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    Farrukhabad Amritpur MLA Report Card: संकिसा-नवाबगंज क्षेत्र चमका, गंगा पार में विकास की रफ्तार रही सुस्त

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 08:16 PM (GMT+05:30)

    अमृतपुर विधायक सुशील कुमार शाक्य के रिपोर्ट कार्ड में संकिसा और नवाबगंज जैसे क्षेत्रों में विकास दिखा, लेकिन गंगा पार इलाके में विकास की गति धीमी रही। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. संकिसा और नवाबगंज क्षेत्र में विकास कार्य हुए तेज।

    2. गंगा पार क्षेत्र में बाढ़ और विकास की कमी।

    3. अमृतपुर को नगर पंचायत बनाने का वादा अधूरा।

    जागरण संवाददाता, कानपुर। विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही समय शेष रह गया है। ऐसे में राजनीतिक माहौल धीरे-धीरे गर्म होने लगा है और गांव की चौपालों से लेकर कस्बों के चौराहों तक जनप्रतिनिधियों के कामकाज पर चर्चा शुरू हो गई है। अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र में भी लोग विधायक सुशील कुमार शाक्य के पांच वर्षों के कार्यकाल का आकलन कर रहे हैं। क्षेत्र की तस्वीर पर नजर डालें तो कहीं विकास कार्यों की स्पष्ट झलक दिखाई देती है, तो कहीं आज भी मूलभूत सुविधाओं की कमी लोगों को खल रही है।

    अमृतपुर विधानसभा का उत्तरी हिस्सा गंगा और रामगंगा नदियों के बीच स्थित है। गंगापार का यह इलाका लंबे समय से विकास की बाट जोह रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में अमृतपुर को नगर पंचायत का दर्जा दिलाने का वादा किया गया था, लेकिन यह घोषणा अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी। करीब 35 वर्ष पहले तहसील बनने के बावजूद अमृतपुर में आज भी विकास खंड और नगर पंचायत का गठन नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप कस्बा आज भी ग्रामीण स्वरूप में ही नजर आता है।

    क्षेत्र के किसानों की लंबे समय से कृषि मंडी की मांग भी अधूरी है। फसल बेचने के लिए किसानों को जिला मुख्यालय अथवा दूसरे जनपदों तक जाना पड़ता है। वहीं, हर वर्ष आने वाली बाढ़ से गंगापार के कई गांव प्रभावित होते हैं। कटान रोकने के लिए अहलादपुर भटौली और कोलासोता में परकोपाइन स्पर बनाए गए, लेकिन उनसे अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी। बाढ़ से स्थायी समाधान की योजनाएं अभी भी पूरी तरह जमीन पर उतरती नहीं दिख रही हैं।

    दूसरी ओर विधानसभा के दक्षिणी हिस्से में विकास कार्य अपेक्षाकृत अधिक दिखाई देते हैं। ऐतिहासिक बाबा नीबकरोरी मंदिर और बौद्ध तीर्थस्थल संकिसा के आसपास चौड़ी सड़कें, हाईमास्ट लाइटें और अन्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है। हालांकि नीबकरोरी मंदिर के निकट रेलवे अंडरपास में जलभराव की समस्या आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए परेशानी बनी हुई है।

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    विधायक निधि से कई गांवों में सीसी सड़कें, नालियां, हाईमास्ट लाइटें, बारातघर, विद्यालयों में बाउंड्रीवाल, शौचालय, सबमर्सिबल पंप, पानी की टंकियां और सार्वजनिक स्थानों पर वाटर कूलर लगाए गए हैं। इसके अलावा विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर स्मृति द्वार भी बनवाए गए हैं। कुल मिलाकर सड़कों के चौड़ीकरण और बुनियादी विकास के क्षेत्र में काम तो नजर आता है, लेकिन किसानों की पुरानी कृषि मंडी की मांग अब भी अधूरी पड़ी है।

    इसके साथ ही हर साल कहर ढाने वाली गंगा और रामगंगा की बाढ़ से स्थायी बचाव की उम्मीद लगाए ग्रामीणों को आज भी ठोस इंतजार है। कुल मिलाकर क्षेत्र में विकास और अधूरे वादों की एक मिली-जुली तस्वीर देखने को मिल रही है।

    विधानसभा क्षेत्र - अमृतपुर

    • कुल मतदाता- 2,67,223
    • पुरुष - 1,50,771
    • महिला - 1,16,448
    • अन्य - 4

     

    अमृतपुर को नगर पंचायत बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, लेकिन जनगणना के कारण नए नगर निकायों के गठन और विस्तार पर रोक लग गई। क्षेत्र के विकास के लिए लगातार कार्य कराए गए हैं। नीबकरोरी धाम और संकिसा धाम को जोड़ने वाली सड़क का चौड़ीकरण कराया गया है, जो अब 11 से 12 मीटर तक चौड़ी है। मोहम्मदाबाद से कायमगंज और फर्रुखाबाद से नवाबगंज होते हुए एटा सीमा तक सड़कों का निर्माण कराया गया है। कई गांवों में गलियों का निर्माण और विद्युतीकरण कराया गया। संकिसा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विकसित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। बाढ़ की समस्या के समाधान के लिए शमसाबाद से कड़हर तक बांध निर्माण को लेकर सर्वे कराया गया है। प्रारंभिक सर्वे रिपोर्ट में सामने आया है कि इस परियोजना में कई गांवों को विस्थापित करना पड़ेगा और इसके लिए केंद्र सरकार और एनजीटी की भी अनुमति लेनी होगी।
    - सुशील कुमार शाक्य, विधायक।

     

    सदन में 95 प्रतिशत रही उपस्थिति

    विधानसभा में 95 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने वाले विधायक सुशील कुमार शाक्य ने सत्र के दौरान नीब करौरी व संकिसा धाम के विकास और बाढ़ से स्थायी बचाव के लिए बांध निर्माण की मांग को प्रमुखता से उठाया।

     

    अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों का अभाव साफ दिखाई देता है। युवाओं को रोजगार दिलाने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए। अमृतपुर और राजेपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी बेहतर नहीं हुई है। किसान खाद के लिए परेशान हैं और बेसहारा मवेशियों की समस्या से निजात नहीं मिल सकी है। गोशालाओं पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद मवेशी खेतों में घूम रहे हैं। क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए कोई विशेष पहल नहीं हुई। गंगा और रामगंगा में आने वाली बाढ़ से हर साल लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।
    - डा. जितेंद्र सिंह यादव, रनर अप प्रत्याशी।


    गंगापार में बाढ़ और बिजली की समस्या सबसे बड़ी चुनौती है। गंगा किनारे तटबंध बनवाने का वादा पूरा होना चाहिए था। 132 केवीए विद्युत केंद्र बनने से निर्बाध आपूर्ति की उम्मीद है। अमृतपुर में मंडी न होने से किसानों को अनाज बेचने के लिए अल्लाहगंज जाना पड़ता है।
    अनिल पाठक, अमृतपुर


    अमृतपुर को नगर पंचायत बनाने का वादा अब तक पूरा नहीं हो सका है। इससे क्षेत्र का विकास प्रभावित हो रहा है। चिकित्सीय सेवाओं में भी सुधार की जरूरत है। हालांकि राजेपुर क्षेत्र में आइटीआइ बनने से युवाओं को लाभ मिला है।
    हरिशरण सिंह, अमृतपुर


    विधायक ने कई विकास कार्य कराए हैं, लेकिन चुनाव में ग्रामीण क्षेत्रों को 22 घंटे बिजली देने की बात कही गई थी, जो पूरी नहीं हो सकी। शिक्षा के क्षेत्र में और प्रयास की जरूरत है। रोजगार के लिए बड़े उद्योग स्थापित कराने चाहिए।
    अमन शुक्ला, शुकुरुल्लापुर


    संकिसा में विकास के दावे पूरी तरह धरातल पर नहीं दिखते। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और संग्रहालय की मांग अभी पूरी नहीं हुई है। बस स्टैंड का वादा भी अधूरा है। बिजली और सड़क के क्षेत्र में काम दिखाई देता है, लेकिन शिक्षा और चिकित्सा पर भी ध्यान देना चाहिए।
    सुरेश बौद्ध, संकिसा