तंगहाली में पला हॉकी का जुनून, संघर्ष भरा रहा राजकुमार पाल का अर्जुन अवार्ड तक का सफर
ओलिंपियन राजकुमार पाल को अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया है, जो उनके संघर्ष और समर्पण की कहानी है। बचपन में पिता को खोने के बाद मां ने उन्हें और उनके भाइयों को हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया, जहां करमपुर स्टेडियम ने उनकी प्रतिभा को निखारा।

तंगहाली से ओलिंपिक तक का सफर: राजकुमार पाल को मिला अर्जुन अवार्ड।
HighLights
ओलिंपियन राजकुमार पाल को अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया।
पिता के निधन के बाद मां ने संघर्षों से पाला।
करमपुर स्टेडियम में हॉकी सीखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। करमपुर के मेघबरन सिंह हॉकी स्टेडियम से हॉकी की बारीकियां सीखकर ओलिंपिक और हॉकी इंडिया टीम तक का सफर तय करने वाले ओलिंपियन राजकुमार पाल अब अर्जुन अवार्ड तक का सफर संघर्ष भरा रहा। यह उपलब्धि उनके परिवार के लिए संघर्ष, समर्पण और सफलता की मिसाल है।
बचपन में ही पिता को खो देने के बाद मां मनराजी देवी ने बेहद तंगहाली में तीनों बेटों जोखन, राजू और राजकुमार का पालन-पोषण किया। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने बेटों को हॉकी सीखने के लिए करमपुर स्टेडियम भेजा। स्टेडियम के संस्थापक स्व. राजबहादुर सिंह ने इस परिवार की प्रतिभा और परिस्थितियों को समझते हुए न सिर्फ दो जून की रोटी का इंतजाम किया, बल्कि तीनों भाइयों को खेल से जुड़ी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
मेहनत और प्रतिभा के दम पर तीनों भाइयों ने हॉकी में पहचान बनाई। आज जोखन पाल, राजू पाल और राजकुमार पाल की उपलब्धियों से मां समेत पूरा गांव गौरवान्वित है। राजकुमार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए ओलिंपिक में भी हिस्सा लिया।
उनकी इस सफलता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने उन्हें पुलिस उपाधीक्षक का दायित्व भी सौंपा है। अब अर्जुन अवार्ड उनके संघर्ष की एक और बड़ी उपलब्धि बनकर सामने आया है। वहीं उनके परिवार के लोगों ने खुशी भी जाहिर की है।
