Iran-US Israel War Impact: UP में 10 दिन में प्लास्टिक दाना 90 से 150 रुपये किलो बढ़ा, उद्योग पर बंदी का खतरा
ईरान-इजरायल युद्ध के कारण फतेहपुर के प्लास्टिक उद्योग पर संकट गहरा गया है। पीपी ग्रेन्यूल्स (प्लास्टिक दाना) की कीमत 90 से बढ़कर 150 रुपये प्रति किलोग ...और पढ़ें
-1773151262750_m.webp)
HighLights
ईरान-इजरायल युद्ध से प्लास्टिक दाने की कीमतें बढ़ीं।
कच्चे माल की कमी से उत्पादन रोकना पड़ सकता है।
फतेहपुर के उद्योगों में सैकड़ों श्रमिकों पर संकट।
जागरण संवाददाता, फतेहपुर। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब जिले के उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोलियम उत्पादों के दाम बढ़ने से प्लास्टिक उद्योग पर संकट गहराने लगा है। प्लास्टिक उत्पाद बनाने में इस्तेमाल होने वाला पीपी ग्रेन्यूल्स (प्लास्टिक दाना) इन दिनों महंगा और दुर्लभ हो गया है, जिससे औद्योगिक इकाइयों के सामने उत्पादन बनाए रखना चुनौती बन गई है।
चौडगरा औद्योगिक क्षेत्र की बिंदकी प्लास्टो प्राइवेट लिमिटेड में प्लास्टिक दाने से तिरपाल और राज राजेश्वरी टेक्नो फैब प्राइवेट लिमिटेड में प्लास्टिक बोरी का निर्माण किया जाता है। इन दोनों फैक्ट्रियों में करीब 150 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। उद्यमियों के अनुसार युद्ध के चलते पिछले कुछ दिनों से प्लास्टिक दाने की नई खेप नहीं पहुंच पा रही है। जबकि युद्ध से पहले पीपी ग्रेन्यूल्स का भाव करीब 90 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अब बढ़कर 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है।
कीमत बढ़ने के बावजूद बाजार में पर्याप्त मात्रा में कच्चा माल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। मौजूदा स्थिति में दोनों फैक्ट्रियों के पास लगभग 15 दिन का ही स्टाक बचा है। कच्चे माल की कमी के कारण बोरी बनाने वाली फैक्ट्री के सामने उत्पादन रोकने की नौबत आ गई है। इन बोरियों का उपयोग आटा, मैदा, चीनी, खाद, मिर्च, चावल समेत कई खाद्य व औद्योगिक उत्पादों की पैकिंग में किया जाता है। उद्यमियों ने सरकार से हस्तक्षेप कर कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की मांग उठाई है।
‘पीपी ग्रेन्यूल्स के दाम 60 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। बाजार में माल भी नहीं मिल रहा है। यदि यही हाल रहा तो 10–15 दिन में उत्पादन रोकना पड़ेगा। इससे कारोबार का नुकसान भी होगी और श्रमिकों पर रोजीरोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।’
- विकास गुप्ता, उद्यमी
‘युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। कच्चा माल महंगा होने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। सरकार को उद्योगों के हित में हस्तक्षेप कर उपलब्धता और कीमत नियंत्रित करनी चाहिए, ताकि औद्योगिक इकाइयां प्रभावित न हो पाएं।’
- प्रमोद गुप्ता, उद्यमी