बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अभिभावक अलर्ट, सोशल मीडिया और मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर सख्त पॉलिसी की मांग
गाजियाबाद में तीन बहनों की आत्महत्या के बाद बच्चों की वर्चुअल गतिविधियों पर चिंता बढ़ी है। इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन इंटरनेट मीडिया और मोबाइल के इस्तेम ...और पढ़ें
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छोटे बच्चों की ऑनलाइन कक्षाओं पर रोक लगाने की अपील की गई। (सांकेतिक तस्वीर)

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जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। साहिबाबाद की भारत सिटी सोसायटी में तीन बहनों द्वारा आत्महत्या की घटना के बाद से अभिभावकों में बच्चों की वर्चुअल गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऐसे में छोटे बच्चों की ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन एवं स्कूल से मोबाइल पर दिए जा रहे होमवर्क आदि पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस संबंध में इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन द्वारा अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों से मांग की जा रही है।
इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सरकार से सोशल मीडिया एवं मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर सख्त नीति बनाने की मांग की है। इस संबंध में पदाधिकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) एवं सीबीएसई को पत्र लिखकर वीडियो गेम एवं सोशल मीडिया को लेकर सख्त नियम बनाने की मांग की।
बुधवार को एसोसिएशन द्वारा छोटे बच्चों की ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन पर रोक लगाने की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन भी दिया जाएगा। एसोसिएशन के पदाधिकारी विवेक त्यागी का कहना है कि 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सशक्त आयु-सत्यापन व्यवस्था लागू की जाए।
हिंसक एवं लत लगाने करने वाले ऑनलाइन गेम पर सख्त नियंत्रण हो। सभी स्कूलों में डिजिटल सेफ्टी एवं सोशल उपयोग पर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं। विद्यालय में कक्षा पांच तक की ऑनलाइन कक्षाओं के संचालन पर रोक लगाई जानी चाहिए। बुधवार को इस संबंध में ज्ञापन देंगे।
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बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के निर्देश
बेसिक शिक्षा अधिकारी ओपी यादव का कहना है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के साथ किताबें एवं अखबार आदि पढ़ने में रुचि बढ़ाने के लिए पहले ही स्कूलों को निर्देशित किया जा चुका है। इस संबंध में प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए जा चुके हैं। विद्यालयों में इस दिशा में कार्य किया भी जा रहा है।
इसके अलावा शासन स्तर से जो भी निर्देश मिलेंगे उसका पालन विद्यालयों में कराया जाएगा। इस संबंध में जल्दी ही प्रधानाचार्यों के साथ बैठक भी की जाएगी। जिसमें प्रधानाचार्यों से बच्चों के मोबाइल के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने को लेकर बात की जाएगी।