मंदाकिनी बचानी है... साझा काम करें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश, केंद्र बने मददगार
प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट भूदान आंदोलन एवं सर्वोदय के प्रणेता संत विनोबा भावे, रामायण मेला के प्रथम प्रवर्तक डॉ. राममनोहर लोहिया व चित्रकूट मह ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
शिवा अवस्थी, चित्रकूट। प्रभु श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट भूदान आंदोलन एवं सर्वोदय के प्रणेता संत विनोबा भावे, रामायण मेला के प्रथम प्रवर्तक डॉ. राममनोहर लोहिया व चित्रकूट महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय की नींव डालने वाले भारत रत्न राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख का कर्म-केंद्र रही है। यहां मंदाकिनी किस्तों में खत्म की जा रही है।
मंदाकिनी नदी बचानी है...यह सबके मन में है। कारण, दशरथ नंदन राम सबके हैं। इसलिए उप्र व मप्र की सरकारें व केंद्र सरकार मिलकर पहल करें तो बात बने। एकीकृत चित्रकूट की परिकल्पना पर काम और तेज हो। प्रभु श्रीराम से जुड़े 84 कोस क्षेत्र के पर्यटन स्थलों के विकास की साझा रणनीति बनाएं। मंदाकिनी, पयस्विनी, सरयू के साथ लालापुर स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम के पास बह रही तमसा (वाल्मीकि) नदी, पाठा के जंगलों में बरदहा का सीमांकन कराएं। नदियों के तट पर पेड़ लगें व अवैध अतिक्रमण हटाएं। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव की सहभागिता और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की निगरानी से मंदाकिनी की अविरल, निर्मल धारा का संकल्प पूरा होगा।
उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश के बड़े भूभाग में स्थित चित्रकूट अब वैसा नहीं रहा। बहुत कुछ नहीं, सब कुछ बदल चुका है। सड़कें, पर्यटन स्थल, पहाड़ व वन क्षेत्र में काम हुए हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र के सती अनुसुइया आश्रम की पहाड़ी से निकली मंदाकिनी का अस्तित्व खतरे में है। विकास के नाम पर मंदाकिनी को आक्सीजन देने वाले औषधीय व गैर औषधीय अनगिनत वृक्षों की बलि चढ़ाई जा चुकी है। चित्रकूट के सारे घरों, होटलों व मंदिरों की गंदगी मंदाकनी के जल को विषाक्त कर रही है। ऐसा चित्रकूट के तमाम लोग मानते हैं, लेकिन हर कोई खुलकर बोलने से डरता है।
कंधों पर बंदूकें टांगे दादू (ठेकेदार व उनके कारिंदे) और सिपाहियों को लेकर अफसर आते हैं। घंटों में नहीं, मिनटों में बुलडोजर चलता है, आदिकालीन वृक्षों को गिरा मंदाकिनी के दोनों ओर पक्की दीवार बनवा रहे हैं। ऐसा स्फटिक शिला से कुछ पहले दिखता भी है। इससे मंदाकिनी का प्राकृतिक प्रवाह बदल गया है। टूरिज्म कारोबार से जुड़े आनंद सिंह पटेल, अरुण गुप्ता व जिला गंगा समिति के सदस्य अजीत सिंह कहते हैं, अभी कुछ नहीं बिगड़ा है। संयुक्त (उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश) चित्रकूट विकास प्राधिकरण बनाकर बदलाव ला सकते हैं। चित्रकूटधाम तीर्थ विकास परिषद का दायरा बढ़ाकर मध्य प्रदेश के चित्रकूट क्षेत्र को भी शामिल करें।
खबरें और भी
यह भी होना चाहिए
- दो राज्यों, दो कमिश्नरी, दो जिलों व नगर पालिकाओं के बीच सामंजस्य बनाएं व मिलकर काम कराएं।
- पहाड़-जंगल के संरक्षण और उनमें ही रोजगार देने पर काम हो, वनस्पतियों से आयुर्वेद का खजाना खोलें।
- विकास कार्यों की तरह ही नदी बचाना प्राथमिकता में आए, जलस्रोत खोलने के लिए जनता भी मददगार बने।
- यूपी में राम घाट के पास बूड़े हनुमान मंदिर के पास बंधा बनने से घाट की चौड़ाई और बढ़ाई जा सकेगी।
- नदी की नियमित सफाई के लिए आधुनिक मशीनें लगाएं, श्रद्धालुओं को जागरूक करें व इसके संकेतक लगें।
केन-बेतवा की तरह नर्मदा से जोड़ें
बुंदेलखंड में केन-बेतवा लिंक की तरह मंदाकिनी को नर्मदा से जोड़ा जाए। मध्य प्रदेश क्षेत्र में नर्मदा का पानी नहर से मझगवां के पास लाया जा रहा है। इसे मंदाकिनी में लिंक करने से वर्ष भर पानी रहेगा। साथ ही वाटर हेरिटेज पर काम हो। पुराने तालाबों को संरक्षित कर नदी से अंदर ही अंदर जोड़कर हमेशा पानी बनाए रखा जा सकता है।
मंदाकिनी की कल-कल धार बनी रहे, यह यूपी सरकार की प्राथमिकता में है। इसके लिए और पहल की जाएगी, ताकि नदी जोड़ो अभियान सार्थक हो सके। करोड़ों लोगों की आस्था को बल मिल सके।- रामकेश निषाद, जलशक्ति राज्यमंत्री, उप्र।
मंदाकिनी को निर्मल-अविरल बनाए रखने के लिए एसटीपी निर्माण व नाला बंद करने के प्रस्तावों पर काम चल रहा है। जलशक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह से मिलकर मंदाकिनी को लेकर बात रखेंगे।- चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, पूर्व राज्यमंत्री उप्र।