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    द्रौपदी की जन्मस्थली से लेकर 'नीब करौरी बाबा' की तपोभूमि तक, फर्रुखाबाद में 7488 करोड़ के प्रोजेक्ट्स से बदल रही जिले की तस्वीर

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 04:02 PM (IST)

    द्रौपदी की जन्मस्थली और नीब करौरी बाबा की तपोभूमि फर्रुखाबाद, ₹7,488 करोड़ के विकास परियोजनाओं से आधुनिकता की ओर अग्रसर है। गंगा एक्सप्रेसवे, औद्योगिक ...और पढ़ें

    फर्रुखाबाद में 7488 करोड़ के प्रोजेक्ट्स से विकास की नई गाथा

    फर्रुखाबाद में 7488 करोड़ के प्रोजेक्ट्स से विकास की नई गाथा

    HighLights

    1. ₹7,488 करोड़ के निवेश से फर्रुखाबाद में विकास की नई लहर।

    2. गंगा एक्सप्रेसवे, औद्योगिक क्षेत्र से कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर।

    3. ऐतिहासिक फर्रुखाबाद अब आधुनिकता और प्रगति का नया पर्याय।

    डिजिटल डेस्क, फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश का फर्रुखाबाद जिला, जो गंगा नदी के तट पर बसा है, अपने आप में इतिहास और आस्था का एक विशाल महाकाव्य है। महाभारत काल में पांचाल नरेश द्रुपद की राजधानी रहा यह क्षेत्र, जहाँ देवी द्रौपदी का जन्म हुआ, आज केवल अपनी ऐतिहासिक जड़ों तक सीमित नहीं है।

    कभी सड़कों और सुविधाओं के अभाव में पिछड़ा माने जाने वाला फर्रुखाबाद, आज आधुनिक कनेक्टिविटी, औद्योगिक विस्तार और करोड़ों रुपये की नई परियोजनाओं के साथ 'बढ़ते उत्तर प्रदेश' की विकास गाथा का एक महत्वपूर्ण अध्याय बन चुका है।

    रामायण से लेकर महाभारत तक की गूंज

    फर्रुखाबाद का इतिहास रामायण और महाभारत दोनों युगों से जुड़ा है। यहाँ का 'पांचाल घाट' वह स्थान है जहाँ महाभारत काल की स्मृतियां आज भी जीवंत हैं। इसके अलावा, जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ की जन्मस्थली भी यही है। संकिसा, जहाँ महर्षि विश्वामित्र ने तपस्या की थी और जहाँ भगवान बुद्ध ने स्वर्ग से धरती पर अवतार लिया था, इसी जिले का हिस्सा है।

    आस्था का केंद्र: नीब करौरी बाबा की तपोस्थली

    फर्रुखाबाद की धार्मिक पहचान केवल पौराणिक काल तक सीमित नहीं है। यह महान संत 'नीब करौरी बाबा' (Neeb Karori Baba) की तपोस्थली भी है। उनके चमत्कारों की कहानियों में से एक यह भी है कि जब अंग्रेजी शासन के दौरान एक टीटीई (TTE) ने बिना टिकट यात्रा करने पर बाबा को ट्रेन से उतार दिया था, तो वह ट्रेन लाख कोशिशों के बाद भी तब तक आगे नहीं बढ़ी जब तक बाबा ने अनुमति नहीं दी। इसके बाद, उसी स्थान पर बाबा के नाम से एक रेलवे स्टेशन (लक्ष्मण दास पुरी) का निर्माण किया गया।

    कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर: विकास की नई लाइफलाइन

    फर्रुखाबाद में विकास की एक नई बयार बह रही है। शहर को जाम से मुक्ति दिलाने और व्यापार को गति देने के लिए सड़कों और पुलों का जाल बिछाया जा रहा है।

    • गंगा एक्सप्रेसवे: यह एक्सप्रेसवे फर्रुखाबाद की कनेक्टिविटी को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कर रहा है।

    • ओवरब्रिज और बाईपास: शहर में दो नए रेलवे ओवरब्रिज बनाए गए हैं, और इटावा-बरेली हाईवे का चौड़ीकरण किया जा रहा है।

    • अमृत भारत स्टेशन योजना: इसके तहत रेलवे स्टेशन का भी 36 करोड़ रुपये की लागत से पुनरुद्धार किया जा रहा है।

    औद्योगिक विकास: खिमसेपुर बना नया इंडस्ट्रियल हब

    फर्रुखाबाद की आर्थिक मजबूती का आधार अब केवल खेती नहीं रहा। 'खिमसेपुर' औद्योगिक क्षेत्र 261 एकड़ में विकसित किया जा रहा है, जहाँ करोड़ों रुपये का निवेश आ रहा है। यहाँ ट्रैक्टर पार्ट्स, टायर रिसाइकलिंग (Tyre Recycling) और प्लास्टिक रिसाइकलिंग (Plastic Recycling) के उद्योग स्थापित हो रहे हैं। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं और उन्हें अब काम के लिए महानगरों की ओर नहीं भागना पड़ रहा।

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    कृषि और ओडीओपी (ODOP) से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार

    कृषि क्षेत्र में भी फर्रुखाबाद आगे है। यहाँ बड़े पैमाने पर आलू, लहसुन और अन्य नकदी फसलों की पैदावार होती है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत यहाँ की पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग और जरी-जरदोज़ी (Zari-Zardozi) कला को नई पहचान मिली है, जिससे स्थानीय कारीगरों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है।

    फर्रुखाबाद आज अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सहेजते हुए, औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। ₹7,488 करोड़ के निवेश प्रस्तावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह ऐतिहासिक शहर अब आधुनिकता और प्रगति का नया पर्याय बन रहा है।