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गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सीवरेज संकट, बाल रोग विभाग में गंदगी और लिफ्ट ठप

Published: Thu, 03 Sep 2026 02:00 PM (IST)

बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के बाल रोग विभाग में एक साल से सीवरेज की समस्या है, जहां खराब मोटर और ...और पढ़ें

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज का हाल। जागरण

गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कॉलेज का हाल। जागरण

HighLights

  1. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक साल से सीवरेज की गंभीर समस्या।

  2. खराब मोटर और एसटीपी से बाल रोग विभाग में गंदगी फैली।

  3. सीवर का पानी लिफ्ट बेसमेंट में, लिफ्ट हुई बंद।

गजाधर द्विवेदी, गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग में एक साल से बनी सीवरेज की समस्या के पीछे बड़ी तकनीकी खामी सामने आई है। शौचालयों से निकलने वाले गंदे पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाने वाले मोटर के खराब होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित है। मोटर काम नहीं कर रहा तो शौचालयों का पानी एसटीपी तक पहुंचने के बजाय नालियों में बह रहा है। जांच में पता चला कि एसटीपी भी खराब है। गंदा पानी बाल रोग विभाग परिसर में फैल रहा है और दुर्गंध के साथ संक्रमण का खतरा बढ़ा रहा है। इतना ही नहीं सीवर का पानी लिफ्ट के बेसमेंट तक पहुंच गया, जिससे लिफ्ट बंद हो गई।

बाल रोग विभाग में बड़ी संख्या में गंभीर हालत में बच्चे भर्ती रहते हैं। प्रतिदिन ओपीडी में भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। ऐसे संवेदनशील विभाग में साफ-सफाई और सीवरेज व्यवस्था का सुचारू रहना बेहद जरूरी है। इसके बावजूद यहां गंदे पानी की निकासी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। गंदा पानी निकालने के लिए पांच मोटर लगाए गए हैं। चार मोटर तीन साल से खराब पड़े हैं। एक मोटर चल रहा था, वह भी लगभग छह माह से बंद है।

न तो एसटीपी तक गंदा पानी पहुंच पा रहा है और न ही एसटीपी काम कर रहा है। इस वजह से पानी नालियों के रास्ते परिसर में फैलने लगा। गंदे पानी की दुर्गंध के कारण मरीजों और तीमारदारों को भी परेशानी बढ़ रही है। बाल रोग विभाग ने रख-रखाव विभाग को इस समस्या के समाधान के लिए कई बार पत्र लिखा। दो प्राचार्य बदल गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया।

शिकायत और रखरखाव की व्यवस्था पर सवाल
अस्पताल की सीवरेज व्यवस्था के रखरखाव की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन के साथ संबंधित इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस इकाई की होती है। किसी अस्पताल में मोटर, पंप, पाइपलाइन या एसटीपी जैसे महत्वपूर्ण उपकरण खराब होने पर नियमित निरीक्षण के जरिये इसकी जानकारी समय पर मिलनी चाहिए। खराबी मिलने के बाद उसे ठीक कराने के लिए शिकायत, कार्यादेश और मरम्मत की प्रक्रिया भी तय समय में पूरी होनी चाहिए।

बाल रोग विभाग में एक साल तक समस्या बने रहने से इसी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि यदि मोटर की खराबी की जानकारी पहले से थी तो मरम्मत में इतना समय क्यों लगा? क्या नए मोटर की जरूरत थी या पुराने की मरम्मत से काम चल सकता था? इसके लिए बजट उपलब्ध नहीं था या तकनीकी स्तर पर कोई दूसरी अड़चन थी?

जागरण प्रभाव- बंद शौचालय खुले, मोटर मरम्मत की प्रक्रिया शुरू
दैनिक जागरण द्वारा मामला उठाए जाने के बाद मंगलवार को विभाग में एक मोटर की मरम्मत शुरू कराई गई। शौचालयों की सफाई भी कराई गई और उनके ताले खुलवा दिए गए। इससे तत्काल स्तर पर मरीजों और तीमारदारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। दैनिक जागरण ने मंगलवार के अंक में ''''ताले में बंद शौचालय, गंदे पानी में उपचार की राह'''' खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसका संज्ञान लेते हुए कालेज प्रशासन ने शौचालयों का ताला खुलवा दिया और उसे साफ कराकर उपयोग योग्य बना दिया है। साथ ही एक मोटर की मरम्मत भी शुरू करा दी गई।

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खराब मोटर ने रोक दी लिफ्ट की सांस
बाल रोग विभाग में सीवरेज की समस्या का असर अब केवल गंदे पानी और दुर्गंध तक सीमित नहीं रहा। सीवर का पानी लिफ्ट के बेसमेंट तक पहुंचने के बाद लिफ्ट बंद हो गई। इससे मरीजों और तीमारदारों की परेशानी और बढ़ गई।

बाल रोग विभाग में छोटे बच्चों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में लिफ्ट की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। गंभीर मरीजों को वार्ड, जांच केंद्र या अन्य विभागों तक पहुंचाने में लिफ्ट बंद होने से अतिरिक्त दिक्कत होती है। तीमारदारों को बच्चों को लेकर सीढ़ियों या दूसरे वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। सबसे गंभीर सवाल सुरक्षा का है। यदि बेसमेंट में सीवर का पानी पहुंच रहा है तो वहां बिजली के उपकरण, मोटर और लिफ्ट की मशीनरी भी प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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मुझे जल्दी ही देखरेख की जिम्मेदारी मिली है। पूरे कालेज परिसर के सीवर सिस्टम को ठीक कराया जा रहा है। बाल रोग विभाग की समस्या भी हमारी प्राथमिकता में रही। शौचालय खुलवा दिए गए हैं, उनकी सफाई करा दी गई है। मोटर मरम्मत की प्रक्रिया शुरू हो गई। धीरे-धीरे सभी मोटर ठीक करा दिए जाएंगे। एसटीपी के लिए भी इंजीनियर बुलाए गए हैं। उसे भी ठीक कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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-डा. अशोक यादव, प्रमुख अधीक्षक बीआरडी मेडिकल कालेज