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मंदाकिनी की बाढ़ में तैर गया बेटा… बचाई मां-बहन की जान, बेटे की बहादुरी बताते-बताते फफक पड़ी पार्वती

Published: Sat, 05 Sep 2026 10:15 AM (IST)

चित्रकूट में मंदाकिनी की भीषण बाढ़ के दौरान किशन मोदनवाल ने अपनी जान जोखिम में डालकर मां और बहन को बचाया।

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HighLights

  1. किशन ने मंदाकिनी की बाढ़ में मां-बहन को बचाया।

  2. दूसरी मंजिल तक पानी पहुंचने पर तैरकर सीढ़ी लाए।

  3. चित्रकूट में मंदाकिनी ने सदी की सबसे बड़ी बाढ़ दी।

जागरण संवाददाता, चित्रकूट। मां की जिंदगी पर संकट आया तो बेटे ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उफनती मंदाकिनी का तेज बहाव सामने था, लेकिन मां को बचाने की चिंता ने किशन मोदनवाल के कदम नहीं रोके।

घर की दूसरी मंजिल में तीन से चार फीट पानी भर चुका था और छत पर जाने के लिए सीढ़ी तक नहीं थी। बाहर बाढ़ का पानी मौत बनकर बह रहा था। ऐसे में किशन पानी में कूद गया और दूसरे घर से सीढ़ी लेने के लिए तैरता हुआ निकल पड़ा।

रामघाट में शनिवार को बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा। किशन की मां पार्वती मोदनवाल ने बताया कि उस समय बेटा दुकान का सामान सुरक्षित रखने गया था। इसी बीच घर में पानी भरने लगा। उन्होंने मोबाइल फोन से बेटे को इसकी जानकारी दी।

दूसरी मंजिल पर फंसी मां और बेटी के पास बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन तेज बहाव के कारण तत्काल मदद पहुंचना मुश्किल था। मां को बचाने के लिए किशन आटो स्टैंड की ओर से बाढ़ के पानी में उतर गया।

तेज बहाव के बीच तैरते हुए वह दूसरे घर तक पहुंचा और वहां से सीढ़ी लेकर वापस चल पड़ा। रास्ते में सीढ़ी बिजली के पोल में फंस गई। किशन ने हिम्मत नहीं छोड़ी। तेज धार के बीच सीढ़ी को पोल से निकाला और किसी तरह घर तक पहुंचा। बेटे की बहादुरी बताते-बताते पार्वती की आंखों से आंसू छलक आए। उन्होंने कहा कि उस समय लग रहा था कि शायद जिंदगी नहीं बचेगी।

सदी की सबसे बड़ी बाढ़ का रिकॉर्ड

गौरतलब है कि चित्रकूट में मंदाकिनी ने इस बार तपोभूमि को ऐसी बाढ़ दी, जिसके जख्म लंबे समय तक नहीं भरेंगे। 14 अगस्त से दो सितंबर तक महज 19 दिनों में नदी नौ बार खतरे के निशान 126.500 मीटर के पार पहुंची। कभी कुछ घंटों के लिए पानी उतरा तो फिर नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया।

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29 अगस्त को जलस्तर 135.200 मीटर पहुंचा तो सदी की सबसे बड़ी बाढ़ का रिकॉर्ड बना। रामघाट से लेकर सती अनुसुइया, स्फटिक शिला और जानकीकुंड जैसे पौराणिक स्थल सहित पुरानी लंका, कामदगिरि मार्ग, आरोग्यधाम, तरौंहा और नदी किनारे की बस्तियों जलमग्न हो गई। 10 हजार से अधिक परिवारों की गृहस्थी उजड़ गई और पांच हजार से अधिक लोग बाढ़ में फंस गए, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए वायुसेना और एनडीआरएफ को बड़े स्तर पर रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा।

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