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    गोरखपुर एम्स के 12 डॉक्टर ऋषिकेश में देंगे बयान, डॉ. सुरेखा किशोर पर फर्जी नियुक्ति का आरोप

    Updated: Mon, 09 Mar 2026 03:35 PM (GMT+05:30)

    गोरखपुर एम्स के 12 डॉक्टर पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर के खिलाफ जांच में बयान दर्ज कराने ऋषिकेश एम्स जाएंगे। उन पर अपने बेटों को फर्जी तरीक ...और पढ़ें

    गोरखपुर एम्स। जागरण

    गोरखपुर एम्स। जागरण

    HighLights

    1. गोरखपुर एम्स के 12 डॉक्टर ऋषिकेश जाएंगे बयान देने।

    2. पूर्व ईडी डॉ. सुरेखा किशोर पर फर्जी नियुक्ति का आरोप।

    3. बेटों को घर बैठे 70 हजार रुपये वेतन मिला था।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। एम्स गोरखपुर के 12 डाक्टर एम्स ऋषिकेश में बयान दर्ज कराने वकील के साथ जाएंगे। एम्स प्रशासन ने डॉक्टरों के साथ वकील को जाने की अनुमति दे दी है। एम्स के वरिष्ठ अधिवक्ता वीएन शुक्ल एम्स ऋषिकेश में जांच टीम के सामने डॉक्टरों के साथ पक्ष रखेंगे।

    बेटों को नौकरी देने के बाद घर बैठे तनख्वाह दिलाने के मामले में एम्स गोरखपुर से हटाई गईं तत्कालीन कार्यकारी निदेशक (ईडी) डॉ. सुरेखा किशोर के खिलाफ जांच में बयान देने के लिए डॉक्टरों को 11 व 12 मार्च को बुलाया गया है। एम्स के मीडिया प्रभारी डॉ. अरूप मोहंती ने कहा कि वकील को साथ ले जाने की अनुमति मिल गई है।

    यह है मामला
    डॉ. सुरेखा किशोर जून 2020 में एम्स की ईडी बनाई गई थीं। उन्होंने वर्ष 2021 में अपने बेटों को एम्स में नियुक्त किया था। सुरेखा किशोर के बेटे डाॅ. शिखर किशोर वर्मा का एम्स में चयन साक्षात्कार के आधार पर किया गया था। एक मार्च 2021 को जारी सूची में चुने गए चार नान एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट मेडिकल की सूची में डाॅ. शिखर का नाम पहले स्थान पर था।

    12 जुलाई को नान एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट मेडिकल के लिए साक्षात्कार की अंतिम सूची जारी हुई। इसमें कार्यकारी निदेशक के दूसरे बेटे डा. शिवल किशोर वर्मा का नाम पहले स्थान पर था। दोनों बेटों को 70-70 हजार रुपये प्रति माह वेतन दिया गया। आरोप था कि दोनों कभी एम्स में नहीं गए, ईडी के आवास में ही रहे।

    डॉ. सुरेखा किशोर के करीबी रहे हैं सभी डॉक्टर
    जिन डॉक्टरों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है वह सभी तत्कालीन ईडी डा. सुरेखा किशोर के करीबी रहे हैं। इन डाक्टरों की डाॅ. सुरेखा किशोर के कार्यकाल में एम्स में तूती बोलती थी। हालांकि वर्तमान में कुछ डाॅक्टर एम्स गोरखपुर से जा चुके हैं।

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    रजिस्टर की फोटोकापी के आधार पर हुई थी शिकायत
    आरोप है कि डाॅ. सुरेखा किशोर के दोनों बेटों की फर्जी उपस्थिति एक रजिस्टर पर दर्ज की जाती थी। इस रजिस्टर की फोटोकापी के आधार पर विजिलेंस में शिकायत की गई थी। विजिलेंस ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की थी। इसके बाद डा. सुरेखा किशोर पर कार्रवाई की गई थी।

    इनको बुलाया गया है...

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    उपस्थिति का मूल रजिस्टर हो गया है गायब

    पिछले वर्ष एम्स ऋषिकेश से डाॅ. सुरेखा किशोर के बेटों की उपस्थिति का मूल रजिस्टर मांगा गया है। इसके बाद एम्स ऋषिकेश से एक कर्मचारी को गोरखपुर भेजा गया। पता चला कि रजिस्टर गायब हो चुका है। अब देखना है कि एम्स ऋषिकेश में डाक्टर क्या बयान दर्ज कराते हैं।