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जननायक एक्सप्रेस में सफर करती दो नेपाली महिलाएं गिरफ्तार, तलाशी के दौरान जांघों पर बंधी मिली 12 पैकेट चरस

Published: Sun, 20 Sep 2026 08:13 PM (IST)

राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर जननायक एक्सप्रेस से दो नेपाली महिलाओं को 6.078 किलोग्राम चरस के साथ गिरफ्तार किया।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. डीआरआई ने गोरखपुर में 6.078 किलोग्राम चरस बरामद की।

  2. जननायक एक्सप्रेस से दो नेपाली महिलाएं गिरफ्तार की गईं।

  3. बरामद चरस की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत छह करोड़ रुपये।

जागरण संवाददाता, गोरखपुर। राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) की टीम ने रविवार को गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर रुकी जननायक एक्सप्रेस ट्रेन से 6.078 किलोग्राम चरस बरामद की। नेपाल की रहने वाली दो महिलाएं जांघो के चारों ओर बांधकर 12 पैकेट चरस लेकर जा रही थी।

टीम ने दोनों महिलाओं को भी गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि दोनों ने बिहार से ट्रेन पर सवार हुई थी और पंजाब के लुधियाना जा रही थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत छह करोड़ रुपये है।

डीआरआई अधिकारियों के अनुसार, टीम को सूचना मिली थी कि बिहार से आने वाली ट्रेन के जरिये मादक पदार्थ की तस्करी की जा रही है। सूचना के आधार पर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सघन जांच की जा रही थी।

इसी दौरान दो महिलाओं की गतिविधियां संदिग्ध लगने पर उन्हें रोका गया। पूछताछ के बाद उनके सामान की तलाशी ली गई तो कुछ संदिग्ध नहीं मिला। इसके बाद महिलाओं की जांच करने पर उनके शरीर पर छिपाकर रखे गए 12 पैकेट बरामद हुए।

अधिकारियों के मुताबिक, दोनों महिलाओं ने साड़ी पहन रखी थी और चरस के पैकेट घुटने के ऊपर जांघों के चारों ओर लपेटकर छिपाए थे। पैकेटों में काले रंग का पदार्थ था। फील्ड टेस्टिंग किट से जांच करने पर पदार्थ के चरस होने की पुष्टि हुई।

कुल 6.078 किलोग्राम चरस बरामद हुई। डीआरआई ने बरामद चरस को एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत जब्त कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच के अनुसार, चरस को पंजाब में खपाने की तैयारी थी। मामले में आगे की जांच जारी है।

एक माह में 11 किलो से अधिक चरस जब्त

डीआरआई के अधिकारियों का कहना है कि इस महीने अब तक एजेंसी ने 11 किलोग्राम से अधिक चरस जब्त कर कुल पांच तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा है। ये पांचों तस्कर बिहार के रहने वाले थे और नेपाल से चरस लाकर पंजाब ले जा रहे थे।

इसमें दो तस्कर पति-पत्नी थे। यह कार्रवाई देश को 'नशा मुक्त भारत' बनाने के निरंतर प्रयासों का एक अहम हिस्सा है। मामले में आगे की कड़ियां जोड़ने के लिए गहन छानबीन जारी है।

नेपाल के चरस की मिलती है मुंहमांगी कीमत
नेपाल मूल की चरस हिमालय की तलहटी में उगने वाले जीवित कैनाबिस पौधों से मैनुअल श्रम के माध्यम से निकाली जाती है। यह हैशिश से अलग होती है, जिसे सूखी पत्तियों से मशीन के माध्यम से तैयार किया जाता है। अपनी अधिक क्षमता के कारण नेपाल मूल की चरस की महानगरों और विदेशों में काफी मांग है। उच्च गुणवत्ता और विशिष्ट विशेषताओं के कारण नेपाल मूनेपाल मूल की चरस अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में भी काफी मांग में रहती है।

तस्करी नेटवर्क की सक्रियता ने बढ़ाई चिंता
नेपाल मूल की चरस की इतनी बड़ी खेप का बिहार से गोरखपुर होते हुए पंजाब तक पहुंचना संगठित तस्करी नेटवर्क की सक्रियता की ओर संकेत करता है। सवाल यह है कि खेप किसके इशारे पर लाई गई और इसे पंजाब में किसे सौंपा जाना था। एक पखवारे के अंदर पांच तस्करों का पकड़ा जाना और उनके पास से बरामद चरस की मांग को देखते हुए जांच एजेंसियां अब तस्करों के संपर्कों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी है।

फिर से स्टेशन और ट्रेनों की निगरानी पर उठे सवाल
गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए जीआरपी थाना है। जीआरपी दावा करता है कि वह 24 घंटे स्टेशन आने वाले यात्रियों और ट्रेनों में संदिग्धों की जांच करती है। इसके बावजूद डीआरआइ को विशिष्ट सूचना के आधार पर कार्रवाई करनी पड़ी। अगर डीआरआइ की टीम को सूचना नहीं मिलती और कार्रवाई नहीं करती तो एक पखवाड़े के अंदर दो बार चरस की इतनी बड़ी खेप के साथ तस्कर पंजब तक पहुंच जाते।

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