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'एंटीबायोटिक दवाओं का गलत तरीके से निस्तारण बढ़ा सकता है एएमआर का खतरा', गाजियाबाद में डॉक्टर ने दी चेतावनी

Updated: Mon, 16 Feb 2026 04:21 PM (IST)

दैनिक जागरण और IMA ने गाजियाबाद में एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। डॉ. नवनीत वर्मा ने एंटीबायोटिक ...और पढ़ें

राजनगर एक्सटेंशन की गौर कास्केड सोसायटी में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

राजनगर एक्सटेंशन की गौर कास्केड सोसायटी में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। दैनिक जागरण और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के संयुक्त अभियान एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) पर प्रहार के अंतर्गत रविवार को राजनगर एक्सटेंशन की गौर कास्केड सोसायटी में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में डॉ. नवनीत वर्मा ने सोसायटी में रहने वाले लोगों को एंटीबायोटिक दवाओं के गलत इस्तेमाल से होने वाले खतरों, एएमआर के विभिन्न कारणों एवं एएमआर के दुष्प्रभावों को लेकर जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान डा. नवनीत वर्मा ने एंटीबायोटिक दवाओं के सही इस्तेमाल के साथ विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं पर आधारित लोगों के सवालों के जवाब भी दिए।

डॉ. नवनीत वर्मा ने लोगों को एएमआर और एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल के सही तरीका बताते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। जागरूकता कार्यक्रम दौरान लोगों ने एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल, वेरिएशन, गुणवत्ता और दवाओं में अंतर से लेकर दवाओं से संबंधित विभिन्न सवाल किए जिनका डॉ. नवनीत ने जवाब देकर उन्हें संतुष्ट किया।

डॉ. नवनीत ने कहा कि सबसे पहले जरूरी है कि स्वाद से ज्यादा स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए। आज के समय में लोग अपने स्वाद के लिए बेमौसम की फल एवं सब्जियां खा रहे हैं। जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर होने से कोई भी संक्रमण आसानी से प्रभावी हो जाता है। ऐसे में चिकित्सक एंटीबायोटिक दवाएं लिखते हैं और जब एंटीबायोटिक दवाओं का सही तरीके से इस्तेमाल न किया जाए तो इससे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का का खतरा बढ़ जाता है। वायरल एवं वैक्टीरिया ज्यादा प्रभावी हो जाते हैं। ऐसे में चिकित्सक को ज्यादा हैवी डोज देने की जरूरत पड़ती है।

स्वस्थ रहने के लिए सबसे पहले स्थानीय भोजन एवं मौसमी फलों एवं सब्जियों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी है। व्यायाम एवं प्रणायाम करें, चीनी का सेवन सीमित करें। किसी तरह से संक्रमित होने पर एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत पड़ती है तो जो समय और अवधि डाक्टर न बताई है उसके अनुसार ही दवाओं का सेवन करें। एक खुराक में आराम होने पर दवा लेना न छोड़े। जितनी खुराक डाक्टर ने बताई हैं उसे पूरा करें।

साथ ही जो एंटीबायोटिक दवाएं बच जाती हैं उनका सही तरीके से निस्तारण करें। सही निस्तारण न करने की स्थिति में भी रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ जाता है। बची हुई दवाओं को सीधे नाली में न बहाएं और गोलियों को सामान्य कूड़े में न फेंके। या तो दवाएं जहां से ली गई हैं वहीं वापस कर दें। अस्पताल में दवाओं को वापस कर सकते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं का जितना सही इस्तेमाल जरूरी है उतना ही उनका सही तरीके से निस्तारण जरूरी है।

एएमआर के प्रति जागरूकता के लिए आयोजित कार्यक्रम में डाक्टर ने काफी अच्छी जानकारी दीं।कार्यक्रम में दवाओं का सही इस्तेमाल और निस्तारण का तरीका समझाया। - नीरज राठी

दैनिक जागरण द्वारा एएमआर पर जागरूकता कार्यक्रम कराया गया। आज के समय में इस विषय पर सभी का जागरूक होना जरूरी है। दवाओं के इस्तेमाल के साथ निस्तारण का भी तरीका बताया। - पुनीत गोयल

एंटीबायोटिक दवाओं के इस्तेमाल का सही तरीका और गलत तरीके से इस्तेमाल के दुष्परिणाम भी डाक्टर ने बताए। इसके लिए सभी का जागरूक होना जरूरी है। - एमपी ओझा

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