चित्रकूट में राम मंदिर दान चोरी मामले में संपत राय पर लगे आरोपों पर संतों ने जताई नाराजगी, बोले- बिना जांच दोषी ठहराना गलत
चित्रकूट के संत समाज ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर लगे आरोपों पर नाराजगी जताई है। संतों ने आरोपों की निष्पक्ष जांच की मा ...और पढ़ें

चित्रकूट में दिगंबर अखाड़ा के केशवगढ़ में बैठक करते संत महांत। आयोजक
HighLights
संत समाज ने चंपत राय पर लगे आरोपों का किया विरोध।
निष्पक्ष जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय करने की मांग।
राम मंदिर आंदोलन में चंपत राय की भूमिका को सराहा।
जागरण संवाददाता, चित्रकूट। अयोध्या में राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर कथित चढ़ावा गड़बड़ी के आरोपों को लेकर तपोभूमि का संत समाज खुलकर उनके समर्थन में आ गया है। संतों ने आरोपों पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना जांच पूरी हुए किसी को दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन साजिश के तहत किसी की प्रतिष्ठा धूमिल करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जा सकता।
महांत दिव्यजीवन दास के नेतृत्व में केशवगढ़ में आयोजित बैठक में संतों ने कहा कि चंपत राय ने राम मंदिर आंदोलन से लेकर अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे व्यक्ति पर बिना ठोस साक्ष्यों के आरोप लगाकर जनभावनाओं को प्रभावित करने का प्रयास उचित नहीं है।
संतों का कहना था कि सत्य सामने आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना समाज और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए उचित नहीं होगा। महांत दिव्यजीवन दास ने कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए धन और आभूषणों से जुड़ा मामला अत्यंत संवेदनशील है। यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कठोर दंड मिलना चाहिए।
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वहीं, यदि आरोप निराधार हैं तो झूठे आरोप लगाने वालों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। बैठक में तपोभूमि के महांत रामजन्मदास, राममनोहर दास, आदित्यनारायण दास, रामनरेश दास, कामतादास सहित तीन दर्जन से अधिक संत उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं है और पूरे प्रकरण का सत्य तथ्यों के आधार पर सामने आना चाहिए।