विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अब बकरी पालन से स्वरोजगार होगा आसान, सरकार 100 बकरियों की यूनिट पर दे रही 50 प्रतिशत सब्सिडी

Published: Sun, 25 Oct 2026 11:15 AM (IST)

राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत बकरी पालन से स्वरोजगार शुरू करने वालों के लिए सरकार ने नियमों में बदलाव किया ...और पढ़ें

यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर AI द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. एनएलएम में बकरी पालन के नियम बदले गए हैं।

  2. अब 100 बकरियों की इकाई से शुरुआत होगी।

  3. परियोजना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान मिलेगा।

सुनील सिंह, गोरखपुर। बकरी पालन के जरिये स्वरोजगार शुरू करने वाले लोगों के लिए राष्ट्रीय पशुधन मिशन (एनएलएम) में बदलाव किया गया है। अब लाभार्थियों को एक बार में 100 बकरियों के पालन की इकाई स्थापित करने का ही मौका मिलेगा। इससे पहले इस योजना के तहत 100 से 500 तक बकरियों के पालन की इकाई स्थापित करने का प्रविधान था।

चयनित लाभार्थियों को परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत अनुदान मिलता है। योजना के संचालन के लिए पशुपालन विभाग को नोडल बनाया गया है। इसी के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ दिलाया जाता है। पिछले दिनों गोरखपुर आए भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार ने चयनित 13 लाभार्थियों के साथ बैठक में नई व्यवस्था की जानकारी दी।

बताया कि 100 बकरियों की इकाई का संचालन बेहतर रहता है तो इकाई का विस्तार किया जा सकेगा। इसके लिए 100 के गुणांक में बकरियों की संख्या बढ़ाने की व्यवस्था होगी। योजना के तहत बकरियों के साथ पांच बकरों की उपलब्धता भी अनिवार्य है।

नई व्यवस्था से बकरी पालन के इच्छुक लोगों को चरणबद्ध तरीके से अपना व्यवसाय स्थापित करने का अवसर मिलेगा। योजना का लाभ लेने के लिए पात्रता, परियोजना लागत व आवेदन संबंधी शर्तों को पूरा करना होता है।

यह भी पढ़ें- अब कोर्ट के चक्करों से मुक्ति: घर बैठे होगी RCT की सुनवाई, सीधे बैंक खाते में आएगी क्षतिपूर्ति

20 लाख रुपये है 100 बकरी पालन की परियोजना लागत
100 बकरी व पांच बकरा पालन की इकाई की परियोजना की लागत 20 लाख रुपये हैं। इसी के अनुपात में 500 बकरी व 25 बकरा के पालन की लागत है। परियाेजना लागत का 50 प्रतिशत अनुदान भारत सरकार की ओर से मिलता है।

यह भी पढ़ें- रेलवे काउंटर से टिकट लेने वाले यात्रियों को भी मिलेगा 10 लाख का बीमा कवर, बोर्ड ने जारी की नई गाइडलाइन