सब्जी बेचने वाला बना करोड़ों का मालिक, OEF हजरतपुर के जीएम की हुई थी कृपा; CBI जांच में आईं सामने चौंकाने वाली बातें
सीबीआइ ने एमएसएम एंटरप्राइजेज के मालिक संतोष कुमार बघेल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है, जो पहले सब्जी विक्रेता था। महाप्रबंधक से नजदीकियों के चलते उसे ...और पढ़ें

ऑर्डिनेंस फैक्ट्री हजरतपुर।
संवाद सूत्र, टूंडला (फिरोजाबाद)। सुनकर चौंकिएगा नहीं, जिस एमएसएम एंटरप्राइजेज कंपनी के स्वामी संतोष कुमार बघेल के विरुद्ध सीबीआइ ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। वह ओईएफ में सब्जीे बेचने का काम करता था। बाद में परचून की दुकान खोली और महाप्रबंधक से नजदीकियां बढ़ी तो देखते ही देखते करोड़ों रुपये की कंपनी का मालिक बन बैठा।
इनकी फर्म को आठ करो़ड़ की कीमत के 50 ठेके दिए गए थे। अब सीबीआइ दोनों के गठजोड़ की कुंडली खंगाल रही है। अब तक कहावतों में सुना था कि खुदा जब देता है तो छप्पर फाड़कर देता है। लेकिन आर्डिनेंस फैक्ट्री में एक सब्जी विक्रेता और महाप्रबंधक का ऐसा गठजोड़ हुआ कि वह चंद दिनों में ही करोड़ों की फर्म का मालिक बन बैठा।
संतोष कुमार बघेल पिता की मृत्यु के बाद करीब 40 वर्ष पूर्व गांव उसायनी अपनी ननिहाल मां के साथ रहने आया था। मामा हेतराम के यहां सब्जी बेचने का काम होता था। जीविका चलाने को संतोष ने भी ओईएफ में 20 वर्ष पूर्व सब्जी की दुकान खोल ली। करीब आठ वर्ष पूर्व सब्जी की दुकान बंद कर परचून की दुकान खोल ली।
उसके बाद वह महाप्रबंधक अमित सिंह के संपर्क में आया और करीब चार वर्ष पूर्व दुकान बंद कर फैक्ट्री में ही छोटे मोटे बेल्डिंग के काम करने लगा। इसी बीच संतोष ने एमएसएम एंटरप्राइजेज के नाम से फर्म बना ली। महाप्रबंधक का खास होने के कारण मानकों को ताक पर रखकर उनकी अनुभवहीन कंपनी को 2022 से लेकर 2025 तक करीब आठ करोड़ के 50 मरम्मत और सड़क बनाने के ठेके दिए गए।
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शिकायत पर सीबीआइ ने कुंडली खंगाली तो दोनों के गठजोड़ की परतें खुलती चलीं गई। ग्रामीणों की माने तो संतोष की आर्थिक स्थित कराेड़ों के टेंडर लेेने की नहीं है। दोपहर एक बजे जागरण की टीम गांव पहुंची तो घर पर संतोष नहीं मिले। उनका बेटा काकू बघेल और पत्नी मिले। पूछने पर बताया कि संतोष बाहर गए हैं।
उनका नंबर भी स्विच ऑफ जा रहा था। सब्जी की दुकान पर बैठे मामा के बेटे कालू बघेल ने भी इस मामले में कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। इस मामले में महाप्रबंधक डी कुहान से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी तबीयत खराब होने के कारण बात नहीं हो सकी।
बढ़ाई गई ओईएफ की सुरक्षा
अधिकारियों की मिली भगत से ओईएफ फैक्ट्री में हुए करोड़ों के घालमेल की जांच को आए दिन सीबीआइ फैक्ट्री पहुंच रहीं है। ऐसे में फैक्ट्री की सुरक्षा को और भी कड़ा कर दिया गया है। हर आने जाने वाले की सघन जांच हो रही है।
दो वर्ष पूर्व बनाया था मकान, खरीदी थी कार
संतोष ने गांव में करीब दो वर्ष पूर्व पक्का मकान बनवाने के साथ ही दो कार खरीदी थी। एक कार वह स्वयं प्रयोग करते हैं और दूसरी कार को फैक्ट्री में ही किराए पर लगा रखा है। ग्रामीणों ने बताया कि संतोष की पहले आर्थिक स्थित ठीक नहीं थी।