फर्जी मेडिकल कॉलेज ठगी: एफआईआर के बाद भी नहीं रुका खेल, एटा में 40 लाख के नए मामले आए सामने
फर्जी बीएस मेडिकल कॉलेज, मारहरा में 40 लाख रुपये की ठगी के नए मामले सामने आए हैं। कासगंज के व्यापारी ...और पढ़ें

एटा : मारहरा के फर्जी बीएस मेडिकल कालेज द्वारा ठगी की शिकायत लेकर थाने पहुंचे व्यापारी और छात्र- छात्राएं। जागरण
HighLights
फर्जी बीएस मेडिकल कॉलेज में 40 लाख की नई ठगी उजागर।
कासगंज के व्यापारी ने 35 लाख रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया।
कॉलेज प्रबंधक सतेंद्र कुमार पर छात्रों से भी ठगी के आरोप।
जागरण संवाददाता, एटा। मारहरा के नगरिया महमूदपुर स्थित बीएस मेडिकल कॉलेज के फर्जी होने का पर्दाफाश होने के बाद अब ठगी के नए मामले सामने आ रहे हैं। सोमवार को कासगंज के एक व्यापारी समेत कई छात्र-छात्राओं ने मारहरा थाने पहुंचकर कॉलेज प्रबंधक सतेंद्र कुमार पर करीब 40 लाख रुपये की ठगी के आरोप लगाए।
किसी से कॉलेज की इमारत बनवाने के नाम पर रकम ली गई तो किसी से बीएएमएस, डीफार्मा, जीएनएम और बीएससी नर्सिंग में प्रवेश दिलाने के नाम पर रुपये लिए गए। पुलिस के पास लगातार पहुंच रहीं शिकायतों से ठगी के शिकार लोगों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।
कासगंज के नदरई गेट निवासी व्यापारी मनोज कुमार वार्ष्णेय ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि करीब तीन वर्ष पहले उनकी कॉलेज प्रबंधक से दोस्ती हुई थी। प्रबंधक ने कॉलेज की इमारत बनवाने के नाम पर अलग-अलग समय में उनसे करीब 35 लाख रुपये ले लिए। रकम वापस मांगने के बाद भी रुपये नहीं लौटाए गए।
इसके अलावा अलीगढ़ के नगला लवेरा निवासी अमन कुमार से डीफार्मा में प्रवेश के नाम पर 42,800 रुपये लेने का आरोप है। अकराबाद क्षेत्र के लधौआ निवासी नीतू से जीएनएम के नाम पर 1.34 लाख रुपये, एटा के लोहा बादशाहपुर निवासी गोविंद से डीफार्मा के नाम पर 1.50 लाख रुपये, कासगंज के नगला शहजना निवासी रोहित कुमार से बीएससी नर्सिंग के नाम पर 40 हजार रुपये, बरीखेड़ा निवासी मुकेश कुमार से जीएनएम के नाम पर 30 हजार रुपये और ढोलना क्षेत्र के फिरोजपुर सिहोला, आलियार खां निवासी ख्यालीराम से जीएनएम में प्रवेश के नाम पर 80 हजार रुपये लेने की शिकायत की गई है।
मई 2025 में सामने आया था फर्जीवाड़ा, फिर भी गिरफ्तारी में हुई देर
बीएस मेडिकल कॉलेज के फर्जी होने का मामला पहली बार आठ मई 2025 को सामने आया था। डीएम एसएसपी द्वारा की जा रही जनसुनवाई में कॉलेज के कुछ छात्रों ने तत्कालीन जिलाधिकारी प्रेम रंजन सिंह और तत्कालीन एसएसपी श्यामनारायण सिंह से शिकायत की थी।
शिकायत पर जिलाधिकारी ने एडीएम और डीआइओएस के नेतृत्व में दो सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। जांच के दौरान ही मारहरा थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। प्रशासन की ओर से कार्रवाई के लिए सीएमओ को भी पत्र भेजा गया था। इसके बावजूद एफआइआर के बाद लंबे समय तक कॉलेज प्रबंधक सतेंद्र कुमार की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
अब 16 सितंबर को प्रबंधक के नाटकीय अपहरण की कहानी सामने आने और फर्जी मेडिकल कॉलेज का पूरा मामला खुलने के बाद पुलिस ने उसे आगरा आईएसबीटी क्षेत्र से बरामद किया। पुलिस ने सतेंद्र कुमार के अलावा गौरव अग्रवाल, भगवानदास, नरेंद्र और मुहम्मद शरीफ कुरैशी को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।
वर्ष 2022 से संचालित बताए जा रहे इस कॉलेज में बीएएमएस, डीफार्मा, बीफार्मा, बीएससी नर्सिंग, डीएमएलटी, बीएमएलटी, बीयूएमएस, जीएनएम और एएनएम समेत कई पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिए जाने की बात सामने आई है। विद्यार्थियों से फीस लेने के बाद डिग्री और मार्कशीट दिए जाने के आरोप भी हैं। बाद में कई विद्यार्थियों को दस्तावेज फर्जी होने की जानकारी हुई।
थानाध्यक्ष योगेंद्र सिंह ने बताया कि पीड़ितों की ओर से दी जा रही शिकायतों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है। अभी और लोग शिकायत लेकर सामने आ सकते हैं।
