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गाजीपुर में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय बोले- बलिदानियों को याद करना तभी सार्थक, जब उनके आदर्श जीवन में उतारें

By Shivanand Rai Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 10 Sep 2026 05:17 PM (IST)

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने गाजीपुर में कहा कि बलिदानियों को याद करना तभी सार्थक है जब उनके आदर्शों ...और पढ़ें

गाजीपुर में नित्यानंद राय ने कहा: बलिदानियों के आदर्शों को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि।

गाजीपुर में नित्यानंद राय ने कहा: बलिदानियों के आदर्शों को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि।

HighLights

  1. बलिदानियों के आदर्शों को जीवन में उतारना ही सच्ची श्रद्धांजलि।

  2. वीर अब्दुल हमीद का शौर्य युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित करता है।

  3. कारगिल शहीदों की स्मृतियों को संरक्षित करना राष्ट्र का दायित्व।

जागरण संवाददाता, दुल्लहपुर (गाजीपुर)। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि वीर अब्दुल हमीद की शौर्यगाथा पढ़कर परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र सिंह यादव के मन में सेना में जाने की प्रेरणा पैदा हुई। यह अब्दुल हमीद के पराक्रम और बलिदान की ताकत है कि उनकी कहानी आज भी युवाओं के भीतर देशसेवा का जज्बा पैदा करती है। उन्होंने कहा कि अब्दुल हमीद के बलिदान की स्मृति को जीवंत रखना और उनके परिवार का सम्मान करना पूरे देश का दायित्व है।

नित्यानंद राय ने कहा कि कारगिल युद्ध में 527 वीर जवानों ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। युद्ध पर जाने से पहले सैनिकों द्वारा लिखे गए अंतिम पत्र और संदेश आज भी परिवारों और देशवासियों के लिए अमूल्य धरोहर हैं। इन स्मृतियों को संरक्षित करने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ियां बलिदानियों के त्याग और पराक्रम से प्रेरणा ले सकें।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश बलिदानियों की स्मृतियों और उनके सम्मान को संरक्षित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। वीरों के नाम पर स्मारक और अन्य निर्माण केवल सम्मान के प्रतीक नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा के केंद्र हैं। गृह राज्यमंत्री ने कहा कि शहीदों को नमन तभी सार्थक होगा, जब हम उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लें। वीर अब्दुल हमीद और देश के सभी बलिदानी सैनिकों की वीरता सदैव राष्ट्र को प्रेरणा देती रहेगी।

उन्होंने कहा कि अब्दुल हमीद ने जिस साहस के साथ दुश्मन के टैंकों का सामना किया, वह केवल एक सैनिक की वीरता नहीं, बल्कि भारत की देशभक्ति, समर्पण और संकल्प का प्रतीक है। सैनिक की पहचान किसी पद या व्यक्तिगत सम्मान से नहीं, बल्कि भारत मां के सपूत के रूप में उसके त्याग से होती है। देश का जवान विपरीत परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता।

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