विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चित्रकूट में मंदाकिनी का कहर: बाढ़ में बहा रामघाट का सौंदर्य, मठ-मंदिरों में सालों तक रहेंगे निशान

Published: Sat, 05 Sep 2026 05:42 PM (IST)

मंदाकिनी नदी में आई रिकॉर्ड तोड़ बाढ़ ने चित्रकूट के रामघाट को तबाह कर दिया है, जिससे तुलसी मंदिर सहित कई धार्मिक स्थल और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

HighLights

  1. रामघाट पर कीचड़, मलबा, तबाही के निशान।

  2. तुलसी मंदिर क्षतिग्रस्त, गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा खंडित।

  3. धार्मिक स्थलों और दुकानों को 80 करोड़ का नुकसान।

जागरण संवाददाता, चित्रकूट। मंदाकिनी की रिकार्ड बाढ़ ने तपोभूमि के हृदयस्थल रामघाट का चेहरा ही बदल दिया है। जिस घाट पर सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़, आरती की रोशनी और मंदिरों की घंटियां गूंजती थीं, वहां अब कीचड़, मलबा और तबाही के निशान हैं।

सात दिन तक खतरे के निशान से ऊपर बहने के बाद शनिवार को मंदाकिनी का जलस्तर 124.300 मीटर पर पहुंचा तो पानी के साथ बाढ़ की भयावह तस्वीर भी सामने आने लगी। तुलसी मंदिर बाढ़ के तेज बहाव में उलट गया और गोस्वामी तुलसीदास की प्रतिमा क्षतिग्रस्त हो गई। आरती स्थल, विद्युत पोल और रामघाट की करीब 100 मीटर सड़क भी बाढ़ की भेंट चढ़ गई।

रामघाट को रोशन करने वाले करीब 170 विद्युत पोल जमींदोज हो गए या बह गए। फुटओवर ब्रिज पर लगी विशाल एलईडी, पब्लिक एड्रेस सिस्टम और कैमरे भी पानी के तेज बहाव में बह गए। पर्यटन विभाग को ही करीब ढाई करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है। नगर पालिका की एलईडी लाइटें, कुर्सियां और शौचालय समेत अन्य संसाधनों का भी पता नहीं है।

आरती बंद, मठ-मंदिरों पर बाढ़ की गहरी चोट

दिगंबर अखाड़ा भरत मंदिर का गेट और नीचे बनी दुकानें बह गईं। कथा स्थल और अतिथि निवास भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। तोतामुखी हनुमान मंदिर की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। यज्ञवेदी मंदिर की सीढ़ियों के पास बने कमरे की छत बह गई।

निर्मोही अखाड़ा और चरखारी मंदिर की दीवारें भी जगह-जगह दरक गई हैं। मत्तगजेंद्रनाथ मंदिर, रामायणी कुटी, रामधाम, रावतपुरा आश्रम, दतिया मंदिर, छविकिशोर मंदिर और बिजावर मंदिर समेत अन्य धार्मिक स्थलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ ने धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी झटका दिया है।

भरत घाट स्थित गंगा आरती स्थल का टीनशेड बह गया और स्थल क्षतिग्रस्त होने से सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर रोक लगानी पड़ी है। उधर रामघाट और तुलसी घाट भी प्रभावित होने से गंगा आरती व धार्मिक कार्यक्रम बंद हैं। रामघाट में दुकानदारों और मठ-मंदिरों को करीब 20 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

यूपी-एमपी के तपोभूमि क्षेत्र में करीब 500 दुकानों और 15 हजार मकानों को मिलाकर 80 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है। कारोबारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बर्बाद सामान, कीचड़ और दोबारा कारोबार खड़ा करने की है।

बाढ़ ने 36 गांवों में भी तबाही

मंदाकिनी की बाढ़ ने जिले के 36 गांवों को प्रभावित किया। करीब 500 मकान क्षतिग्रस्त हुए, इनमें 20 पूरी तरह ढह गए। पानी उतरने के बाद प्रशासन और स्थानीय लोग घरों-दुकानों की सफाई में जुटे हैं। फुटओवर ब्रिज और विद्युत पोल की मरम्मत भी शुरू करा दी गई है।

यह भी पढ़ें- बाढ़ के बाद दरकने लगीं 114 साल पुराने निर्मोही अखाड़े की दीवारें, रोजाना 1000 लोगों को भोजन कराने वाली अन्न सेवा बंद

प्रशासन नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रख रहा है। बाढ़ ने पानी तो पीछे खींच लिया है, लेकिन रामघाट और मठ-मंदिरों पर छोड़े गए अपने निशान मिटने में शायद वर्षों लगेंगे।