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    बुलडोजर तो नहीं आया फिर भी… दुकानदार खुद तोड़ रहे अपनी दुकान, प्रशासन की कार्रवाई से शहर में हड़कंप

    Updated: Sat, 09 May 2026 09:27 PM (IST)

    चंदौली में फोरलेन परियोजना के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत दुकानें तोड़ी जा रही हैं, जिससे शहर में तनाव और वीरानगी छाई है। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, चंदौली। शहर में जहां सुबह से लेकर शाम तक भीड़ ही भीड़ दिखाई देती थी। बाजार गुलजार थे तो सब्जी और मछली मंडी के साथ ही साथ दुकानें सज जाती थीं। इसकी कमाई से जहां परिवार का भरण पोषण होता था तो वहीं सैकड़ों लोगों को रोजगार भी मिलता था।

    पिछले आठ दिनों से यह शहर पूरी तरह वीरान पड़ा है, उजड़ गया है। जीटीआर ब्रिज से नीचे उतरते ही बाजार खंडहर के रूप में दिखाई देने लग रहा है। किसी को रोजगार तो किसी को परिवार का पेट पालने की चिंता सता रही है। शुक्रवार को सपा का पुराना कार्यालय ढहने के बाद तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

    इसको लेकर शनिवार को प्रशासन का बुलडोजर तो नहीं निकला, लेकिन दुकानदार अपने हाथ से ही भवन को तोड़ते रहे। फोरलेन के दोनों ओर मलबा होने के कारण जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

    जीटीआर ब्रिज से लेकर काली माता मंदिर स्टेशन गेट तक चिन्हित 73 दुकानों पर सबकी निगाह है। अतिक्रमण के जद में आने पर चिन्हित सभी दुकान तोड़ दिए जाएंगे।

    दुकानदारों का कहना है कि उन्हें किसी दूसरे स्थान पर दुकान आवंटित किया जाए या फिर पांच से दस फीट छोड़कर तोड़ा जाए। प्रशासन पूरी तरह से अतिक्रमण को खाली कराने की तैयारी में है। सब्जी मंडी से लेकर लाल बहादुर शास्त्री महिला विद्यालय तक अतिक्रमण मुक्त हुए सड़क पर नाली निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

    डीएम से मिले पूर्व सांसद और व्यापारियों का प्रतिनिधि मंडल

    पीडीडीयू नगर के दक्षिणी पटरी पर स्थित दुकानदारों का एक प्रतिनिधि मंडल शनिवार को जिला अधिकारी चंद्र मोहन गर्ग से मुलाकात कर दुकानों को पूरी तरह से तोड़े जाने का मामला उठाया।

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    पूर्व सांसद ने कहा कि व्यापारियों की दुकानें पूरी तरह से तोड़ दिए जाने से उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। उन्होंने अन्य व्यापारियों को मुआवजा देने और विस्थापित हो रहे दुकानदारों को स्थापित करने के लिए कहा।

    जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि इस संबंध में शासन स्तर पर वार्ता की जाएगी। नियमानुसार जो भी होगा उसे कराया जाएगा। हालांकि व्यापारियों की मांग पर कोई बात नहीं बनी।

    विलंबित हो गई परियोजना, प्रशासन सुनने को तैयार नहीं

    परियोजना एक साल विलंबित हो चुकी है। पड़ाव से गोधना मोड़ तक स्वीकृत 328 करोड़ की फोरलेन/सिक्सलेन का निर्माण अब तक पूर्ण हो जाना चाहिए था, लेकिन अतिक्रमण के चलते यह अधर में रहा। दोनों ओर सड़क का निर्माण कराया जा चुका है लेकिन महज एक किमी में न तो विद्युत पोल शिफ्ट हो सके और न ही नाली का निर्माण कराया जा सका है।

    विलंब होने के कारण अब प्रशासन कुछ भी सुनने को तैयार नहीं है। हर हाल में 31 मई तक परियोजना को पूर्ण करना है। हालांकि इसके निर्माण से शहर के लोगों के लिए जहां आवागमन सुगम हो जाएगा तो वहीं बाहर से आने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी।