लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन देने में रुचि नहीं दिखा रहे फर्रुखाबाद के किसान, 25 दिन में हुए मात्र 44 बैनामे
फर्रुखाबाद में लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण में किसानों की अरुचि सामने आई है। 25 दिनों में मात्र 44 बैनामे हुए, जबकि 16 हजार से अधिक किसानों ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, फर्रुखाबाद। गंगा एक्सप्रेस-वे जनपद से छिनने के विरोध में जनपद में बड़ा आंदोलन हुआ, खूब बयानबाजी भी हुई। इसके बाद सरकार ने 92 किलोमीटर नंबर लिंक एक्सप्रेस-वे स्वीकृत किया। जिसका बजट भी अवमुक्त हो चुका है, लेकिन किसान भूमि देने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
25 दिन में मात्र 44 बैनामा हो सके हैं, जबकि तहसील सदर में ही 16 हजार से अधिक किसानों से बैनामा कराया जाना है। राजस्व कर्मी गांव में किसानों के पास चक्कर काट रहे हैं।
जनपद से निकलने वाले लिंक एक्सप्रेस-वे निर्माण को भूमि देने में किसान हीलाहवाली कर रहे हैं। राजस्व कर्मचारी किसानों के पास चक्कर काट रहे हैं। तहसील सदर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में पहला बैनामा 10 फरवरी को गांव सिरमौरा तराई निवासी किसान रूपलाल ने अपनी दो बीघा तीन विसवा भूमि का बैनामा किया था।
इसके बाद से शनिवार तक मात्र 44 बैनामा ही हो पाए हैं। जबकि 1806 गाटा में 16 हजार से अधिक किसानों से बैनामा कराना है। दरअसल टिकैत गुट किसान यूनियन मुआवजा कम बताकर आंदोलन कर रही है और किसानों से बैनामा न करने के लिए कहा जा रहा है। इसी वजह से राजस्व कर्मचारी परेशान हैं।
दरअसल किसानों को उम्मीद है कि उनका सर्किल रेट बढ़ेगा, जिससे मुआवजे की धनराशि भी अधिक मिलेगी। लिंक एक्सप्रेस-वे को गंगा एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा। जिससे लखनऊ, प्रयागराज, दिल्ली, आगरा, चित्रकूट आने-जाने में लोगाें को सुविधा मिलेगी।
खबरें और भी
संकिशा, नीबकरोरी धाम व कंपिल आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए भी आना-जाना सुगम होगा। शहर के लोगों के लिए गांव बरौन व हथियापुर के बीच में कट बनाए जाने का प्रस्ताव है। प्रभारी तहसीलदार सदर सनी कनौजिया ने बताया कि कुछ लोग किसानों को समझा रहे हैं।
अभी एसआईआर का काम भी चल रहा है जो एक-दो दिन में समाप्त हो जाएगा। इसके बाद पूरा जोर किसानों से बातचीत में लगाया जाएगा। अभी करीब 15 बैनामा प्रस्तावित हैं, जिन्हें स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा गया है। यदि बैनामा नहीं हो पाएंगे तो नियमानुसार भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई की जाएगी।