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    NHAI की रडार पर 258 बिल्डिंग, हाईवे किनारे की अवैध कॉलोनियों पर कसेगा शिकंजा; दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

    Updated: Sat, 24 Jan 2026 07:30 PM (IST)

    एनएचएआई ने कानपुर-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे अवैध रूप से विकसित 258 इमारतों, कॉलोनियों, होटलों और पेट्रोल पंपों पर कार्रवाई शुरू की है। जांच ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, फतेहपुर। कानपुर-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अवैध रूप से विकसित की जा रही कालोनियों पर अब कार्रवाई शुरू हो गई है। नेशनल हाईवे अथर्रिटी आफ इंडिया (एनएचएआई) की जांच में हाईवे से बिना अनुमति रास्ता जोड़कर बनाई गई 258 इमारतें, कालोनियां, होटल और पेट्रोल पंप अवैध पाए गए हैं। प्राधिकरण ने सभी भवन स्वामियों को नोटिस जारी कर 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं।

    नोटिस जारी होते ही बिल्डरों और प्लाट खरीदारों में हड़कंप मच गया है। हाईवे किनारे जगह-जगह लगे कालोनियों के आकर्षक बोर्ड लोगों को प्लाट और आलीशान मकानों का सपना दिखा रहे हैं। सस्ते दामों का झांसा देकर कालोनाइजर आम लोगों को निवेश के लिए प्रेरित कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इन क्षेत्रों में प्लाट खरीदना कानूनी पचड़े में फंसने जैसा है। जांच में सामने आया है कि शहर के आसपास हाईवे से सटी अधिकांश कालोनियां मानकों की अनदेखी कर विकसित की गई हैं।

    छिवली नदी से लेकर कटोघन टोल प्लाजा तक कालोनी विकसित करने के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। कालोनाइजर किसानों के खेतों को लीज पर लेकर प्लाटिंग करा रहे हैं और बिक्री सीधे किसान से खरीदार के नाम कराई जा रही है। ऐसे में कालोनाइजर की भूमिका केवल कमीशन एजेंट की रह जाती है। ग्राहकों को लुभाने के लिए कच्ची नींव, अधूरी बाउंड्रीवाल और रंग-रोगन कर नक्शे दिखाए जाते हैं।

    पार्क, चौड़ी सड़क, गेट बंद कालोनी, बिजली-पानी और जलनिकासी जैसी सुविधाओं का वादा किया जाता है, लेकिन प्लाट बिकते ही कालोनाइजर अपने वादों से मुकर जाते हैं। इन कालोनियों का न तो विनियमित क्षेत्र से नक्शा पास होता है और न ही एनएचएआई से हाईवे कनेक्शन की अनुमति ली जाती है। एनएचएआई की टीम की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इन कालोनियों और भवनों को नियमों को ताक पर रखकर सीधे हाईवे से जोड़ा गया है, जबकि इसके लिए प्राधिकरण से एनओसी लेना अनिवार्य है। ऐसे 258 भवनों के स्वामियों को नोटिस जारी कर समय-सीमा में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए हैं।

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    यह हैं मानक

    1. - विनियमित क्षेत्र अथवा विकास प्राधिकरण से अनुमोदन जरूरी है।
    2. - ले-आउट में प्लाट, पार्क, विकास कार्य की स्थिति स्पष्ट होना चाहिए।
    3. - पूरे क्षेत्रफल का दस प्रतिशत हिस्सा पार्क के लिए छोड़ना जरूरी है।
    4. - पार्क को विकसित कराना कालोनाइजर की जिम्मेदारी होती है।
    5. - आवागम के लिए नौ मीटर की पक्की सड़क होना जरूरी है।
    6. - जलनिकासी निकासी के लिए खुली नालियां होना जरूरी है।
    7. - कालोनी में बिजली की व्यवस्था कराना आवश्यक होता है।
    8. - कालोनी की चाहर दीवारी और गेट बंद कराना कालोनाइजर की जिम्मेदारी है।
    9. - वेस्ट मैनेजमेंट, वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था कालोनी में होना चाहिए।

    कानपुर-प्रयागराज हाईवे किनारे 258 प्रापर्टी अवैध निकली है, इस संबंध में उनके मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। पंद्रह दिन के अंदर अतिक्रमण खाली करने के निर्देश संबंधित को दिए गए हैं। यदि समय-सीमा पर अतिक्रमण नहीं खाली कराया गया तो राजस्व टीम की मदद लेकर कार्यवाही की जाएगी। - मोहद जैन, प्रबंधक तकनीकी एनएचएआई