर आयल और पायरिया नाशक मंजन जैसे उत्पाद तैयार कर इनकी पैकेजिंग का कार्य शुरू किया।

सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर छा रहे हर्बल उत्पाद

मां की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए मां के साथ स्वयं का नाम जोड़कर समूह गठित किया। इन उत्पादों की ब्रांडिंग विजय कृष्ण स्वयं सहायता समूह के नाम से की जा रही है। इससे समूह की महिलाओं को उत्पादन, पैकेजिंग, बिक्री और विपणन जैसे विभिन्न कार्यों में जुड़कर आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है। सोशल मीडिया के वाट्सएप ग्रुप, फेसबुक, इंट्राग्राम आदि प्लेटफाॅर्म पर यह उत्पाद छा रहे हैं और ऑनलाइन इनकी खरीदारी भी बढ़ रही है।

गांव की अर्थव्यवस्था भी होगी मजबूत : कृष्णा

कृष्णा बतातीं हैं कि समूह का उद्देश्य केवल उत्पाद तैयार करना ही नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को हुनर, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ना है। यदि गांव की महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ गांव की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे सकती हैं।

स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि सामूहिक प्रयास से उन्हें अपने हुनर को आगे बढ़ाने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिल रहा है। विजय-कृष्ण स्वयं सहायता समूह की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की एक नई राह खोलने का प्रयास है।

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