एटा में मान्यता और फर्जी डिग्रियों के नाम पर करोड़ों की ठगी, 55 लाख के फ्रॉड में आरोपी प्रबंधक पर दर्ज हुआ एक और केस
एटा में एक फर्जी मेडिकल कॉलेज प्रबंधक ने खुद के अपहरण की साजिश रचकर 10 करोड़ से अधिक की ठगी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
फर्जी मेडिकल कॉलेज प्रबंधक ने खुद के अपहरण की साजिश रची।
छात्रों और स्कूल संचालक से 10 करोड़ से अधिक की ठगी।
पुलिस ने प्रबंधक व साथियों को जेल भेजा, रिमांड पर लेगी।
जागरण संवाददाता, एटा। खुद के अपहरण की साजिश रचने वाले फर्जी मेडिकल कॉलेज प्रबंधक की करतूतें खुलने लगी हैं। खेत में घर बनाकर उसमें बीएस मेडिकल कालेज खोला गया। पिछले चार सालों में छात्र-छात्राओं से 10 करोड़ से ज्यादा की ठगी का मामला सामने आया है। प्रबंधक के जेल जाने की सूचना मिलने पर अलीगढ़ से पहुंचे एक स्कूल संचालक ने मान्यता के नाम पर 55 लाख की ठगी का आरोप लगाकर तहरीर दी है।
दर्जन भर से ज्यादा छात्र-छात्राएं थाने पहुंचे और बयान दर्ज कराए। जेल भेजे गए प्रबंधक और उसके साथियों को पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी। सत्येंद्र कुमार ने खेत में एक घर बनाकर बीएस मेडिकल कॉलेज खोला।
इस कॉलेज से बीएएमएस के अलावा बीफार्मा, डी-फार्मा समेत तमाम कोर्स का संचालन दिखाकर डिग्रियां देता था। जानकारों के अनुसार सत्येंद्र और उसके साथियों ने 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की।
फर्जी कालेज की पोल खुलने के बाद जब छात्र-छात्राओं ने फीस लौटाने का दवाब बनाया तो 16 सितंबर को अपहरण की साजिश रची। पुलिस ने इसका पर्दाफाश करते हुए सत्येंद्र कुमार, रिटायर्ड सीएमओ के बेटे गौरव अग्रवाल कासगंज, भगवान दास, नरेंद्र और मोहम्मद शरीफ कुरैशी मारहरा को जेल भेज दिया।
रविवार को अलीगढ़ के स्कूल संचालक पन्नालाल ने पुलिस को बताया कि सत्येंद्र ने उनके स्कूल को मान्यता दिलाने के लिए 55 लाख रुपये की ठगी की। पुलिस ने तहरीर पर जांच शुरू कर दी है। इसके बाद छात्र-छात्राएं पहुंचे। बयान में बताया कि किसी से दो लाख तो किसी से तीन लाख रुपये वसूले गए और फर्जी डिग्रियां थमा दीं।
थानाध्यक्ष मारहरा योगेंद्र सिंह भाटी ने बताया कि जो छात्र-छात्राएं आ रहे हैं उनके बयान लिए जा रहे हैं। पुलिस आरोपितों का कस्टडी रिमांड लेगी।प्रशासन खेल रहा था नोटिस-नोटिस, पुलिस ने किया पर्दाफाशछात्र-छात्राओं को एक साल पूर्व कालेज के फर्जी होने पर शक हुआ।
कर्मचारियों के आइकार्ड पर बीएस मेडिकल कॉलेज एंड यूनिवर्सिटी लिखा था। शिकायत पर तत्कालीन एडीएम न्यायिक और डीआइओएस ने कुछ छात्राओं द्वारा की गई शिकायत की जांच के दौरान इस मेडिकल कालेज को फर्जी बताया था। तब से नोटिस आदि की कार्रवाई चल रही थी। एक साल तक प्रशासन नोटिस-नोटिस खेलता रहा और सत्येंद्र नए एडमिशन करता रहा। पुलिस ने फर्जी अपहरण के बाद भंडाफोड़ कर दिया।
