अरुणाचल से खरीदी राइफल-रिवाल्वर का नहीं मिला सुराग, सपा सांसद अफजाल अंसारी पर दूसरा मुकदमा
सपा सांसद अफजाल अंसारी के खिलाफ गाजीपुर में दूसरा मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला अरुणाचल प्रदेश से खरीदी गई प्रतिबंधित बोर की राइफल और रिवाल्वर के ...और पढ़ें

गाजीपुर में सपा सांसद अफजाल अंसारी पर दूसरा मुकदमा, शस्त्र अभिलेख गायब होने का आरोप।
HighLights
सपा सांसद अफजाल अंसारी पर गाजीपुर में दूसरा मुकदमा दर्ज।
प्रतिबंधित राइफल और रिवाल्वर के मूल शस्त्र अभिलेख गायब।
तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रेमा शंकर वर्मा भी नामजद किए गए।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। अरुणाचल प्रदेश के अलोंग से कई दशक पहले खरीदी गई प्रतिबंधित बोर की राइफल और .32 बोर रिवाल्वर का मूल शस्त्र अभिलेख गायब होने से सत्यापन न होने पर सपा सांसद अफजाल अंसारी के खिलाफ शहर कोतवाली में दूसरा मुकदमा दर्ज किया गया है।
आरोप है कि शस्त्र लाइसेंस की मूल पत्रावली तत्कालीन शस्त्र लिपिक से मिलीभगत कर अभिलेखागार से गायब कराई गई। इससे हथियारों की वर्तमान स्थिति नहीं पता चल रही। इसमें तत्कालीन शस्त्र लिपिक प्रेमा शंकर वर्मा को भी नामजद किया गया है। सांसद पर असलहा लाइसेंस प्रकरण में यह दूसरा मुकदमा है।
पुलिस उपमहानिरीक्षक, वाराणसी परिक्षेत्र वैभव कृष्ण के निर्देश पर दिवंगत माफिया मुख्तार अंसारी, उसके स्वजन और आइएस-191 (इंटर स्टेट) गिरोह के सदस्यों-सहयोगियों को जारी शस्त्र लाइसेंसों की जांच कराई जा रही है। गिरोह से जुड़े 51 शस्त्र लाइसेंस हैं। इन पर 145 विभिन्न हथियारों की खरीद-फरोख्त दर्ज है। भौतिक सत्यापन में कई हथियारों की वर्तमान स्थिति का पता नहीं चल सका।
पुलिस जांच में सामने आया कि संबंधित शस्त्र लाइसेंसों की मूल पत्रावली और क्रय-विक्रय संबंधित अभिलेख डीएम कार्यालय के तत्कालीन शस्त्र लिपिकों से मिल कर गायब करा दिए गए। ऐसा हथियारों का सत्यापन प्रभावित करने और गिरोह सदस्यों द्वारा उनके दुरुपयोग को छिपाने के लिए किया गया।
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सांसद अफजाल के शस्त्र लाइसेंस संख्या 1241/ पी-11 की जांच में पता चला कि इस पर 21 दिसंबर 1988 को प्रतिबंधित बोर की राइफल (संख्या 86 एबी-1926) खरीदी गई। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश के अलोंग में टकन राइबर ब्रदर्स आर्म्स एम्युनिशन डीलर को बेची गई फिर उसी फर्म से .32 बोर रिवाल्वर संख्या ए-12741 खरीदी गई।
रिवाल्वर शस्त्र पंजिका में सोल्ड अंकित है, किसे बेची गई इसकी जानकारी अभिलेख में नहीं है। जांच में पता चला कि उक्त शस्त्र लाइसेंस 18 जुलाई 23 को डीएम के आदेश से निरस्त है। दोनों हथियारों की वर्तमान स्थिति का पता नहीं चलने से भौतिक सत्यापन नहीं हो सका। जांच में फर्म ने बताया कि 16 अप्रैल 2001 को ओल्ड मार्केट अलोंग में आग लगने से फर्म के सभी अभिलेख जल गए हैं। डीएम वेस्ट शियांग आलो की रिपोर्ट में उक्त शस्त्र के संबंध में कोई अभिलेख न होने की जानकारी दी गई। सांसद को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला।