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ऑर्डिनेंस फैक्ट्री हजरतपुर में घोटाला, टेंडर में कमाए करोड़ों; पूर्व जीएम समेत तीन पर CBI ने दर्ज किया केस

By Rajneesh Kumar Mishra Edited By: Prateek Gupta
Published: Wed, 08 Jul 2026 10:17 PM (IST)

आयुध उपस्कर निर्माणी हजरतपुर में सितंबर 2022 से 2025 के बीच तत्कालीन महाप्रबंधक ने अयोग्य फर्म को 7 करोड़ के ...और पढ़ें

हजरतपुर टूंडला स्थित आयुध निर्माणी।

हजरतपुर टूंडला स्थित आयुध निर्माणी।

जागरण संवाददाता, फिरोजाबाद। आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफ) हज़रतपुर में सितंबर 2022 से 2025 तक तात्कालीन महाप्रबंधक ने अयोग्य फर्म से मिलीभगत करके सात करोड़ रुपये के 18 ठेके दिए गए। इस दौरान आवश्यकता से अधिक बैग खरीदे गए।

प्रारंभिक जांच में मामला सही पाए जाने पर सीबीआइ इंस्पेक्टर की तहरीर पर ओईएफ के तात्कालीन महाप्रबंधक, मेसर्स एमके इंडस्ट्रीज़ के दोनों निदेशक और अन्य अज्ञात के विरुद्ध धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में गाजियाबाद सीबीआइ थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सीबीआइ को एक शिकायत मिली थी कि ओईएफ हजरपुर से मेसर्स एमके इंडस्ट्रीज, जिसका 2024 में नाम बदलकर मेसर्स एमके हाईटेक प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया था। फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए और तकनीकी योग्यताओं की कमी के बाद भी सात करोड़ रुपये के 18 ठेके (सितंबर 2022-2025) हासिल किए हैं

आरोप था कि मेसर्स एमके हाईटेक प्राइवेट लिमिटेड के पास अपेक्षित कार्य अनुभव नहीं था। साथ ही दिए गए कार्य लिए आवश्यक तकनीकी योग्यता भी नहीं थी। इसकी जांच के लिए सीबीआइ ने नौ जनवरी 2026 को एक प्रारंभिक जांच रिपोर्ट दर्ज की थी।

जांच के दौरान यह पता चला कि मेसर्स एमके इंडस्ट्रीज जो 12 मार्च 2022 को बी-79, ग्राउंड फ्लोर, अशोक एन्क्लेव-द्वितीय, सेक्टर-37, फरीदाबाद में रविंदर सिंह और विजय रतन की पार्टनरशिप वाली फर्म के तौर पर शुरू हुई थी। बाद में 29 फरवरी 2024 को मेसर्स एमके हाइटेक प्राइवेट लिमिटेड में बदल दिया गया।

यह कंपनी 14/4 मथुरा रोड, सेक्टर-32, फरीदाबाद से काम कर रही थी। इसमें 99.96 प्रतिशत शेयर रविंदर सिंह के पास थे। दोनों व्यक्ति फर्म के निदेशक थे। इस कंपनी ने 2022 से 2025 के बीच टेंडर और एलपीसी मोड के ज़रिए कुल 5.26 करोड़ रुपये के 17 ठेके हासिल किए। मौके पर जाकर जांच करने पर फर्म के पते पर कोई कामकाज होता नहीं मिला

जांच के दौरान यह पता चला कि 1.01 करोड़ रुपये के डफल ट्राली बैग ठेके में ट्रूप कंफर्टस लिमिटेड (टीसीएल) ने शुरू में 31 अक्टूबर 2022 को एक हजार बैग के लिए राॅ मैटीरियल खरीदने की मंज़ूरी दी थी।

हालांकि, ओईएफ के अधिकारियों प्रेम नारायण अग्रवाल, दीपक कुमार और डी. कुहन ने महाप्रबंधक अमित सिंह की मंज़ूरी से, टीसीएल की नई मंज़ूरी लिए बिना ही पांच हजार रेडी-मेड बैग खरीदने का दायरा बढ़ा दिया। 26 अक्टूबर 2023 को जारी टेंडर के लिए पांच बोली लगाने वाले आए।

इनमें से चार को प्री-बिड सैंपल न जमा करने के कारण अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके चलते एकमात्र मेसर्स एमके इंडस्ट्रीज तकनीकी रूप से योग्य बोली लगाने वाली कंपनी बची। इसके बाद कारण दर्ज किए बिना इस प्रक्रिया को सिंगल टेंडर में बदल दिया गया। चार जनवरी 2024 को ठेका दे दिया गया। तीन मई 2024 और एक जुलाई 2024 के बीच पांच हजार बैग सप्लाई किए गए।

इसके लिए 84.75 लाख रुपये का भुगतान किया गया। जांच के दौरान यह पता चला कि खरीद और असल ज़रूरत के बीच बहुत ज़्यादा अंतर था। तीन मई 2024 से चार फरवरी 2026 के बीच सिर्फ़ 1,072 बैग जारी किए गए, जबकि 3,928 बैग 21 महीने से ज़्यादा समय तक स्टाक में बेकार पड़े रहे। अनुमानित मांग के बारे में दी गई दलीलें भी साबित नहीं हो सकीं

बैंक की जांच में यह भी पता चला कि मेसर्स एमके इंडस्ट्रीज के बैंक खाते से कंचन सिंह (जिन्हें अमित सिंह की दूसरी पत्नी के तौर पर पहचाना गया) को 3.40 लाख रुपये स्थानांतरित किए गए थे।

जांच के दौरान, ओईएफ हजरतपुर के तत्कालीन महाप्रबंधक अमित सिंह इस वित्तीय लेन-देन और पार्टनरशिप फ़र्म मेसर्स एमके इंडस्ट्रीज को को अनुचित फ़ायदा पहुंचाने के बारे में कोई संतोषजनक कारण नहीं बता पाए। महाप्रबंधक के इस कृत्य में रविंदर सिंह और विजय रतन भी शामिल हैं।

इस पर गाजियाबाद सीबीआइ थाने में इंस्पेक्टर नितिन खत्री की तहरीर पर ओईएफ के महाप्रबंधक अमित सिंह, मेसर्स एमके इंडस्ट्रीज के साझीदार रविंदर सिंह , विजय रतन और अन्य अज्ञात के विरुद्ध धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।