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गाजीपुर: सीने में दर्द से तड़पती रही आशा संगिनी, इमरजेंसी डॉक्टर ने कहा- पहले लाइन लगाओ

Published: Thu, 27 Aug 2026 10:41 PM (IST)

गाजीपुर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सीने में तेज दर्द से पीड़ित आशा संगिनी रिजवाना खातून को तत्काल इलाज के ...और पढ़ें

सीने में दर्द से तड़पती रही आशा संगिनी।

सीने में दर्द से तड़पती रही आशा संगिनी।

HighLights

  1. आशा संगिनी को इमरजेंसी में इलाज से मना किया गया।

  2. सीने में तेज दर्द के बावजूद लाइन में लगने को कहा।

  3. मजबूरन निजी अस्पताल में कराना पड़ा उपचार।

जागरण संवाददाता, गाजीपुर। जिस इमरजेंसी का मतलब ही गंभीर मरीज को तत्काल चिकित्सा सुविधा देना है, वहीं अगर सीने में तेज दर्द से खड़ी तक न हो पाने वाली मरीज को पहले लाइन में लगने को कहा जाए तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

राजकीय मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था को लेकर इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। इसमें आशा संगिनी रिजवाना खातून और उनके पति इमरजेंसी में सुनवाई न होने की बात कहते हुए व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

रिजवाना खातून ने बताया कि 26 अगस्त को अचानक उनकी तबीयत बेहद खराब हो गई और सीने में तेज दर्द के कारण वह खड़ी तक नहीं हो पा रही थीं।

पति उन्हें लेकर मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे, जहां पहले इलाज के बजाये उन्हें लाइन में लगने के लिए कहा गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें निजी अस्पताल में उपचार के लिए जाना पड़ा। हालांकि दैनिक जागरण इस प्रसारित वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

वीडियो में रिजवाना खातून बता रही हैं कि उन्होंने इमरजेंसी में पर्ची बनवाने के बाद चिकित्सक से भी अपनी गंभीर स्थिति बताई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने गार्ड और अपनी परिचित आशा कार्यकर्ता प्रमिला से भी मदद की गुहार लगाई।

उनका कहना है कि उस समय सीने में इतना अधिक दर्द और बेचैनी थी कि चलना भी मुश्किल था। ऐसे में निजी अस्पताल का सहारा लेना पड़ा। इस बारे में जानने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डा. आनंद मिश्रा से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं किया।

विवश होकर गई निजी अस्पताल

रिजवाना खातून ने बताया कि वह वर्ष 2006 से स्वास्थ्य विभाग में आशा के रूप में काम कर रही हैं और अब आशा संगिनी हैं। सरकार की योजनाओं में आशाओं को स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बताया जाता है, लेकिन गंभीर स्थिति में उनकी सुनवाई न होना बेहद पीड़ादायक है।

उनके पति ने भी सवाल उठाया कि यदि हार्ट अटैक या सांप काटने जैसी स्थिति में मरीज को लाइन में खड़ा होने के लिए कहा जाएगा तो तत्काल चिकित्सा का उद्देश्य ही क्या रह जाएगा।

वीडियो में दंपती ने आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ताओं को निजी अस्पताल में जाने से रोका जाता है, लेकिन सरकारी इमरजेंसी में ऐसी स्थिति पैदा होने पर मरीज के सामने निजी अस्पताल जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।

इमरजेंसी में तत्काल इलाज की व्यवस्था की गई हैं। वहां 10 बेड भी लगे हैं। चिकित्सक को पहले इलाज करना चाहिए था। पूरा मामला क्या है मैं इसकी जांच कराउंगा। -डॉ. केएन चौधरी, सीएमएस जिला अस्पताल।