Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    15 जून को पुरुषोत्तम मास खत्म होते ही शुरू होंगे मांगलिक कार्य, समापन पर उद्यापन और दान का है विशेष महत्व

    Updated: Sun, 14 Jun 2026 04:30 PM (IST)

    पुरुषोत्तम मास 15 जून को समाप्त हो रहा है, जिसके बाद विवाह, गृहप्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाएंगे। ...और पढ़ें

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    संवाद सूत्र, देवरिया। एक माह से चल रहे पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का समापन 15 जून को होगा। इसके साथ ही विवाह, गृहप्रवेश, मुण्डन समेत अन्य मांगलिक कार्यों पर लगा विराम समाप्त हो जाएगा और शुभ कार्यों का सिलसिला पुनः शुरू हो जाएगा।

    आचार्य अजय शुक्ल ने बताया कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु जप, तप, व्रत, पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक साधना करते हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मास में किए गए धार्मिक कार्यों का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए समापन के समय उद्यापन अवश्य करना चाहिए।

    पुरुषोत्तम मास के समापन पर दान-पुण्य का विशेष महत्व

    उन्होंने बताया कि उद्यापन के अंतर्गत भगवान विष्णु की पूजा, सत्यनारायण भगवान की कथा, हवन एवं ब्राह्मण भोजन जैसे धार्मिक आयोजन किए जा सकते हैं। इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और साधना पूर्ण मानी जाती है।

    आचार्य शुक्ल ने कहा कि पुरुषोत्तम मास के समापन पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। श्रद्धालुओं को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान ब्राह्मणों और जरूरतमंद लोगों को करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में किया गया दान सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक पुण्यफल प्रदान करता है।

    खबरें और भी

    उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। इसलिए समापन के अवसर पर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना, उद्यापन और दान-पुण्य करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

    यह भी पढ़ें- बुजुर्गों को अब नहीं काटने पड़ेंगे थाने के चक्कर, घर आकर समस्या सुनेगी पुलिस; देवरिया में नई पहल शुरू