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एटा: स्वाइन फ्लू से डॉक्टर की मौत के बाद निगरानी बढ़ी, मेडिकल कालेज में अब अलग काउंटर

By Anil Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Fri, 04 Sep 2026 07:38 PM (IST)

एटा में स्वाइन फ्लू से एक डॉक्टर की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया है। अब मेडिकल कॉलेज ...और पढ़ें

एटा में शुक्रवार को हॉस्पिटल में लगी लाइनें।

एटा में शुक्रवार को हॉस्पिटल में लगी लाइनें।

जागरण संवाददाता, एटा। मेडिकल कालेज की ओपीडी में शुक्रवार को मरीजों की भीड़ के बीच बुखार, सर्दी-जुकाम और खांसी की शिकायत लेकर पहुंचे मरीज सामान्य मरीजों के बीच उपचार के लिए अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए।

गुरुवार को स्वाइन फ्लू से चिकित्सक की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मरीजों को अलग रखने और उनकी प्राथमिक जांच की व्यवस्था करने की तैयारी शुरू कर दी है। मेडिकल कालेज में अलग काउंटर बनाने के लिए सीएमओ ने प्राचार्य को पत्र भेजा है।

सवाल यह है कि जिले में स्वाइन फ्लू के चार मामले सामने आने और एक चिकित्सक की मौत के बाद यह व्यवस्था अब क्यों याद आई। मेडिकल कालेज में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इनमें बुखार, सर्दी-जुकाम और खांसी से पीड़ित मरीजों की संख्या भी कम नहीं रहती।

स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे ही होते हैं। ऐसे में संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान न होने पर संक्रमण के दूसरे मरीजों और तीमारदारों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद मेडिकल कालेज में अभी तक ऐसे मरीजों के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था नहीं हो सकी है

अब स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में पहल करते हुए अलग काउंटर बनाने की तैयारी शुरू की है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संदिग्ध मरीजों की प्राथमिक स्तर पर पहचान, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यक जांच के लिए अलग व्यवस्था जरूरी है।

इसके लिए मेडिकल कालेज प्रशासन को पत्र भेजा गया है। हालांकि, यह व्यवस्था कब तक शुरू होगी, इसकी स्पष्ट समय सीमा सामने नहीं आई है। ऐसे में स्वाइन फ्लू के खतरे के बीच महकमे की तैयारियों पर सवाल उठ रहे हैं।

सीएचसी पर अलग काउंटर का दावा

प्रभारी जिला मलेरिया अधिकारी लोकमन सिंह के अनुसार जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बुखार और सर्दी-जुकाम वाले मरीजों के लिए अलग काउंटर बनाए गए हैं। संदिग्ध मरीजों की जांच कराने के साथ चिकित्सकों और कर्मचारियों को स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

विभाग की ओर से व्यवस्थाएं पूरी होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन असली चुनौती इन व्यवस्थाओं के प्रभावी संचालन की है। अलग काउंटर बनने के बाद भी यदि संदिग्ध मरीजों की जांच में देरी हुई या उन्हें समय से अलग नहीं किया गया तो संक्रमण रोकने की पूरी कवायद कमजोर पड़ सकती है।