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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 24, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Dussehra 2023: आज विजयदशमी की रात लगेगी गोरक्षपीठाधीश्वर की अदालत, दंडाधिकारी बन सुलझाएंगे संतों के विवाद

    By Jagran NewsEdited By: Mohammad Sameer
    Updated: Tue, 24 Oct 2023 07:23 AM (IST)

    योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर के तौर पर नाथ पंथ की शीर्ष संस्था अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा के अध्यक्ष भी हैं। इसी पद के कारण नाथ ...और पढ़ें

    आज विजयदशमी की रात लगेगी गोरक्षपीठाधीश्वर की अदालत (file photo)
    आज विजयदशमी की रात लगेगी गोरक्षपीठाधीश्वर की अदालत (file photo)

    HighLights

    1. विजयदशमी की रात गोरखनाथ मंदिर में लगेगी गोरक्षपीठाधीश्वर की अदालत
    2. योगी सुलझाएंगे संतों का विवाद

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को संतों की अदालत में दंडाधिकारी होंगे। नाथ पंथ की ‘पात्र पूजा’ में वह पात्र देवता के रूप में प्रतिष्ठित होकर नाथ पंथ के संतों का विवाद सुलझाएंगे। विजयदशमी की रात गोरखनाथ मंदिर में होने वाली पात्र पूजा की यह प्रतीकात्मक परंपरा संतों के बीच अनुशासन बनाए रखने का माध्यम है।

    पात्र पूजा की परंपरा में गोरक्षपीठाधीश्वर पात्र देवता के रूप में प्रतिष्ठित होते हैं। नाथ पंथ से जुड़े साधु-संत और पुजारी दक्षिणा अर्पित कर उनकी पूजा करते हैं। अगले दिन उन्हें विदाई स्वरूप यह दक्षिणा वापस कर दी जाती है। पूजा के बाद पीठाधीश्वर दंडाधिकारी की भूमिका में आ जाते हैं और संतों की शिकायतों की सुनवाई करते हैं। परंपरा के अनुसार पात्र देवता के सामने झूठ नहीं बोला जाता है।

    यदि किसी संत के विरुद्ध कोई शिकायत सही पाई जाती है या कोई नाथ परंपरा के विरुद्ध किसी गतिविधि में संलिप्त मिलता है तो गोरक्षपीठाधीश्वर संबंधित संत पर कार्रवाई का निर्णय लेते हैं। सजा व माफी दोनों का अधिकार पात्र देवता को होता है। पात्र पूजा के दौरान संतों की अदालत करीब तीन घंटे लगती है। इस दौरान किसी को भी पूजा परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होती। पूजा में केवल वही संत व पुजारी हिस्सा लेते हैं, जिन्होंने नाथ पंथ के किसी योगी से दीक्षा ग्रहण की है। पूजा के दौरान सभी को अपने गुरु का नाम बताना पड़ता है।

    इसलिए दंडाधिकारी माने जाते हैं गोरक्षपीठाधीश्वर

    योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठाधीश्वर के तौर पर नाथ पंथ की शीर्ष संस्था अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा के अध्यक्ष भी हैं। इसी पद के कारण नाथ पंथ का संत समाज उन्हें पात्र देवता और दंडाधिकारी के रूप में मान्यता देता है। सामाजिक एवं राष्ट्रीय एकता, समरसता के अभियान को राष्ट्रव्यापी फलक देने के लिए महंत दिग्विजयनाथ ने 1939 में अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा की स्थापना की थी।

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    वह आजीवन इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद 1969 में महंत अवेद्यनाथ राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। उनके ब्रह्मलीन होने के बाद 25 सितंबर, 2014 को योगी आदित्यनाथ अध्यक्ष बने। नाथ पंथ प्रमुख रूप से सतनाथी, रामनाथी, धर्मनाथी, लक्ष्मननाथी, दरियानाथी, गंगानाथी, बैरागीपंथी, रावलपंथी या नागनाथी, जालंधरनाथी, ओपंथी, कापलती या कपिलपंथी और धज्जा नाथी या महावीर पंथी नाम के 12 उपपंथों में विभाजित है। इसी वजह से इसे बारह पंथ योगी महासभा का नाम दिया गया है।