साल बीता पर नहीं बदली सूरत, गाजियाबाद में हादसे को न्यौता दे रहीं 24 जर्जर स्कूलों की इमारत
गाजियाबाद के 24 सरकारी स्कूल एक साल बाद भी जर्जर हालत में हैं, जहां छात्र असुरक्षित परिस्थितियों में पढ़ने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग ने मरम्मत के लिए ...और पढ़ें
-1784685542730_m.webp)
मुरादनगर पैंगा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय की जर्जर इमारत। जागरण
HighLights
गाजियाबाद के 24 सरकारी स्कूल एक साल से जर्जर।
छात्र असुरक्षित भवनों में पढ़ने को मजबूर, हादसे का डर।
मरम्मत के लिए बजट प्रस्ताव लंबित, कार्य शुरू नहीं।
जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। जिले के सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों की तस्वीर एक साल बाद भी नहीं बदली है। पिछले वर्ष अभियान के दौरान सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग ने पूरे जिले में सर्वे कराया था।
तकनीकी जांच के आधार पर 24 विद्यालयों को जर्जर घोषित किया गया, लेकिन आज तक किसी भी स्कूल में मरम्मत या पुनर्निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो सका है। विभाग ने जर्जर स्कूलों के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए शासन को बजट का प्रस्ताव भेजा था। अधिकारियों के अनुसार जुलाई के अंत या अगस्त के पहले सप्ताह तक बजट स्वीकृत होने की उम्मीद जताई।
इन विद्यालयों की स्थिति यह है कि जर्जर घोषित स्कूलों में पर्याप्त कक्ष नहीं हैं। कहीं एक ही कमरे में दो-दो कक्षाओं का संचालन हो रहा है तो कहीं बच्चों को खुले में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। जर्जर भवनों के कारण स्कूलों में पर्याप्त कक्ष नहीं हैं।
ऐसे में एक ही कमरे में दो-दो कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है। कुछ विद्यालयों में बच्चों को खुले में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। बरसात में छत टपकने, दीवारों में दरार और जलभराव के कारण हादसे का खतरा बना हुआ है। शिक्षक भी असुरक्षित भवनों में पढ़ाने को मजबूर हैं।
खबरें और भी
बच्चों को वर्षा से बचाने के लिए स्कूल में नहीं है सुरक्षित छत
प्राथमिक विद्यालय झुंडपुरा में वर्षा होने पर विद्यार्थियों के बैठने के लिए सुरक्षित छत नहीं है। विद्यालय में 174 विद्यार्थियों का नामांकन है और कुल पांच कमरे हैं जिनमें से तीन को जर्जर घोषित किया जा चुका है। इनमें एक कमरे की स्थिति ज्यादा खराब है। छत से प्लास्टर टूटकर गिर रहा है, सरिया दिख रहे हैं।
इस कमरे पर ताला लगा दिया गया है। बाकी जर्जर घोषित दो कमरों में वर्षा होने पर पानी नहीं रुक पाता। कमरों की छत से पानी आता है। पर्याप्त कक्ष न होने की वजह से बच्चों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाई करानी पड़ रही है। प्रधानाध्यापिका शबनम प्रवीन का कहना है कि इस साल वर्षा होने पर कमरे सुरक्षित नहीं हैं। ऐसे में जगह नहीं होने की वजह से बच्चों की छुट्टी कर देना ही एक विकल्प होगा।
सड़क से पांच फीट नीचे स्कूल में पढ़ रहे 573 बच्चे
लोनी के धरौटी खुर्द स्थित परमहंस विहार कालोनी के कंपोजिट विद्यालय की स्थिति आज भी नहीं सुधरी है। स्कूल की इमारत सड़क से करीब पांच फीट नीचे है। वर्षा होते ही परिसर और कक्षाओं में पानी भर जाता है। पिछले वर्ष यहां 491 विद्यार्थी थे, जो अब बढ़कर 573 हो गए हैं।
शिक्षकों की संख्या भी 12 से बढ़कर 13 हो गई है, लेकिन भवन की समस्या जस की तस बनी हुई है। जलभराव के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और भवन की दीवारों को भी नुकसान पहुंच रहा है। आपरेशन कायाकल्प के तहत जिले के कई स्कूलों में सुधार हुआ, लेकिन इस विद्यालय की समस्या अब तक दूर नहीं हो सकी।
जर्जर भवन के साए में पढ़ रहे 50 से अधिक बच्चे
मुरादनगर ब्लाक के पैंगा गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में 50 से अधिक बच्चे जर्जर भवन के साये में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल की छत और दीवारों से प्लास्टर उखड़ चुका है और कई जगह ईंटें दिखाई देने लगी हैं। आए दिन छत से प्लास्टर गिरने की घटनाएं होती रहती हैं। पूर्व में कई बच्चे घायल भी हो चुके हैं।
वर्षा के दौरान विद्यालय परिसर में जलभराव हो जाता है, जिससे बच्चों और शिक्षकों की परेशानी बढ़ जाती है। अभिभावक कई बार भवन की जीर्णोद्धार कराने की मांग कर चुके हैं। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मीनाक्षी कौशिक ने भी शिक्षा विभाग को कई बार पत्र भेजकर भवन की मरम्मत कराने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जर्जर घोषित कक्षों में शिक्षक, विद्यार्थियों एवं अन्य किसी का भी प्रवेश वर्जित किया हुआ है। विद्यालयों के पुनर्निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए शासन को बजट का प्रस्ताव भेजा गया था। बजट मिलने पर स्कूलों में समाधान कराया जा सकेगा।
- ओपी यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी गाजियाबाद