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    UN पहुंचा अमेरिकी हमले में मारे गए शिवानंद समेत तीन भारतीयों का मामला, FSUI ने की 50 लाख डॉलर मुआवजा दिलाने की मांग

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 09:56 PM (IST)

    एफएसयूआइ ने अमेरिकी हमले में मारे गए तीन भारतीय नाविकों का मामला संयुक्त राष्ट्र व अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के समक्ष उठाया है। यूनियन ने पीड़ित परिवार ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. एफएसयूआइ ने यूएन, आइएलओ में भारतीय नाविकों का मामला उठाया।

    2. अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की हुई थी मौत।

    3. यूनियन ने 50 लाख अमेरिकी डालर मुआवजे की मांग की।

    पवन कुमार मिश्र, देवरिया। फेडरेशन आफ सीफेयर्स यूनियंस आफ इंडिया (एफएसयूआइ) ने अमेरिकी हमले में मारे गए जिले के शिवानंद चौरसिया समेत तीन भारतीय नाविकों का मामला संयुक्त राष्ट्र (यूएन) व अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आइएलओ) के समक्ष उठाया है।

    यूनियन ने संयुक्त राष्ट्र में याचिका व आइएलओ को शिकायत भेजकर हस्तक्षेप करने व पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि अब तक इस संबंध में कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। यूनियन ने अपने एक्स हैंडल के जरिये यह जानकारी साझा की है।

    तीन भारतीय नाविकों की हुई थी मौत

    सुरौली के रहने वाले मृतक शिवानंद के मामा अजय चौरसिया व छोटे भाई रामप्रवेश चौरसिया ने बताया कि एफएसयूआइ ने अमेरिकी हमले में मारे गए शिवानंद समेत तीनों भारतीयों का मामला संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचाया है। उन्हें उम्मीद है कि इस मामले में न्याय मिलेगा। ओमान तट के निकट वाणिज्यिक पोत एमटी सेटेबेलो पर हुए अमेरिकी हमले में शिवानंद चौरसिया समेत तीन भारतीय नाविकों की मृत्यु हो गई थी।

    अन्य दो मृतकों में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के आदित्य शर्मा व आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम के पटनाला सुरेश शामिल थे। एफएसयूआइ ने अपने एक्स हैंडल पर कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आइएमओ) ने एमटी सेटेबेलो जहाज पर हुए हमले की निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव ने भी इस रुख का समर्थन किया है।

    यूनियन का कहना है कि जब पूरा वैश्विक समुद्री समुदाय व न्यायिक संस्थाएं यह स्वीकार करती हैं कि निर्दोष नाविकों पर हमला गलत था तो उनके परिवारों को अमेरिका की ओर से 50 लाख अमेरिकी डालर (पांच मिलियन डालर) का मुआवजा क्यों नहीं दिया जाना चाहिए?

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    राकेश चौहान प्रकरण भी उठाया

    एफएसयूआइ इससे पहले भलुअनी क्षेत्र के भगवानपुर (लंगड़ा टोला) निवासी राकेश चौहान के मामले को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा चुकी है। राकेश चौहान जहाज एमवी इलियाका पर फिटर के पद पर कार्यरत थे। सात मई को वेनेजुएला में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। जहाज का प्रबंधन एक्सफिनिटी मैरीटाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कर रही थी।

    राकेश की पत्नी रंजना चौहान का आरोप है कि जहाज के कप्तान, चीफ आफिसर, कंपनी के अधिकारियों, प्रबंध निदेशक व अन्य संबंधित व्यक्तियों की मिलीभगत से उनके पति की हत्या की गई।

    उनका यह भी आरोप है कि मृत्यु के बाद परिवार की जानकारी व सहमति के बिना राकेश के आंतरिक अंग निकाल दिए गए। साथ ही, मृत शरीर व दस्तावेजों की प्राप्ति से संबंधित अभिलेखों पर स्वजन के फर्जी हस्ताक्षर कर अपराध के साक्ष्य नष्ट करने का प्रयास किया गया।

    रंजना चौहान ने चार जुलाई को प्रार्थना-पत्र देकर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 1(4) और 1(5) के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि ये प्रविधान भारत के बाहर भारतीय नागरिक के साथ हुए ऐसे अपराधों पर भी लागू होते हैं, जो यदि भारत में घटित होते तो दंडनीय होते।