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    Chitrakoot में व्यापारी पुत्र का अपहरण कर निर्मम हत्या: किशोर का शव शौचालय के हौद में दफनाया, मुठभेड़ में एक बदमाश ढेर

    Updated: Fri, 23 Jan 2026 07:33 PM (IST)

    Chitrakoot Trader Son Kidnapping and Murder Case: चित्रकूट के बरगढ़ में एक व्यापारी के 13 वर्षीय बेटे आयुष का अपहरण कर हत्या कर दी गई। अपहरणकर्ताओं ने ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. व्यापारी के 13 वर्षीय बेटे आयुष की हत्या

    2. शव शौचालय के पानी के हौद में दफनाया मिला

    3. पुलिस मुठभेड़ में एक आरोपी कल्लू ढेर

    जागरण संवाददाता, चित्रकूट। Chitrakoot Trader Son Kidnapping and Murder Case: थाना बरगढ़ कस्बे में गुरुवार रात हुए जघन्य हत्याकांड से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। कस्बे के कपड़ा व्यापारी अशोक कुमार केसरवानी के 13 वर्षीय पुत्र आयुष का अपहरण कर फिरौती न मिलने पर बेरहमी से गला घोंटकर हत्या कर दी गई। आरोपियों ने किशोर के शव को शौचालय में पानी के लिए बने हौज में गड्ढा खोदकर दफना दिया। शुक्रवार सुबह शव बरामद होने के बाद आक्रोशित व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने झांसी-मीरजापुर हाईवे पर करीब पांत घंटे तक जाम लगाकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।


    इससे पहले पुलिस मुठभेड़ में एक हत्यारोपित की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि दूसरा आरोपी पैर में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे प्रयागराज रेफर किया गया है। वहीं, तीसरे आरोपी नौशाद के प्रयागराज में पकड़े जाने की चर्चा है, हालांकि स्थानीय पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

    आयुष गुरुवार शाम करीब चार बजे कोचिंग पढ़ने गया था। शाम करीब पांच बजे वह घर लौटा, लेकिन घर के बाहर से शाम को वह लापता हो गया। इसी दौरान शाम 8:29 बजे अपहरणकर्ताओं ने फोन किया, लेकिन काल कट गई। इसके बाद 8:27 मिनट पर दोबारा काल आई, जिसमें 40 लाख रुपये की फिरौती की मांग की गई और रकम पहुंचाने के लिए एक घंटे का समय दिया गया। घबराए स्वजन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

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    मुठभेड़ के बाद घायल इरफान के लेकर जाती पुलिस। पुलिस 


    पुलिस ने रातभर तलाश की और सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाले। जांच में सामने आया कि प्रयागराज जनपद के थाना घूरपुर क्षेत्र के कटरा उभारा निवासी इरफान अंसारी के मिस्त्री कल्लू उर्फ साहबे इमान आयुष को बाइक पर बैठाकर ले गया था। इसके बाद पुलिस ने रात में ही बरगढ़ कस्बे में स्थित इरफान व कल्लू के किराए के मकान पर छापा मारा, जहां उसका दुकान मालिक इरफान अंसारी मिला। उसकी निशानदेही पर शुक्रवार सुबह करीब छह बजे शौचालय में बने पानी के हौज को खोदकर आयुष का शव बरामद किया गया। आयुष की गले में रस्सी बंधी थी, साफ था कि गला घोंटकर हत्या की गई थी।

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    असलहा छीन भाग रहे थे आरोपित

    इसके बाद पुलिस इरफान को साथ लेकर कल्लू की तलाश में परानू बाबा क्षेत्र पहुंची, जहां उसकी लोकेशन मिली थी। पुलिस जब मोबाइल फोन बरामद करने की कोशिश कर रही थी, तभी दोनों आरोपियों ने पुलिस का असलहा छीनकर भागने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली से कल्लू और इरफान घायल हो गए। दोनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मऊ लाया गया, जहां सीने और पेट में गोली लगने से कल्लू की मौत हो गई। इरफान की हालत गंभीर होने पर उसे प्रयागराज रेफर कर दिया गया। उधर, किशोर का शव मिलने की खबर से व्यापारियों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।

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    झांसी-मीरजापुर  हाईवे  पर  जाम  के  दौरान  आयुष  के  पिता  अशोक  केसरवानी  को  समझाते  डीएम  पुलकित  गर्ग।  जागरण   

    आक्रोशित लोगों ने जाम लगाया

    गुस्साई भीड़ ने शव को रखकर झांसी-मीरजापुर हाईवे जाम कर दिया। डीआईजी बांदा राजेश एस, डीएम पुलकित गर्ग और एसपी अरुण कुमार सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर स्थिति नियंत्रित करने का प्रयास किया। हालात को संभालने के लिए बांदा, हमीरपुर और महोबा जनपदों से पीएसी भी बुलाई गई और पूरे कस्बे को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।

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    घर के बाहर गुमशुम बैठी आयुष की मां आरती (बीच में)।  जागरण 

    बाइक चलाने का था शौक

    एसपी अरुण कुमार सिंह ने बताया कि आयुष को बाइक चलाना सीखने का शौक था, जिसका फायदा उठाकर कल्लू उसे बहाने से ले गया। यह बात सीसीटीवी फुटेज में भी सामने आई है। इरफान बरगढ़ कस्बे में बक्शा बेचने की दुकान चलाता था और कल्लू उसी के यहां काम करता था। अशोक केसरवानी और इरफान के बीच किराए और उधारी को लेकर पुराना विवाद था।

    ये था विवाद

    करीब आठ माह का किराया बकाया था और 25 हजार रुपये उधार भी नहीं लौटाए गए थे। इसी विवाद के चलते 10 दिसंबर 2025 को अशोक ने इरफान का सामान दुकान से बाहर फेंक दिया था। इसके बाद इरफान ने अशोक के घर के ठीक बगल में केदार केसरवानी की दुकान ले ली थी। पुलिस का मानना है कि इसी रंजिश के चलते सुनियोजित तरीके से इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया गया।

    दो भाई में छोटा था

    आयुष न्यू सेंट्रल एकेडमी पब्लिक स्कूल, शंकरगढ़ (प्रयागराज) में कक्षा सात का छात्र था और दो भाइयों में सबसे छोटा था। उल्लेखनीय है कि जिले में इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। वर्ष 2019 में तेल व्यापारी ब्रजेश रावत के जुड़वा बेटे प्रियांश और श्रयांश की हत्या उनकी ट्यूशन टीचर ने दोस्तों के साथ मिलकर फिरौती के लिए की थी। वहीं वर्ष 2024 में रैपुरा क्षेत्र में गुटखा व्यापारी राजधर के बेटे सुधांशु की भी 50 लाख रुपये की फिरौती के लिए दोस्तों ने हत्या कर दी थी।

    आयुष हत्याकांड के ताजा किए हुए जख्म, उभरी भयावह यादें

    बरगढ़ में व्यापारी के 13 वर्षीय पुत्र आयुष केसरवानी की अपहरण के बाद हत्या की घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। यह पहला मौका नहीं है जब किसी व्यापारी परिवार पर ऐसा दुख टूटा हो। इस वारदात ने तपोभूमि में उन पुराने घावों को फिर से हरा कर दिया है, जिनकी टीस आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।

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    चित्रकूट में तेल व्यापारी के घर सांत्वना देने जाते एमपी के तत्कालीन  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। जागरण अर्काइव

    2019 और 2024 की घटनाओं की तरह व्यापारी पुत्र की हत्या से फिर सुलगा आक्रोश

    24 फरवरी 2019 चित्रकूट के इतिहास में काले दिन के रूप में दर्ज है। तेल व्यापारी ब्रजेश रावत के जुड़वा बेटे प्रियांश और श्रेयांश के शव 12 दिन बाद बांदा जनपद के मर्का में यमुना नदी से बरामद हुए थे। बच्चों का अपहरण जानकीकुंड स्कूल परिसर से हुआ था और सीसीटीवी फुटेज में नकाबपोश बदमाश उन्हें बाइक से ले जाते दिखे थे। जांच में सामने आया कि ट्यूशन टीचर ने अपने साथियों के साथ मिलकर फिरौती के लिए इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। हत्यारों की क्रूरता इतनी थी कि मासूम बच्चों के हाथ-पैर बांधकर उन्हें जिंदा यमुना में फेंक दिया था। इस घटना के बाद चित्रकूट में जबरदस्त आक्रोश फूटा था। बाजार बंद हो गए थे, जानकीकुंड परिसर में पथराव और आगजनी हुई थी। यूपी और एमपी की पुलिस आमने-सामने आ गई थी और पूरी धर्मनगरी छावनी में तब्दील हो गई थी। उस दिन घरों में चूल्हे नहीं जले थे और मातम पसरा था।

    मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पीड़ित परिवार को सांत्वना देने आए थे। इसके बाद वर्ष 2024 में रैपुरा क्षेत्र में गुटखा व्यापारी राजधर के नाबालिग पुत्र सुधांशु का अपहरण कर 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई। रुपये न मिलने पर उसकी हत्या कर शव देवांगना घाटी में फेंक दिया गया। इस मामले का राजफाश हुआ कि स्कूल में पढ़ने वाले दोस्तों ने महंगे शौक पूरे करने के लिए इस वारदात को अंजाम दिया था। अब बरगढ़ में आयुष की हत्या ने एक बार फिर जिले को उसी डर, गुस्से और पीड़ा के दौर में लाकर खड़ा किया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक मासूम और व्यापारी परिवार ऐसे अपराधों का शिकार होते रहेंगे।

    आयुष हत्याकांड से जिले में तनाव, पांच जनपदों की तैनात रहा फोर्स

    बरगढ़ में अशोक केसरवानी के पुत्र 13 वर्षीय आयुष केसरवानी के अपहरण के बाद निर्मम हत्या की घटना से पूरे जनपद में आक्रोश और तनाव का माहौल है। बरगढ़ बाजार पूरी तरह बंद रहा। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आई। शुक्रवार सुबह जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और पांच जनपदों की फोर्स के साथ पीएसी तैनाती की गई।

    बाजार बंद, जुलूस व शोक सभाओं के बीच प्रशासन सतर्क

    बांदा, हमीरपुर, महोबा, प्रयागराज और चित्रकूट जनपद की फोर्स को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया। बरगढ़, पीड़ित परिवार का आवास, पोस्टमार्टम हाउस, जिला अस्पताल, बाजार क्षेत्र और प्रमुख चौराहों पर भारी संख्या में फोर्स मौजूद रहा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए एक कंपनी व एक प्लाटून पीएसी की टुकड़ी लगातार गश्त करती रही। बरगढ़ बाजार सारा दिन बंद रही। सुबह आक्रोशित व्यापारियों ने बाजार से हाईवे तक करीब तीन किलोमीटर जुलूस निकाल कर प्रदर्शन किया और हाईवे को पांच घंटे जाम रखा। डीएम के समझाने पर लोग माने। वहीं, मऊ में व्यापारियों ने नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला।

    इन्होंने भी जताया शोक

    अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अशोक कुमार त्रिपाठी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे समाज को झकझोर देने वाला अपराध बताया। अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से बिरत रहकर शोकसभा आयोजित की और दिवंगत बालक की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। मानिकपुर व्यापार मंडल ने शोकसभा आयोजित कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा देने की मांग की। शोकसभा में घनश्याम दास अग्रहरि, राजकिशोर गुप्ता, पुरुषोत्तम दास अग्रहरि, कैलाश अग्रहरि, रामबाबू साहू, घनश्याम दास केसरवानी सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।

    व्यापारियों की ये रही मांगें

    • दोनों हत्यारोपियों और सहयोगियों के घरों में बुलडोजर की कार्रवाई की जाए।
    • पीड़ित परिवार को एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
    • इच्छुक व्यापारियों को शस्त्र लाइसेंस दिया जाए।
    • अपनी मांग को लेकर धरने पर बैठे किसी भी व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई न की जाए।
    • पीड़ित परिवार से किसी एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए।
    • अपहरण करके हत्या करने में जो अपराधी शामिल हैं सभी का एनकाउंटर किया जाए।

    ..छह साल पहले भी हत्या के मामले में जेल गया था कल्लू

    चित्रकूट में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारा गया कल्लू उर्फ बेटू उर्फ साहिबे इमान छह साल पहले हत्या के मामले में जेल गया था। उसने अपने ही गांव कटरा उभारी में रहने वाले रज्जाक को परिवार वालों संग लाठी-डंडे से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था। मृतक रज्जाक के बेटे अरबाज ने कल्लू समेत सात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। तब घूरपुर थाने की पुलिस ने कल्लू सहित कई अन्य को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जमानत मिलने के बाद सभी अभियुक्त सलाखों से बाहर आ गए।

    गांव में रज्जाक की पीट-पीटकर की थी हत्या

    शुक्रवार सुबह घरवालों को कल्लू के मारे जाने और उसके साथी इरफान अंसारी के घायल होने का पता चला तो वह हक्का-बक्का रह गए। थोड़ी देर बाद उसके घर पर लोगों की भीड़ जुट जुट गई। कल्लू का अब्बा मकसूद अब्बासी घर के बाहर निकला फिर कई घंटे तक वापस नहीं आया। मकान में छोटी बेटी के अलावा गांव की अन्य महिलाएं थीं, जो आपस में बातचीत करती रहीं, लेकिन किसी को कुछ बताने से परहेज कर रही थीं। घूरपुर थानाध्यक्ष दिनेश कुमार ने बताया कि सिकंदरा बहरिया निवासी रज्जाक अपने परिवार के साथ कटरा उभारी गांव में रहता था। जुलाई 2020 में किसी बात को लेकर उसका कल्लू के परिवार वालों से झगड़ा हुआ था। तब रज्जाक पर लाठी-डंडे से पीटा गया था, जिसकी मौत हो गई थी। उस हत्याकांड में कल्लू, उसके अब्बा मकसूद सहित परिवार के कई अन्य सदस्य जेल गए थे। कुछ साल बाद सभी जमानत पर से बाहर आए। उधर, पुलिस मुठभेड़ में गोली से जख्मी इरफान अंसारी के खिलाफ घूरपुर थाने में कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं मिला है।

    कई साल पहले कल्लू गया था चित्रकूट

    ग्रामीणों का कहना है कि मकसूद के पांच बेटों में कल्लू तीसरे नंबर का था। वह कई साल पहले चित्रकूट गया था। इसके बाद इरफान अंसारी के साथ बक्शा, आलमारी बनाने का काम करने लगा था। कभी-कभार ही घर आया करता था। उसका निकाह नहीं हुआ था। कल्लू की मौत के बाद परिवार वालों ने ग्रामीणों से दूरी भी बना ली। कहा जा रहा है कि घरवाले कल्लू का शव लेने के लिए शुक्रवार को चित्रकूट नहीं पहुंचे।

    एसआरएन अस्पताल में चल रहा इरफान का इलाज

    पुलिस मुठभेड़ में गोली से घायल इरफान अंसारी का स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में इलाज चल रहा है। उसकी सुरक्षा में इंस्पेक्टर निशिकांत राय सहित कई पुलिसकर्मियों को लगाया गया है। ग्रामीणों ने बताया घूरपुर थाना क्षेत्र के कटरा उभारी गांव निवासी आफताब अंसारी का बेटा इरफान करीब 15 साल पहले बरगढ़ चित्रकूट गया। इसके बाद अशोक केसरवानी के मकान में किराए पर कमरा लेकर आलमारी बक्शा बनाने का काम करने लगा। इमरान के साथ उसका भाई नौशाद भी रहता है। शुक्रवार को पुलिस एनकाउंटर में उसके घायल होने का पता चला तो परिवार से लेकर मुहल्ले वालों में खलबली मच गई। कुछ गांव वालों का कहना था कि इरफान ने बरगढ़ में खुद का भी पक्का मकान बनवा लिया है। इरफान के भी पांच भाई हैं, जिसमें तीन गांव में रहते हैं। दो छोटे हैं, जो पढ़ाई करते हैं।


    चित्रकूट पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया कल्लू मूलरूप से घूरपुर थाना क्षेत्र के कटरा उभारी का निवासी था। इसी गांव का दूसरा आरोपित इमरान भी है, जो कई साल से चित्रकूट में रह रहा है।
    -विवेक चंद्र यादव, डीसीपी यमुनानगर