गाजीपुर में स्ट्रीट लाइट घोटाले में ग्राम प्रधान के अधिकार सीज, डीएम की बड़ी कार्रवाई
गाजीपुर के मुंडेरा बुजुर्ग ग्राम पंचायत में स्ट्रीट लाइट और अन्य विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के चलते जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान नौशाद के अधि ...और पढ़ें

गाजीपुर में स्ट्रीट लाइट घोटाले पर डीएम की बड़ी कार्रवाई, ग्राम प्रधान के अधिकार सीज।
HighLights
ग्राम प्रधान नौशाद के वित्तीय अधिकार प्रतिबंधित।
स्ट्रीट लाइट भुगतान में मिली भारी अनियमितताएँ।
अब तीन सदस्यीय समिति संभालेगी पंचायत।
जागरण संवाददाता, भांवरकोल (गाजीपुर)। जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने ग्राम पंचायत मुंडेरा बुजुर्ग में स्ट्रीट लाइट लगाने सहित विभिन्न विकास कार्यों में सरकारी धन के दुरुपयोग और अनियमितताओं के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए ग्राम प्रधान नौशाद के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिए हैं। अब ग्राम पंचायत का संचालन तीन सदस्यीय समिति के माध्यम से किया जाएगा।
यह कार्रवाई मुंडेरा बुजुर्ग निवासी दुर्गेश राय द्वारा दो मार्च 2024 को दाखिल शपथ पत्र आधारित शिकायत के बाद की गई। शिकायत में ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों में फर्जी भुगतान, अनियमितता और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया।
जांच के दौरान स्ट्रीट लाइट, कुओं के जीर्णोद्धार, मनरेगा कार्य, पोखरा खुदाई, नाली और सीसी रोड निर्माण समेत विभिन्न विकास कार्यों की पड़ताल की गई। जांच रिपोर्ट में कई मामलों में एमबी (मेजरमेंट बुक) और भुगतान के बीच भारी अंतर पाया गया। स्ट्रीट लाइट लगाने के नाम पर किए गए भुगतान और वास्तविक कार्य में विसंगतियां सामने आईं।
कुछ मामलों में फर्म के बजाय किसी व्यक्ति विशेष को भुगतान किया गया था। कई कार्यों में एमबी बुक में कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि तक अंकित नहीं मिली। रिपोर्ट के अनुसार ग्राम पंचायत में 29 स्ट्रीट लाइट के भुगतान के बावजूद एमबी में 50 स्ट्रीट लाइट दर्शाई गईं। वहीं एक अन्य कार्य में 21 स्ट्रीट लाइट के भुगतान के सापेक्ष 25 स्ट्रीट लाइट की एमबी पाई गई।
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इसके अलावा 15 स्ट्रीट लाइट के भुगतान में नियमों की अनदेखी कर धनराशि फर्म के बजाय एक व्यक्ति विशेष को भुगतान किए जाने की पुष्टि हुई। हालांकि कई मनरेगा और निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन संतोषजनक मिला, लेकिन वित्तीय प्रक्रिया और अभिलेखों में गंभीर अनियमितताओं के आधार पर जिलाधिकारी ने यह कार्रवाई की है।