सरकारी जमीन पर कब्जे की जांच अब लेखपाल नहीं, तहसीलदार करेंगे; गाजियाबाद डीएम का आदेश
गाजियाबाद में सरकारी जमीनों पर कब्जे की बढ़ती शिकायतों के मद्देनजर जिलाधिकारी ने अब लेखपालों की जगह तहसीलदारों को जांच का जिम्मा सौंपा है।
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कलक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान समस्याएं सुनते डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ सौ. प्रशासन
अभिषेक सिंह, गाजियाबाद। गाजियाबाद में कलक्ट्रेट में इन दिनों निजी व सरकारी संपत्तियों पर कब्जे की शिकायत अधिक मिल रही हैं। इसमें लेखपालों क कार्यप्रणाली पर शिकायतकर्ताओं द्वारा सवाल उठाया जा रहा है।
इसके मद्देनजर जिलाधिकारी ने तीनाें तहसील के तहसीलदारों को निर्देश दिए हैं कि सरकारी जमीनों पर कब्जे की जांच वे खुद करेंगे, इसमें लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की भी चेतावनी दी है।
जिला मुख्यालय पर प्राप्त होने वाली लगभग 40 प्रतिशत शिकायतें जमीन पर कब्जे से संबंधित होती हैं। इनमें दो पक्षों के बीच निजी संपत्तियों के विवाद के मामले और सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायतें प्राप्त होती है।
पीड़ित व्यक्ति को संपत्ति पर कब्जा दिलाया
निजी संपत्तियों के विवाद के मामले में जिलाधिकारी ने संबंधित तहसील प्रशासन, निबंधन विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर जांच कराई जाती है। शिकायत सही मिलने पर पीड़ित व्यक्ति को उसकी संपत्ति पर कब्जा दिलाया जाता है। हाल ही में विजयनगर में एक मकान और गांधी नगर में एक दुकान पर अवैध कब्जे को हटवाकर डीएम ने पीड़ित व्यक्ति को संपत्ति पर कब्जा दिलाया है।
जिलाधिकारी ने बुधवार को तीनों तहसीलदारों को निर्देश दिए कि यदि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किए जाने की शिकायत किसी शिकायतकर्ता द्वारा की जाती है तो उसकी जांच खुद तहसीलदार करें, ऐसे मामलों को जांच के लिए लेखपाल पर निर्भर न रहें।
ऐसे मामलों में सीधे तहसीलदार जिम्मेदार होंगे
उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि यदि कोई शिकायतकर्ता सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत लेकर
कलक्ट्रेट परिसर में आया और उसने बताया कि तहसील में शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है या फिर लेखपाल ने गलत रिपोर्ट लगाई है तो ऐसे मामलों में सीधे तहसीलदार जिम्मेदार होंगे।
शिकायतकर्ता द्वारा सरकारी जमीन पर कब्जे की शिकायत मिलने पर तहसीलदार न केवल जांच करें बल्कि शिकायत सही हो तो सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए कार्यवाही शुरू करें। इस मामले में रिपोर्ट संबंधित तहसील के एसडीएम को सौंपे।
एसडीएम की जिम्मेदारी सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने की होगी। अब हर माह सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर मिली शिकायतें और उसके निस्तारण की स्थिति के बारे में तीनों तहसीलदार
से रिपोर्ट भी ली जाएगी, जिससे कि वास्तविक स्थिति के बारे में पता चल सके।
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