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    गोंडा में 98 करोड़ के बिजली कामों की होगी चेकिंग, जांच के दायरे में बिजनेस प्लान; कार्यों का होगा गुणवत्ता परीक्षण

    Updated: Wed, 08 Jul 2026 04:15 PM (IST)

    देवीपाटन मंडल में 98 करोड़ रुपये के बिजली कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाएगी, क्योंकि निर्बाध आपूर्ति के दावों के बावजूद शिकायतें कम नहीं हुई हैं। मुख् ...और पढ़ें

    इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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    HighLights

    1. 98 करोड़ के बिजली कार्यों की तकनीकी जांच होगी।

    2. निर्बाध आपूर्ति के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।

    3. मुख्य अभियंता ने गुणवत्ता जांच का आदेश दिया।

    संवाद सूत्र, गोंडा। देवीपाटन मंडल में बिजली व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगभग 98 करोड़ रुपये की लागत से कराए गए बिजनेस प्लान के कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाएगी। मंडल के 14 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति देने के उद्देश्य से उपकेंद्रों के निर्माण, क्षमता विस्तार, नई लाइनें बिछाने और नए फीडर स्थापित करने सहित कार्य कराए गए हैं।

    हालांकि, इन कार्यों के बावजूद बिजली लाइनों में फाल्ट, ट्रिपिंग और आपूर्ति बाधित होने की शिकायतों में अपेक्षित कमी नहीं आने पर मुख्य अभियंता बिजली ने पूरे प्रकरण की तकनीकी जांच कराने की कवायद शुरू कर दी है। प्लान के तहत दो नए बिजली उपकेंद्रों के निर्माण की योजना बनाई गई, जिस पर करीब 10 करोड़ 30 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

    इसके अलावा लगभग डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से 33 केवी की नई विद्युत लाइन बिछाई जानी थी, ताकि बढ़ते लोड के बीच आपूर्ति व्यवस्था को अधिक भरोसेमंद बनाया जा सके। वहीं 14 करोड़ 79 लाख रुपये की लागत से 16 बिजली उपकेंद्रों का उच्चीकरण कर उनकी क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। इसके साथ ही 12 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से नए फीडरों का निर्माण कर ओवरलोड की समस्या कम करने की योजना तैयार की गई।

    करोड़ों रुपये के कराए गए कार्य

    इसके अतिरिक्त विभिन्न उपकेंद्रों, लाइनों और वितरण तंत्र को मजबूत करने के लिए भी करोड़ों रुपये के कार्य कराए गए। मुख्य अभियंता बिजली देवीपाटन मंडल यदुनाथ यथार्थ ने बिजनेस प्लान के तहत अब तक कराए गए कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की जांच कराने का निर्णय लिया है। जांच में यह परखा जाएगा कि स्वीकृत मानकों के अनुरूप कार्य हुए हैं या नहीं तथा जिन उद्देश्यों के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए गए, उनका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचा या नहीं।

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    यदि जांच में निर्माण कार्यों में लापरवाही, तकनीकी खामियां या गुणवत्ता में कमी मिली तो संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई भी तय मानी जा रही है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी, ताकि मंडल के उपभोक्ताओं को बेहतर और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।