Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    चंदौली में जल प्रपातों के विकास पर चार करोड़ खर्च, फिर भी पर्यटकों को नहीं मिल रही सुविधा

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 03:59 PM (IST)

    चंदौली के राजदरी-देवदरी जलप्रपात पर चार करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पर्यटकों की संख्या घट रही है। नववर्ष पर भी बाहरी पर्यटक नहीं आए। ईको टूरिज्म क ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    HighLights

    1. ₹4 करोड़ खर्च के बावजूद राजदरी-देवदरी पर पर्यटक घटे।

    2. विकसित सुविधाएं वन निगम के कब्जे में, पर्यटकों को नहीं मिल रहीं।

    3. वन विभाग सुविधाओं को वापस लेने के लिए प्रयासरत है।

    जागरण संवाददाता, चंदौली। प्राकृतिक सौंदर्य से ओतप्रोत पूर्वांचल का स्वर्ग कहे जाने वाले राजदरी- देवदरी जलप्रपात से पर्यटकों की संख्या लगातार कम होता जा रहा है।

    नववर्ष पर भी स्थानीय के अलावा बाहरी पर्यटक नहीं आए। चार करोड़ रुपये खर्च हाेने के बाद भी पर्यटकों को सुविधा नहीं मिल पा रही है। हकीकत यह है कि एयर कंडीशन डायमीट्रिक कमरा, आडिटोरियम, नेचर सेंटर, रिसोर्ट सेंटर आदि वन निगम का कब्जा है।

    राजदरी जलप्रपात को ईको टूरिज्म के तहत वर्ष 2021 में चार करोड़ खर्च कर विकसित किया गया। गाइड्स, आपरेटर्स तथा टूरिज्म को प्रशिक्षण दिया गया। सारनाथ से चंद्रप्रभा वन्य जीव विहार तक ड्राई रन आयोजित किए गए। काशी वन्यजीव प्रभाग के सहयोग से पर्यटन विशेषज्ञों को लगाया गया।

    विदेशी पर्यटकों को राजदरी देवदरी जलप्रपात के बाबत आवश्यक जानकारी देने के लिए गाइड किए जाने की तैयारी हुई। विदेशी पर्यटकों को यहां पहुंचने को कौन कहे स्थानीय पर्यटक भी यहां पहुंचने से कतरा रहे हैं। जलप्रपात पर पर्यटकों को दी जाने वाली सुविधाएं व आवश्यक जानकारी नहीं मिल पा रही है।

    पर्यटकों के इन सुविधाओं का किया गया कायाकल्प

    चार करोड़ की लागत से राजदरी जलप्रपात पर एयर कंडीशन तीन डारमेट्री कमरा, आडिटोरियम, स्वागत कक्ष, बाथरूम, साइकिल ट्रैक, नेचर ट्रेल, काटेज हाउस का कायाकल्प किया गया।

    इसके अलावा वन विश्राम गृह, सीढ़ियों, समरहट व कैंटिन की मरम्मत सहित मुख्य गेट से जलप्रपात तक जाने वाले मार्ग का उच्चीकरण का कार्य किया हुआ।

    राजदरी जलप्रपात स्थित आडिटोरियम, काटेज हाल, इंटरप्रटेशन, नेचर सेंटर आदि को निजी व्यक्ति को ठेके पर देकर संचालित किए जाने के प्रयास किया जा रहा है। चंद्रप्रभा वन्य जीव प्रभाग का हवाला देते हुए वन विभाग ने वन निगम को हस्तांतरित हुई सुविधा वापस किए जाने संबंधित पत्र शासन व उच्चाधिकारियों को लिखा गया है।
    बी शिवशंकर,प्रभागीय वनाधिकारी, काशी वन्य जीव प्रभाग-रामनगर

    खबरें और भी