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गोरखपुर एम्स से लिंक किए गए 62 हजार लोग, आसान हुई उपचार सुविधा

Published: Thu, 16 Jul 2026 12:25 PM (IST)

गोरखपुर एम्स ने येल यूनिवर्सिटी के सहयोग से पूर्वांचल में 62 हजार लोगों को स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली से जोड़ा है, ...और पढ़ें

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान। जागरण

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान। जागरण

HighLights

  1. एम्स गोरखपुर ने 62 हजार लोगों को स्वास्थ्य निगरानी से जोड़ा।

  2. येल यूनिवर्सिटी के सहयोग से नि:शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण जारी।

  3. रक्तचाप जांच, अब मधुमेह और कैंसर की होगी स्क्रीनिंग।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने पूर्वांचल में सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल की है। संस्थान ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) डुमरी खास और झरना टोला क्षेत्र के करीब 62 हजार लोगों को स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली से जोड़ते हुए उनका स्वास्थ्य डाटा तैयार किया है। इन लोगों का नियमित निश्शुल्क स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। जांच में गंभीर बीमारी मिलने पर एम्स रेफर किया जाता है, जिससे उन्हें बिना किसी परेशानी के समय पर विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध हो रहा है।

एम्स ने पीएचसी डुमरी खास और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शिवपुर को गोद लिया है। सीएचसी शिवपुर के अधीन पीएचसी झरना टोला आता है। इन तीनों स्वास्थ्य केंद्रों में एम्स का ओपीडी संचालित होता है। डुमरी खास में पूरे सप्ताह तथा शिवपुर व झरना टोला में सप्ताह में तीन-तीन एम्स के डाक्टर बैठते हैं और रोगियों को परामर्श देते हैं। इन क्षेत्रों के लोगों का स्वास्थ्य डाटा तैयार करने के साथ ही उन्हें एम्स में आसानी से उपपचार उपलब्ध कराने के लिए पहल की गई है।

सरदार नगर ब्लाक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डुमरी खास के अंतर्गत आने वाले 11 गांवों के लगभग 47 हजार लोगों को इस योजना में शामिल किया गया है। वहीं पीएचसी झरना टोला और महादेव झारखंडी के आसपास रहने वाले करीब 15 हजार लोगों को भी इस स्वास्थ्य नेटवर्क से जोड़ा गया है। इन सभी क्षेत्रों में अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी के सहयोग से सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत लोगों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और डिजिटल स्वास्थ्य डाटा तैयार किया जा रहा है।

अभियान के अंतर्गत सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण करने के अलावा 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों की रक्तचाप जांच की जा रही है। इसके आधार पर उच्च रक्तचाप के रोगियों की पहचान कर उनका रिकार्ड तैयार किया जा रहा है। अगले चरण में मधुमेह और विभिन्न प्रकार के कैंसर की स्क्रीनिंग शुरू की जाएगी। इससे इन गंभीर बीमारियों का शुरुआती अवस्था में पता चल सकेगा और रोगियों को समय पर उपचार मिल सकेगा।

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एम्स ने इस अभियान के संचालन के लिए 10 सदस्यीय टीम गठित की है, जिसका खर्च येल यूनिवर्सिटी देती है। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की यह टीम गांव-गांव जाकर लोगों की जांच, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एकत्र करने और जरूरतमंद रोगियों को रेफर करने का काम कर रही है।

जिन रोगियों को एम्स के लिए रेफर किया जाता है, उन्हें रेफरल पर्ची के आधार पर संस्थान में उपचार की प्रक्रिया में प्राथमिकता और सुविधा मिलती है। इससे रोगियों का समय बच रहा है और उन्हें उपचार के लिए अनावश्यक भागदौड़ नहीं करनी पड़ रही है।


अभी डुमरी खास क्षेत्र के 11 गांवों तथा झरना टोला और महादेव झारखंडी के आसपास के लोगों को इस परियोजना से जोड़ा गया है। दूसरे चरण में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर से जुड़े अन्य गांवों को भी इस योजना में शामिल किया जा सकता है। इससे अधिक आबादी तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और गैर-संचारी रोगों की समय रहते पहचान सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

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-डा. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक एम्स

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