भोपतपुरा से वायुसेना की कमान तक, कुछ ऐसा रहा पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का सफर, गांव में जश्न
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है। देवरिया के भोपतपुरा ...और पढ़ें

HighLights
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र बने राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ।
देवरिया के भोपतपुरा गांव से है उनका गहरा जुड़ाव।
गांव में जश्न, ग्रामीणों ने बांटी मिठाइयां और पटाखे फोड़े।
जागरण संवाददाता, देवरिया। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के पहले सीईओ की जिम्मेदारी संभालने जा रहे पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का जुड़ाव देवरिया के भोपतपुरा गांव से है।
देश की सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी निभाने के बाद अब उन्हें रामनगरी की एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। ऑपरेशन सिंदूर में भी उनकी अहम भूमिका रही। उनकी नई जिम्मेदारी की खबर मिलते ही गांव में जश्न का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने पटाखे फोड़कर मिठाइयां बांटी और इसे पूरे गांव के लिए गौरव का क्षण बताया।
कौन हैं जीतेन्द्र मिश्र?
जितेंद्र मिश्र लंबे सैन्य करियर में अनुशासन, नेतृत्व और प्रशासनिक दक्षता के लिए पहचाने गए। पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहते हुए उन्होंने देश की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। स्वजन के अनुसार, उनके योगदान की प्रधानमंत्री ने भी सराहना की थी।
अब सैन्य सेवा से अलग उन्हें श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के कामकाज की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वायुसेना में बड़े स्तर पर संचालन और प्रबंधन का अनुभव उनके नए दायित्व में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जितेंद्र मिश्र दो भाइयों में बड़े हैं। उनके छोटे भाई देवेंद्र मिश्र दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं।
बहन वंदना मिश्र जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली में प्रोफेसर हैं। दोनों भाइयों का परिवार दिल्ली के मयूर विहार में साथ रहता है। परिवार की अगली पीढ़ी भी शिक्षा और करियर के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है।
जितेंद्र मिश्र के बड़े बेटे शांतनु मिश्र ने बीटेक किया है और दिल्ली में आईएएस की तैयारी कर रहे हैं। छोटे बेटे शारण्य मिश्र ने लंदन से पीएचडी की है और वहीं नौकरी कर रहे हैं।
ऊंचा ओहदा मिला, गांव से नाता नहीं टूटा
भोपतपुरा के ग्रामीण बताते हैं कि ऊंचे पदों पर पहुंचने के बाद भी जितेंद्र मिश्र का गांव से लगाव बना रहा। शादी-विवाह और प्रमुख त्योहारों पर परिवार का गांव आना-जाना होता रहा है। चचेरे भाई विपिन मिश्र, विनीत मिश्र, अंकित मिश्र, राम प्यारे मिश्र समेत ग्रामीणों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताई।
ग्रामीणों के लिए जितेंद्र मिश्र की पहचान केवल एक बड़े सैन्य अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि सरल स्वभाव और ईमानदारी से जुड़े व्यक्ति की भी है। देश की सुरक्षा से लेकर अब श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े दायित्व तक का उनका सफर गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।
