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    फतेहपुर में पेयजल गुणवत्ता होगी दुरुस्त, आधुनिक मशीनरी का उपयोग कर रोकी जाएगी दूषित जलापूर्ति

    Updated: Wed, 21 Jan 2026 04:25 PM (IST)

    फतेहपुर और कौशांबी में नगर निकायों के अधिकारियों व तकनीकी कर्मियों के लिए पेयजल गुणवत्ता पर कार्यशाला हुई। इसमें दूषित जलापूर्ति रोकने, पाइपलाइन लीकेज ...और पढ़ें

    आधुनिक ढंग से पाइप लाइन का ज्वाइंट करने का तरीका बताते एक्सइएन महेश गौतम व दूषित पानी की जांच करने के लिए लगे स्टाल में जानकारी लेते ईओ। जागरण

    आधुनिक ढंग से पाइप लाइन का ज्वाइंट करने का तरीका बताते एक्सइएन महेश गौतम व दूषित पानी की जांच करने के लिए लगे स्टाल में जानकारी लेते ईओ। जागरण

    HighLights

    1. नगर निकायों को दूषित जलापूर्ति रोकने का प्रशिक्षण मिला

    2. आधुनिक मशीनरी से पाइपलाइन लीकेज का पता लगाया जाएगा

    3. स्वच्छ पेयजल हेतु जल गुणवत्ता जांच पर जोर दिया गया

    जागरण संवाददाता, फतेहपुर। नगर निकायों में नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जल निगम शहरी कार्यालय में फतेहपुर और कौशांबी जनपद की संयुक्त कार्यशाला हुई। कार्यशाला में दोनों जनपदों की सभी नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारी (ईओ), अवर अभियंता, जलकल से जुड़े तकनीकी कर्मचारियों के अलावा चिकित्सक, भूगर्भ जल विशेषज्ञ तथा विभिन्न कंपनियों के विक्रेताओं ने प्रतिभाग किया।

    कार्यक्रम का उद्देश्य पेयजल आपूर्ति के दौरान होने वाली तकनीकी खामियों, पाइप लाइन लीकेज, जल स्रोतों के प्रदूषण और दूषित पानी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम को लेकर नगर निकायों के अधिकारियों को जागरूक और प्रशिक्षित किया।

    दैनिक जागरण के अभियान का संज्ञान लेकर एक्सईन महेश गौतम ने कार्यक्रम कराया। मेडिकल कालेज के चिकित्सक अंकुर वैद्य ने संबोधित करते हुए कहा कि पाइप लाइन सप्लाई के आसपास कचरा न जमा हो पाए, इस बात का ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा नाला, नालियों के पास से जहां भी पाइप लाइन होकर गुजरती है, वहां पर पाइप का जोड़ मजबूत रखा जाए, जिससे दूषित जलापूर्ति घरों में न हो पाए।

    डायरिया, पीलिया, टायफाइड और त्वचा रोगों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दूषित पेयजल इन बीमारियों का प्रमुख कारण है। उन्होंने नगर निकायों को समय-समय पर पानी की गुणवत्ता जांच कराने और संदिग्ध क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने की सलाह दी।

    भूगर्भ विभाग के सहायक अभियंता शुभम मिश्रा ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में रासायनिक अपशिष्ट खुले में फेंक देने से भूगर्भ जल दूषित होता है। इसकी रोकथाम के लिए सरकार ने ग्राउंड वाटर अधिनियम 2019 के तहत दो से पांच लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया है। प्रयागराज जल निगम के सहायक अभियंता शिवम कुमार ने बताया कि पुराने और जर्जर पाइपलाइन नेटवर्क, अवैध कनेक्शन और लीकेज के कारण शुद्ध पानी दूषित हो जाता है, जिससे आमजन को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

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    विशेषज्ञ विनीत मिश्रा ने फ्लोराइड, आयरन, नाइट्रेट, पारा, कैडमियम, क्लोरीन, आर्सेनिक जैसे रासायनिक तत्वों की जांच कराने के बाद ही पेयजल का प्रयोग करने की सलाह दी। इनकी पानी में अधिक मात्रा होने से त्वचा, कैंसर, दांतों, हड्डियों, किडनी, गुर्दा, पेट व मस्तिष्क संबंधित बीमारी हो सकती हैं।

    वेंडर्स ने आधुनिक उपकरणों की जानकारी दी

    हरम्भ केमिकल्स, एमकाम टेक्नोलाजी, केयर इयूरामेटिक, एलएलपी कानपुर, बीआर पालीप्लस, टेटों मीटर इंडिया, एक्सिस साल्यूशन, अमिल कंन्क्रीट व सीके इंटरप्राइजेज आदि कंपनियों ने अपने-अपने आधुनिक उपकरणों के स्टाल लगाकर आधुनिक मशीनरी, पाइपलाइन लीकेज डिटेक्शन सिस्टम, जल शुद्धिकरण उपकरण, सेंसर आधारित तकनीक की जानकारी सांझा की। संदीप गुप्ता, राकेश, मुबीन से पाइप लाइन मरम्मत के नए तरीकों का प्रदर्शन किया।


    ‘कार्यशाला में मिली तकनीकी जानकारी बहुत ही उपयोगी रही। आधुनिक उपकरणों के प्रयोग से पाइप लाइन लीकेज की समय पर पहचान कर पेयजल गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी। ताकि नागरिकों को दूषित जलापूर्ति न हो पाए।’ - पंकज यादव, ईओ जहानाबाद

     

    ‘पेयजल आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रशिक्षण से तकनीकी क्षमता बढ़ी है, जिससे आम नागरिकों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिलेगा। पानी जांच के लिए आधुनिक मशीन खरीदी जाएगी।’ - आशीष चक्रवर्ती, ईओ बहुआ