गृहस्थ जीवन छोड़ पकड़ी आध्यात्म की राह, हाथरस व आगरा की दो युवतियां ईश्वरीय सेवा के लिए समर्पित
टूंडला के प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय में समर्पण समारोह हुआ, जिसमें हाथरस और आगरा की दो युवतियों तनु व खुशी ने ईश्वरीय सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

ब्रह्मकुमारी बहनें तनु (बाएं से तीसरी) और खुशी (दाएं से दूसरी) को आशीर्वाद देते विधायक प्रेमपाल धनगर (दाएं से तीसरे): जागरण
HighLights
टूंडला में ब्रह्माकुमारी संस्था में समर्पण समारोह आयोजित।
हाथरस-आगरा की दो युवतियों ने जीवन समर्पित किया।
तनु और खुशी ने गृहस्थ जीवन त्याग आध्यात्म अपनाया।
संवाद सहयोगी, टूंडला (फिरोजाबाद)। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय रामनगर एटा रोड पर रविवार को समर्पण समारोह मनाया गया। जिसमें हाथरस और आगरा की दो युवतियों ने ईश्वरीय सेवा के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया। राजयोगिनी बहनों और अतिथियों ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 11 बजे प्रभु मिलन गीत एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तनु बहन और खुशी बहन ने अपने समर्पण की प्रेरक यात्रा का अनुभव सुनाया तो पूरा सभागार भाव-विभोर हो उठा, सभी की आंखें नम हो गईं। आध्यात्मिक नाटिका मैं आत्मा, मेरा पिता परमात्मा की सजीव प्रस्तुति ने हर दिल को परमात्म की स्मृति से भर दिया।
ब्रह्माकुमारी के रामनगर सेवा केंद्र पर मनाया समर्पण समारोह
मुख्य अतिथि विधायक प्रेमपाल धनगर ने दोनों बहनों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था नशामुक्त एवं विकारमुक्त समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही है। तनु और खुशी बहन का यह समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
केंद्र प्रभारी विजय बहन ने कहा कि दोनों बहनों ने सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर अपना संपूर्ण जीवन ईश्वरीय सेवा में अर्पित करने का संकल्प लिया है। कार्यक्रम में जोन प्रभारी राजयोगिनी शीला बहन, मधु बहन, माउंट आबू से आए ब्रह्माकुमार छोटेलाल, बाईपुर सेवा केंद्र प्रभारी मंजरी बहन, खंदौली आगरा सेवा केंद्र संचालिका राधिका बहन, योगाचार्य एडवोकेट रितेश नंदवंशी ने विचार व्यक्त किए।
उपस्थित स्वजन में बेटियों से बिछड़ने के दुख के साथ दिखा त्याग का गर्व
हाथरस के सादाबाद निवासी 33 वर्षीय तनु छह बहन और दो भाईयों में पांचवें नंबर की हैं। उनकी सबसे बड़ी बहन विजय 25 वर्ष पूर्व प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आश्रम से जुड़ी हैं। वह भी 12 वर्ष से संस्था से जुड़कर कार्य कर रहीं थीं। रविवार को उन्होंने गृहस्थ जीवन को छोड़कर आध्यात्म की राह चुनी है।
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खुशी दो भाइयों के बीच अकेली बहन
इसी प्रकार 32 वर्षीय छलेसर, आगरा निवासी खुशी दो भाइयों के बीच अकेली बहन हैं। उनके भाई प्राइवेट नौकरी करते हैं। पिता पेशे से डाक्टर हैं। वह भी 12 वर्ष से संस्था के लिए काम कर रही हैं। कार्यक्रम में तनु के माता-पिता और खुशी के पिता उपस्थित थे। इस दौरान उनकी आंखों में आंसू थे और बेटी के त्याग पर गर्व।
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केंद्र संचालिका विजय बहन ने बताया कि दोनों बहनें सदैव सेंटर पर ही रहेंगी। बीच-बीच में वह अपने परिवार से मिल सकती हैं। यहां से गृहस्थ जीवन में लौटने का कोई रास्ता नहीं है। अब अर्थी ही यहां से उठेगी।
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