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    शिकोहाबाद के नारायण कॉलेज में घोटाला, 1.32 करोड़ की मिली वित्तीय अनियमितता; प्रबंध समिति पर प्राथमिकी दर्ज

    By Nikunj Yadav Edited By: Prateek Gupta
    Updated: Sat, 08 Aug 2026 08:48 PM (IST)

    शिकोहाबाद के नारायण महाविद्यालय में 1.32 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में प्राचार्य ने न्यायालय के निर्देश पर प्रबंध समिति के चार सदस्यो ...और पढ़ें

    शिकोहाबाद का नारायण कॉलेज।

    शिकोहाबाद का नारायण कॉलेज।

    संवाद सूत्र, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद)। नारायण महाविद्यालय में 1.32 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते प्राचार्य ने न्यायालय के निर्देशानुसार प्रबंध समिति के चार सदस्यों के विरूद्ध शुक्रवार को प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस ने शुक्रवार को न्यायालय के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। मामला एफडी के अवैध भुनाने व गबन का है।

    नारायण महाविद्यालय के प्राचार्य डा. वीके सिंह की न्यायालय में दी गई तहरीर के आधार पर थाने में प्रबंध समिति के चार सदस्यों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

    आरोपितों में अध्यक्ष एसके टंडन निवासी स्वरूप नगर कानपुर, प्रबंधक डा.एलसी. मेहरा निवासी मुहल्ला खत्राना, कटरा मीरा निवासी सचिव विनोद कुमार चतुर्वेदी और स्टेट मैनेजर निर्दोष प्रताप सिंह निवासी भगवानपुरम आगरा गेट शामिल हैं। प्राचार्य ने शिकायत में आरोप लगाया कि समिति के पदाधिकारियों ने आपराधिक षड़यंत्र रचकर कॉलेज की सावधि (एफड़ी) जमा रसीदें संदिग्ध परिस्थितियों में गायब कर दीं

    28 अप्रैल 2023 को खाते से कुल 1.32 करोड़ अवैध रूप से भुना लिए गए। धनराशि को बाद में 124 नई एफडी रसीदों में बांट कर भेदभावपूर्वक दिखाया गया और बिना किसी वैधानिक अनुमति के खर्च कर भी कर लिया गया। जिसकी कार्यालय के अभिलेखों में कोई भी रसीदे नहीं है। इसके साथ ही लिपिकों ने भी इन रसीदों की जानकारी से इनकार किया है।

    न्यायालय ने पुलिस को 24 घंटे में प्राथमिकी दर्ज करने के इस मामले में आदेश दिये थे। वहीं इस बारे में प्रबंधक से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन बंद मिला। इंस्पेक्टर अनुज कुमार ने बताया कि न्यायालय की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

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    बिना फोटो के दिए गए शपथ पत्र, उठे सवाल

    महाविद्यालय में 1.32 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं के मामले के बीच प्रबंध समिति के सदस्यों की एक और बड़ी लापरवाही सामने आई है। समिति के सदस्यों द्वारा जमा किए गए सभी शपथ पत्रों पर अपनी फोटो ही नहीं लगाई गई है। बिना फोटो के शपथ पत्र प्रस्तुत करना कानूनी प्रक्रिया और मामले की पारदर्शिता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।