हम लोग चेन्नई से आया इंगे... सीतापुर में ही फंस गया इल्ले, चित्रकूट में बाढ़ के कारण फंसा श्रद्धालुओं का जत्था
चेन्नई से आए 20 श्रद्धालुओं का एक जत्था चित्रकूट में बाढ़ के कारण चार दिनों से फंसा हुआ है, जिससे ...और पढ़ें

रामायण मेला परिसर में खाना खातीं मेदनीपुर निवासी ज्योत्सना दास। जागरण
सुधीर अग्रवाल, चित्रकूट। ‘हमलोग चेन्नई से आया इंगे... बीस आदमी का ग्रुप है। इधर चित्रकूट में फुल बाढ़ आ गया, चार दिन से सीतापुर में ही फंस गया इल्ले।’ तमिल लहजे में निकले ये शब्द चित्रकूट घूमने आए चेन्नई के श्रद्धालुओं की बेबसी बयां कर रहे थे।
मंदाकिनी की बाढ़ ने उनकी चार दिन की तीर्थयात्रा को जैसे रोक दिया है। वाहन उनके पास है, लेकिन रास्ते बंद हैं। मंदिर सामने हैं, मगर वहां पहुंचने का रास्ता नहीं।
चेन्नई के कांचीपुरम और महाबलीपुरम से आए आर कार्तिक, एस लक्ष्मी, एस अरुण और जे प्रिया समेत 20 श्रद्धालु मिनी बस से तपोभूमि पहुंचे हैं। रामायण मेला परिसर में ठहरे इन श्रद्धालुओं ने बताया कि बाढ़ के कारण चार दिन से रुके हैं। अनुसुइया आश्रम जाने के लिए निकले तो रास्ता बंद मिला।
हनुमान धारा जाने की कोशिश की तो वहां भी पुल बहा बताया गया। रामघाट पर स्नान की इच्छा थी, वह भी पूरी नहीं हो सकी। बोले, थोड़ा-थोड़ा मंदिर दर्शन हो गया, लेकिन खाने-पीने में बोत असुविधा हो रहा है। बंगाल के मेदिनीपुर से आए 60 श्रद्धालुओं की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।
विश्वजीत, रामादत्ता, बेबू मंडल, सुबोध और ज्योत्सना दास ने बताया कि तुलसी मंदिर राजापुर और वाल्मीकि आश्रम जाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते बंद मिलने पर वापस लौटना पड़ा। सती अनुसुइया और स्फटिक शिला के दर्शन भी नहीं कर सके।
तीन दिन से सीतापुर के रामायण मेला परिसर में ही ठहरे हैं। श्रद्धालुओं ने कहा कि बाढ़ का नजारा बेहद डरावना था। अच्छा हुआ कि वे पानी के बीच नहीं फंसे, वरना बड़ी मुसीबत हो सकती थी। अब उनकी कोशिश किसी तरह रास्ते खुलने पर चित्रकूट से निकले।
तीर्थयात्रा की उमंग लेकर आए इन श्रद्धालुओं के लिए फिलहाल चित्रकूट की यादों में मंदिरों के दर्शन से ज्यादा चार दिन की बाढ़, बंद रास्ते और इंतजार दर्ज हो गया है।
