अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध से फर्रुखाबाद के व्यापारी चिंतित, लड़ाई लंबी खिंची तो प्रभावित होगा निर्यात
फर्रुखाबाद के व्यापारी अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध से चिंतित हैं। उन्हें डर है कि युद्ध लंबा खिंचा तो अमेरिका और खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात प्रभाव ...और पढ़ें
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जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। अमेरिका इजरायल व ईरान में युद्ध छिड़ने के बाद स्थानीय व्यापारियों व निर्यातकों की चिंता बढ़ी है। उनका मानना है कि युद्ध यदि लंबा खिंचा तो आर्डर होल्ड होंगे और माल भी अटकेगा। हालांकि अभी स्थिति सामान्य है, लेकिन भविष्य को लेकर संशय बढ़ रहा है।
शहर के कारखानों में तैयार होने वाले कुशन कवर व अन्य लेदर युक्त सामान सहित रजाई, छपे हुए कपड़े आदि सामान का निर्यात अमेरिका व खाड़ी देशों में होता है। युद्ध के बाद से अब व्यापारियों की चिंता बढ़ी है। पिछले वर्ष अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया तो कारोबार लगभग ठप हो गया था।
बाद में 15 से 20 प्रतिशत छूट के बाद कुछ आर्डर आए थे। पिछले माह अमेरिका ने 50 प्रतिशत टैरिफ वापस ले लिया था, जिससे व्यापार बढ़ने की आस जगी थी। अब युद्ध शुरू होने से व्यापारी चिंतित हैं।
व्यापारियों के अनुसार यदि लंबा खिंचा तो आर्डर होल्ड हो जाएंगे। व्यापारी यह भी समीक्षा करने में जुट गए हैं कि अमेरिका व खाड़ी देशों में जाने वाला माल किस रास्ते से जाता है।
यहां से मुंबई पोर्ट पर माल की लोडिंग कराई जाती है। पिछले वर्ष अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के बाद एक व्यवसाई का माल मुंबई पोर्ट से वापस आ गया था।
कारखाना मालिक व एक्सपोर्टर गौरव अग्रवाल ने बताया कि अमेरिका माल पहुंचने में एक माह लगता है। यदि युद्ध आगे बढ़ा तो समस्या आएगी। अभी खाड़ी देशों से भी कहीं माल रुकने या आर्डर होल्ड होने की सूचना नहीं आई है।
‘युद्ध तो किसी दशा में ठीक नहीं होता। युद्ध होगा तो व्यापार प्रभावित होना तय है। अभी अमेरिका के लिए निर्यात पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया था। इसी बीच युद्ध शुरू हो गया है। यदि युद्ध आगे बढ़ा तो इससे व्यापार पर असर पड़ना तय है। वह लोग अभी हालात की समीक्षा करेंगे।’
- विकास गुप्ता, कारखाना मालिक व निर्यातक‘50 प्रतिशत टैरिफ हटने के बाद अमेरिका से कारोबार शुरू होने की उम्मीद जगी थी। इसी बीच युद्ध शुरू हो गया। यह चिंताजनक है, यदि युद्ध ज्यादा दिन चला तो माल निर्यात होने में व्यवधान आएगा। वह लोग फर्रुखाबाद में तैयार हो रहे गारमेंट्स व छपे हुए कपड़े आदि विदेश में निर्यात करते हैं।’
- संदीप साध, निर्यातक