यहां 24 घंटे खुलते हैं ठेके, दरवाजा खटखटाते ही मिलता है मनचाहा ब्रांड, जिम्मेदार विभाग बेखबर
फिरोजाबाद में शराब की दुकानें निर्धारित समय के बाद भी 24 घंटे अवैध रूप से संचालित हो रही हैं, जहां ग्राहक अतिरिक्त पैसे देकर शराब खरीदते हैं। ...और पढ़ें

HighLights
फिरोजाबाद में शराब की दुकानें 24 घंटे अवैध रूप से संचालित।
ग्राहक अतिरिक्त पैसे देकर कभी भी खरीद सकते हैं शराब।
आबकारी विभाग और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल।
जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। शहरी क्षेत्र में शराब की कई ऐसी दुकानें हैं। जहां 24 घंटे शराब मिल सकती है। फिर चाहें रात के 12 बज रहे हों या फिर सुबह के छह। दुकान पर जाकर शटर खटखटाते ही अंदर से आवाज आ जाती है। ब्रांड बताने के बाद अतिरिक्त रुपये देने पर शराब मिल जाती है।
सोशल मीडिया पर कई बार इसके वीडियो भी वायरल हुए लेकिन, आबकारी विभाग और क्षेत्रीय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
रविवार सुबह छह बजे दैनिक जागरण ने कुछ स्थानों पर स्थिति देखी। इसमें पता चला कि रात के 10 बजे के बाद दुकानों के शटर तो बंद होते हैं, लेकिन बिक्री चालू रहती है।
सेल्समैन दुकान के अंदर ही सोते हैं। वे हर समय शराब उपलब्ध कराते हैं। इस कारण वे परिवार सबसे अधिक परेशान हैं, जिनके घर का कोई सदस्य सुबह होने से पहले ही ठेके पर पहुंच जाता है।
दृश्य-1.. करबला चौराहा
शनिवार सुबह 6.00 बजे करबला चौराहा के निकट एक गली में संचालित देशी शराब के ठेके पर भीड़ तो नहीं थी, लेकिन कुछ युवक यहां बैठकर शराब पी रहे थे। कुछ देर बार दो युवक पैदल चलते हुए गली के नुक्कड़ पर आए। इधर-उधर देखने के बाद गली में घुसे और ठेके के गेट पर दो बार हाथ मारा। कुछ रुपये दिए और शराब लेकर चले गए।
दृश्य-2.. क्लब चौराहा
सुबह 6.30 बजे क्लब चौराहा स्थित कंपोजिट दुकान के पास ही देशी शराब का दुकान है। इसके गेट पर भी भीड़ तो नहीं थी, लेकिन लोगों की नजर से बचते हुए बारी-बारी से आ रहे लोग गेट बजाने के बाद शराब की खरीदी कर रहे थे। दुकान अंदर बैठा सेल्समैन 20 से 30 रुपये अतिरिक्त लेकर गेट और दीवार के बीच की खाली जगह से शराब दे रहा था। खास बात इसमें यह थी कि चौराहे पर उत्तर पुलिस का पिंक बूथ बना हुआ है।
इस संबंध में आबकारी निरीक्षक एमपी सिंह का कहना है कि उनके पास इस तरह की कोई शिकायत नहीं आई है। फिर भी टीम भेज कर जांच करा ली जाएगी।
यह हैं जिम्मेदार
इस समस्या के लिए आबकारी निरीक्षक के साथ ही संबंधित थानों की पुलिस भी जिम्मेदार है। इनके द्वारा ठेकों की निगरानी के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जाता। बल्कि देखकर भी अनदेखा करते हैं।