चंदौली में सीएम की उपस्थिति में सीजेआइ ने प्रदेश के छह न्यायालय परिसरों का किया शिलान्यास
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंदौली समेत उत्तर प्रदेश के छह जिलों में 1500 करोड़ रुपये की लागत से बनने ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत ने शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में छह जनपदों में एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास किया।
HighLights
सीजेआई सूर्यकांत और सीएम योगी ने किया शिलान्यास।
छह जिलों में 1500 करोड़ के न्यायालय परिसर बनेंगे।
चंदौली परिसर पर 236 करोड़ रुपये होंगे खर्च।
जागरण संवाददाता, चंदौली। सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) सूर्यकांत शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में चंदौली समेत प्रदेश के छह जनपद शामली, औरैया, महोबा, अमेठी व हाथरस में निर्माणाधीन 1500 करोड़ की लागत से एकीकृत न्यायालय परिसर का शिलान्यास किया। इसके साथ ही सीजेआइ ने वकीलों को संबोधित भी किया।
उनके साथ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली के अलावा सुप्रीम कोर्ट के पांच व हाई कोर्ट के 18 अन्य न्यायाधीश भी शामिल हुए। चंदौली में 236 करोड़ रुपये की लागत से न्यायालय परिसर, न्यायिक अधिकारियों के आवास के अलावा वकीलों के चैंबर का निर्माण कराया जा रहा है।
न्याय की पहुंच को सशक्त करेंगे इंटीग्रेटेड ज्यूडिशियल कोर्ट कांप्लेक्स : प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि एकीकृत न्यायालय परिसर आम लोगों के लिए न्याय को आसान, सुलभ और प्रभावी बनाएंगे। उन्होंने इसे न्याय की पहुंच को सशक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया। सीजेआइ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ चंदौली सहित उत्तर प्रदेश के छह जिलों शामली, औरैया, महोबा, अमेठी और हाथरस में लगभग 1500 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित एकीकृत न्यायालय परिसरों का वर्चुअल शिलान्यास करने के बाद संबोधित कर रहे थे।
सीजेआइ ने कहा कि यह न्यायालय परिसर आने वाले लगभग 50 वर्षों तक जिलों की न्यायिक आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम होंगे। इनका मुख्य उद्देश्य आम नागरिक को बिना कठिनाई के न्याय उपलब्ध कराना है। यही 'एक्सेस टू जस्टिस' की भावना का वास्तविक स्वरूप है।
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उन्होंने कहा कि चंदौली अब तक बाबा कीनाराम के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए जानी जाती रही है, लेकिन अब यहां न्याय के मंदिरों की स्थापना से एक नया अध्याय जुड़ रहा है। आधुनिक सुविधाओं से युक्त यह परिसर वकीलों और न्यायिक अधिकारियों की आवश्यकताओं के साथ-साथ आम लोगों की सुविधा को केंद्र में रखकर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह परिसर निष्पक्ष, स्वतंत्र और सशक्त न्याय का संदेश पूरे देश में देंगे।
सीजेआइ ने प्रदेश सरकार और इलाहाबाद हाई कोर्ट की सराहना करते हुए कहा कि संविधान का उद्देश्य है कि जिला स्तर पर मजबूत न्यायिक ढांचा हो, ताकि नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए दूर न जाना पड़े। मुख्यमंत्री द्वारा उत्तर प्रदेश में 10 एकीकृत न्यायालय परिसरों के निर्माण की घोषणा की गई है, जिनमें से छह पर काम शुरू हो चुका है। इनके पूरा होने पर उत्तर प्रदेश देश के लिए एक आदर्श माडल बनेगा।
चंदौली में 236 करोड़ रुपये की लागत से न्यायालय भवन, न्यायिक अधिकारियों के आवास और अधिवक्ताओं के चैंबर बनाए जाएंगे। सीजेआइ ने अन्य राज्यों से भी इस माडल को अपनाने की अपील की। साथ ही सुझाव दिया कि हर जिला न्यायालय परिसर में महिला अधिवक्ताओं के लिए अलग बार रूम, स्वास्थ्य केंद्र और योग केंद्र की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि न्यायालय परिसर अधिक मानवीय और सुविधाजनक बन सकें। कार्यक्रम में इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली सहित सुप्रीम कोर्ट के पांच और हाई कोर्ट के 18 अन्य न्यायाधीश उपस्थित रहे।
छह जिलों को मिला आधुनिक न्यायिक संबल, बदलेगा न्याय व्यवस्था का स्वरूप : मुख्यमंत्री
प्रदेश के छह जिलों में एकीकृत न्यायालय परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में न्यायिक ढांचे को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार और उच्च न्यायालय के परस्पर सहयोग से उन जिलों में आधुनिक जिला न्यायालय परिसरों का निर्माण किया जा रहा है, जहां अब तक समुचित न्यायिक अवसंरचना उपलब्ध नहीं थी।
पहले चरण में चंदौली, महोबा, अमेठी, शामली, हाथरस और औरैया को शामिल किया गया है। इन सभी जिलों में भूमि चयन, भवन डिजाइन की स्वीकृति और आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। शीघ्र ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रस्तावित एकीकृत न्यायालय परिसर में एक ही छत के नीचे न्यायालय भवन, अधिवक्ताओं के लिए आधुनिक चैंबर, न्यायिक अधिकारियों के आवास, पर्याप्त पार्किंग, कैंटीन, स्कूल तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे न केवल न्यायिक कार्यों में सुगमता आएगी, बल्कि अधिवक्ताओं और वादकारियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि अब अधिवक्ताओं को जर्जर और अव्यवस्थित चैंबरों में कार्य नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें आधुनिक बहुमंजिला भवनों में बेहतर और सुरक्षित कार्य वातावरण उपलब्ध होगा।
इन एकीकृत न्यायालय परिसरों का निर्माण विश्वविख्यात संस्था एलएंडटी के माध्यम से कराया जाएगा, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल मजबूत इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन की है। न्यायिक ढांचे को सशक्त बनाना सुशासन की मूल आवश्यकता है और सरकार इस दिशा में हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ये छह जिले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुने गए हैं।
आने वाले समय में वाराणसी सहित प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तर्ज पर एकीकृत न्यायालय परिसरों का निर्माण कराया जाएगा। उन्होंने बार एसोसिएशन, न्यायिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगी। समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्ति एवं सभी उपस्थित न्यायाधीशों का स्वागत-अभिनंदन किया और एकीकृत न्यायालय परिसर के शिलान्यास अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।