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पिता-पुत्र की उम्र में 10 साल का अंतर, बस इतनी सी बात पर 13 साल से रुका वेतन, अनुकंपा पर मिली थी नौकरी

Published: Fri, 14 Aug 2026 02:14 PM (IST)Updated: Fri, 14 Aug 2026 04:11 PM (IST)

एक शिक्षक को पिता-पुत्र की उम्र में मात्र 10 साल के अंतर के कारण साढ़े 13 साल से बिना वेतन गुजारा करना पड़ रहा है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. शिक्षक का वेतन 13 साल से रुका।

  2. पिता-पुत्र की उम्र में 10 साल का अंतर।

  3. हाई कोर्ट ने बीएसए को तलब किया।

तेज प्रताप सिंह, गोंडा। पिता-पुत्र की उम्र में मात्र 10 साल के अंतर के कारण एक शिक्षक को साढ़े 13 साल से बिना वेतन गुजारा करना पड़ रहा है। हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद विभाग ने शिक्षक का बकाया वेतन नहीं दिया।

शिक्षक की याचिका पर चल रही अवमानना कार्यवाही में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को दो सप्ताह में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होने का आदेश दिया है।

यह है पूरा मामला

भगवान प्रसाद को 14 जनवरी 2005 को अनुकंपा के आधार पर नियुक्त किया गया था और 18 अगस्त 2010 को प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर पदोन्नति मिली। उनकी जन्मतिथि के संबंध में शिकायत के आधार पर अक्टूबर 2012 में उनका वेतन रोक दिया गया।

2014 में उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिस पर कोर्ट ने पुनर्विचार का आदेश दिया, लेकिन 20 फरवरी 2015 को विभाग ने यह कहते हुए प्रत्यावेदन खारिज कर दिया कि स्कूल अभिलेख के अनुसार भगवान प्रसाद की जन्मतिथि और उनके बेटे की उम्र में 10 वर्ष का अंतर है, जो संभव नहीं है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 22 सितंबर को वित्त एवं लेखा अधिकारी को पत्र लिखकर याचिकाकर्ता को वेतन भुगतान करने का निर्देश दिया, लेकिन 10 अक्टूबर 2020 को विभाग ने वेतन देने से इन्कार कर दिया, जिसके बाद शिक्षक ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।

23 फरवरी 2023 को न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को मासिक आधार पर वेतन का भुगतान किया जाए और बकाया वेतन पर छह प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भी हकदार माना गया।

न्यायालय के आदेश का अनुपालन न होने पर भगवान प्रसाद ने अवमानना याचिका दायर की। मुकदमे के दौरान उनका स्थानांतरण हो गया, जिसके बाद उन्होंने वर्तमान बीएसए अमित कुमार सिंह को पक्षकार बनाने का प्रार्थना पत्र दिया।

19 जनवरी 2026 को न्यायमूर्ति मनीष कुमार ने प्रार्थना पत्र स्वीकार किया और नव नियुक्त बीएसए को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। बुधवार को शासकीय अधिवक्ता ने अवमानना याचिका की सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।

न्यायालय ने आदेश दिया कि बीएसए अमित कुमार सिंह दो सप्ताह के अंदर अनुपालन शपथपत्र दाखिल करें, अन्यथा उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा। अगली सुनवाई सात सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।